किसे कार्टून की तरह पेश करने की कोशिश थी? The Accidental Prime Minister Review

किसे कार्टून की तरह पेश करने की कोशिश थी? The Accidental Prime Minister Review

The Accidental Prime Minister की सबसे ज़्यादा चर्चा पॉलिटिकल वजहों से हुई थी क्योंकि ये फिल्म देश के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर बनी थी और 2019 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले आई थी. फिल्म पत्रकार संजय बारू की किताब The Accidental Prime Minister पर बेस्ड है.

संजय बारू 2004 से 2008 के बीच प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मीडिया एडवाइज़र रहे थे. किताब में उन्होंने उन घटनाओं और बातों का जिक्र किया है जो मनमोहन सिंह के साथ काम करते हुए उन्होंने देखा और महसूस किया.

संजय की किताब आई थी 2014 में और फिल्म आई 2019 में. इसमें मनमोहन सिंह का किरदार निभाया है अनुपम खेर ने. उस दौरान ये कहा गया कि फिल्म में जानबूझकर मनमोहन सिंह को कमज़ोर प्रधानमंत्री के तौर पर दिखाया गया है. सच कहूं तो मुझे खुद ये लगा कि मनमोहन सिंह बनने के चक्कर में अनुपम खेर… मनमोहन सिंह से भी आगे निकल गये. मनमोहन की चाल की नकल करने की कोशिश में अनुपम ओवरएक्टिंग करते दिखाई दिये. चलते वक्त इतने हाथ तो मनमोहन सिंह खुद भी नहीं हिलाते. लगता है कि फिल्म में मनमोहन सिंह को एक कार्टून की तरह पेश करने की कोशिश की गई.

फिल्म में मुझे जो अच्छा लगा वो है इसका प्रिंट. बेहतरीन कैमरा वर्क के साथ फिल्म बनाई गई है. कांग्रेस और बीजेपी के जो पुराने रीयल विज़ुअल फिल्म में यूज़ किये गये हैं उन्हें छोड़ दें तो एक-एक सीन बढ़िया शूट हुआ है.

The Accidental Prime Minister का बैकग्राउंड म्यूज़िक भी अच्छा लगता है और अक्षय खन्ना का एक पत्रकार यानी संजय बारू के रूप में दिखना भी. अक्षय खन्ना का वॉर्डरोब बेहतरीन है जो फिल्म को ग्लैमरस बनाता है.

पॉलिटिकल पर्सनैलिटीज़ के रोल के लिए चुने गए सभी एक्टर ठीक-ठाक हैं हालांकि अहमद पटेल के रोल में किसी और एक्टर को लिया जा सकता था.

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