पश्चिमी दिल्ली के ओम विहार में मेडिटेशन डे व क्रिसमस सेलिब्रेशन, आत्मरक्षा प्रशिक्षण बना विशेष आकर्षण

पश्चिमी दिल्ली के ओम विहार में मेडिटेशन डे व क्रिसमस सेलिब्रेशन, आत्मरक्षा प्रशिक्षण बना विशेष आकर्षण

उत्तम नगर, पश्चिमी दिल्ली।
पश्चिमी दिल्ली के उत्तम नगर स्थित ओम विहार ब्रह्माकुमारी सेवा केंद्र में 21 दिसंबर को मेडिटेशन डे एवं क्रिसमस डे का भव्य एवं आध्यात्मिक आयोजन किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व सेवा केंद्र की निदेशिका राजयोगिनी बीके विमला दीदी ने किया।

कार्यक्रम की विशेष उपलब्धि यह रही कि क्रिसमस के उपहार के साथ-साथ सभी उपस्थित महिलाओं व बच्चियों को निःशुल्क सेल्फ डिफेंस ट्रेनिंग भी प्रदान की गई। यह प्रशिक्षण दिल्ली व देशभर में “लेडी सिंघम” के नाम से विख्यात सब-इंस्पेक्टर किरन सेठी द्वारा दिया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत एक घंटे की राजयोग कमेंट्री मेडिटेशन से हुई, जिसमें सभी को परमात्मा के सानिध्य की गहन अनुभूति कराई गई। इसके पश्चात विशिष्ट अतिथि राजयोगिनी बीके हेमा दीदी एवं सब-इंस्पेक्टर किरन सेठी का वेलकम डांस व पुष्पगुच्छ के साथ भव्य स्वागत किया गया।मंच से किरन सेठी की असाधारण सेवाओं और उपलब्धियों पर प्रकाश डाला गया। उन्हें राष्ट्रपति पदक, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, आई वूमेन ग्लोबल अवॉर्ड, अभय अवॉर्ड सहित अनेक सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। वे अब तक 11 लाख से अधिक महिलाओं को आत्मरक्षा प्रशिक्षण दे चुकी हैं तथा जी.बी. रोड जैसे संवेदनशील क्षेत्रों से 250 से अधिक लड़कियों को मुक्त कराकर उनका पुनर्वास कर चुकी हैं। उन्होंने दृष्टिहीन, श्रवण बाधित एवं मानसिक रूप से कमजोर बच्चों को भी प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाया है।इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित सभी महिलाओं को आत्मरक्षा के व्यावहारिक गुर सिखाए तथा बच्चियों को गुड टच-बैड टच के प्रति जागरूक किया।

कार्यक्रम का समापन प्रेरणादायी गीत “जीवन चलने का नाम है” के साथ किया गया।इसके पश्चात राजयोगिनी बीके हेमा दीदी ने क्रिसमस पर्व के आध्यात्मिक रहस्य को स्पष्ट करते हुए कहा कि हमारे शास्त्रों में वर्णित कल्पवृक्ष का प्रतीक ही क्रिसमस ट्री है तथा इसी समय शिव बाबा ब्रह्मा तन का आधार लेकर ज्ञानयोग की सौगात देते हैं। क्रिसमस ट्री पर जगमगाते सितारे आत्माओं के ज्योति स्वरूप के प्रतीक हैं।

कार्यक्रम के अंत में संयोजिका राजयोगिनी बीके विमला दीदी ने योग-प्रस्तुति द्वारा यह संदेश दिया कि कैसे परमात्मा के समक्ष आत्मचिंतन द्वारा हम अपने विकर्मों को भस्म कर, क्षमा मांगकर और क्षमा देकर स्वयं को हल्का, शक्तिशाली और शांत बना सकते हैं।समारोह का समापन सौगात, रिफ्रेशमेंट एवं नृत्य प्रस्तुति के साथ हुआ, जिससे पूरा सभागार आनंद, उमंग और उल्लास से भर गया।

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