Ghazal By Ravi Parashar रवि पाराशर की ग़ज़ल

Ghazal By Ravi Parashar रवि पाराशर की ग़ज़ल

रवि पाराशर

पैदल सीधा चलता है,
वार वो तिरछा करता है।

कैसे हाथ मिलाएगा,
हाथ में उसके पैसा है।

तुम ही खाओ पूड़ी-खीर,
अपनी हालत ख़स्ता है।

अच्छा है, तो हमने किया,
बुरा तो होना होता है।

ऐसा किसको मिला कभी,
वैसा किसको मिलता है।

उसकी आंखों में झांको,
जोकर जब भी हंसता है।

खोदी ही थी क्यों खाई,
क्यों अब उसको भरता है?

स्वर्ग में जाने की ख़ातिर,
मरना ख़ुद ही पड़ता है।

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