राष्ट्रपति ट्रंप की कॉल नहीं उठा कर पीएम नरेंद्र मोदी ने दिया करारा जवाब- नहीं चलेगी दादागीरी
राष्ट्रपति ट्रंप की कॉल नहीं उठा कर पीएम नरेंद्र मोदी ने दिया करारा जवाब- नहीं चलेगी दादागीरी

रवि पाराशर
कोई दबंग हर वक्त न सिर्फ आपको लाल आंखों से घूरे, बल्कि आपका जीना दूभर करने के लिए तरह-तरह के कौतुक करे, बिजली काट दे, पानी की पाइपलाइन बंद करने की कोशिश करे आदि-इत्यादि, तो आप क्या करेंगे? या तो आप उस स्तर की ही जवाबी कार्रवाई करेंगे या फिर कुछ और तरह के कदम उठा कर अपनी भावनाओं से उसे अवगत कराएंगे।
लेकिन विश्व कूटनय की पेचीदा गलियों में शक्ति संतुलन के नए समीकरणों के दौर में ऐसा सीधे-सीधे नहीं, बल्कि घुमावदार युक्तियों के माध्यम से किया जाता है। अमेरिकी प्रशासन और भारत की नरेंद्र मोदी सरकार के बीच कुछ ऐसी ही परिस्थितियां बनी हुई हैं। राष्ट्रपति ट्रंप भारत को टैरिफ के टंटे में फंसा कर अपना उल्लू सीधा करना चाहते हैं, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कई मंचों पर साफ-साफ कह चुके हैं कि वे भारतीय किसानों के हित को सर्वोपरि मानते हैं और खेती के कारोबार के लिए भारतीय बाजार खोलने की अमेरिका की अनुचित इच्छाओं के आगे किसी कीमत पर नहीं झुकेंगे।
राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले तो पाकिस्तान के साथ युद्धविराम का श्रेय बार-बार ले कर भारत को असहज करने का प्रयास किया और फिर भारतीय उत्पादों पर भारी-भरकम टैरिफ थोप कर अपनी बात मनवाने के लिए दबाव बनाने की कोशिश की। अब जर्मनी के समाचार पत्र फ्रैंकफर्टर अलगेमाइन जितुंग यानी एफएजेड ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से की गई कॉल चार बार उठाई ही नहीं। अब जरा सोचिए कि ट्रंप और उनके प्रशासन को कैसा लग रहा होगा? यह बिल्कुल वैसा ही है कि आप किसी दबंग की हरकतों को सिरे से इग्नोर कर दें, तो उसे कैसा लगेगा?
इसके साथ ही भारत ने अमेरिकी दबाव को दूर करने के लिए वैश्विक कारोबार के नए कामयाब समीकरण साधने शुरू कर दिए हैं। सबसे अच्छी बात तो यह है कि अमेरिका की टैरिफ दादागीरी ने बहुत से देशों को नाराज कर दिया है। ऐसे में उन देशों के साथ भारतीय कारोबारी हित और ज्यादा साधने की राह आसान हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात में कारोबारियों से स्वदेशी का मंत्र अपनाने की अपील कर भारतीयों के मन में अपनी सोच नए सिरे से पहुंचाने की मुहिम जारी रखी है। देश के लोगों के मन में चीनी सामानों के बहिष्कार की बढ़ती भावना के बीच अमेरिकी टैरिफ हमला स्वदेशी के मंत्र को पूरी दृढ़ता के साथ स्थापित करने में मददगार ही साबित होगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रूस से कच्चा ईधन नहीं खरीदने के अमेरिकी दांव-पेंच के दबाव के आगे भी नहीं झुकेंगे, यह कई बार साफ कर चुके हैं। ऐसे में अमेरिका की जिद और रवैया इस तरह का ही रहा, तो वह अलग-थलग पड़ सकता है। भारत में अगर स्वदेशी उत्पादन और खपत का अनुपात चरम पर पहुंचने लगे और अमेरिका पीड़ित शेष विश्व के साथ निर्यात-आयात की फसल लहलहाने लगे, तो क्या होगा? जाहिर है कि फिर अमेरिकी दादागीरी पूरी तरह बेअसर हो जाएगी। हालांकि ऐसा होने में बहुत समय लग सकता है, लेकिन अब सही समय है कि जब भारत और अमेरिका शोषित दुनिया अपने-अपने हितों के बारे में नए सिरे से सोचना शुरू करे|
यदि यह खबर कि ट्रंप के फोन का मोदी जी ने चार बार कोई उत्तर नहीं दिया जिसकी भारतीय मीडिया या अन्य श्रोत से हालांकि कोई पुष्टि नहीं हुई है यदि सच है तो मोदी जी ने सही कदम लिया है जैसा कि पाराशर जी ने लिखा है यह कूटनीति कभी नहीं कहती कि सामने वाले को उसी की भाषा में जबाव दिया जाए ।अपना विरोध या नाराजगी व्यक्त करने का यह एक उचित कदम है।यदि यह सच है तो ट्रंप के लिए इससे ज्यादा डूब कर मरने की बात क्या हो सकती है उसकी दादागिरी का उचित उत्तर है।