Ghazal By Ravi Parashar वृद्धाश्रम में रहता है
Ghazal By Ravi Parashar वृद्धाश्रम में रहता है

वृद्धाश्रम में रहता है,
फ़तवे जारी करता है।
अपने बच्चों को समझा,
हम से बातें करता है!
मन का कतई काला है,
सब कहते हैं हीरा है।
गधा पंजीरी खाता है,
मुंह में ऊंट के जीरा है।
वक़्त बड़ा है ? बच्चा है,
डगमग-डगमग चलता है।
रोटी जैसा दिखता है,
वो पूनम का चंदा है।