Ghazal by Ravi Parashar सांप का पहले बीन हो जाना
Ghazal by Ravi Parashar

सांप का पहले बीन हो जाना,
और फिर आस्तीन हो जाना !
दोस्तों पर भरोसा मत करना,
दुश्मनों का यक़ीन हो जाना।
और कुछ देर डूबना ख़ुद में,
और ताज़ातरीन हो जाना।
अर्श को सिर्फ़ ये नहीं आता,
जिस्म होकर ज़मीन हो जाना।
हद की हद है कि एक पुर्ज़े का,
ख़ुद में पुख़्ता मशीन हो जाना।
कितनी गहराई है समंदर की,
ये तो ख़ुद में विलीन हो जाना।
ख़्वाब में ख़ुद ही उसका आ जाना,
और ज़्यादा हसीन हो जाना।