उप-राष्ट्रपति चुनाव : हाई कोर्ट के आठ पूर्व जजों ने इंडिया ब्लॉक के उम्मीदवार जस्टिस रेड्डी की लालू यादव से मुलाकात पर क्यों उठाए गंभीर सवाल? Vice-President Election: Why did eight former High Court judges raise serious questions on India Block candidate Justice Reddy’s meeting with Lalu Yadav?
उप-राष्ट्रपति चुनाव : हाई कोर्ट के आठ पूर्व जजों ने इंडिया ब्लॉक के उम्मीदवार जस्टिस रेड्डी की लालू यादव से मुलाकात पर क्यों उठाए गंभीर सवाल?
Vice-President Election: Why did eight former High Court judges raise serious questions on India Block candidate Justice Reddy’s meeting with Lalu Yadav?

रवि पाराशर
एनडीए के उम्मीदवार सी. पी. राधाकृष्णन और इंडिया ब्लॉक के प्रत्याशी पूर्व जस्टिस बी. सुदर्शन रेड्डी के बीच उप-राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव की प्रक्रिया के दौरान राजनैतिक शुचिता को ले कर सवाल उठना गंभीर सवाल खड़े करता है। सवाल यह है कि क्या भारतीय लोकतंत्र में किसी भी तरह चुनाव जीतना सही ठहराया जा सकता है? क्या सिर्फ नंबर गेम में बाजी मार कर सरकार बना लेना या किसी भी पद का चुनाव जीत लेना ही लोकतांत्रिक राजनीति का अंतिम मकसद हो गया है या होना चाहिए?
इन सवालों को ताकत मिलती है भारतीय हाईकोर्टों के आठ पूर्व जजों के सामूहिक बयान से। पूर्व जजों ने इंडिया ब्लॉक के उप-राष्ट्रपति उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी की राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू यादव से मुलाकात पर कड़ा ऐतराज जताया है। जजों की दलील है कि लालू यादव करीब 940 करोड़ रुपये के चारा घोटाले में दोष सिद्ध अपराधी हैं। ऐसे में उप-राष्ट्रपति पद की केंपेनिंग के लिए सुप्रीम कोर्ट के जज रह चुके जस्टिस बी. सुदर्शन रेड्डी की उनसे मुलाकात किसी भी तरह से नैतिक आचरण नहीं कहा जा सकता।
हाईकोर्ट के पूर्व जजों ने सामूहिक रूप से बयान जारी कर कहा है कि यह जान कर बेहद दुख होता है कि इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी ने हाल ही में लालू प्रसाद यादव से निजी मुलाकात की। पूर्व जजों की दलील है कि चारा घोटाले के दोषी लालू यादव उप-राष्ट्रपति पद के चुनाव में वोट डालने की पात्रता नहीं रखते हैं। ऐसे में उनके साथ रेड्डी की मुलाकात से कोई उचित राजनैतिक मकसद भी पूरा नहीं होता।
जस्टिस रेड्डी और लालू यादव की मुलाकात पर घोर आपत्ति जताने वाले पूर्व जजों में बॉम्बे हाई कार्ट के जज रह चुके जस्टिस एस. एम. खांडेपारकर, बॉम्बे हाई कार्ट के ही पूर्व जज जस्टिस अंबादास जोशी, झारखंड हाई कार्ट के पूर्व जज जस्टिस आर. के. मार्थिया, इलाहाबाद हाई कार्ट जज रह चुके जस्टिस देवेंद्र कुमार आहूजा, दिल्ली हाई कार्ट पूर्व जज जस्टिस एस. एन. ढींगरा, पंजाब और हरियाणा हाई कार्ट के जज रह चुके जस्टिस करम चंद पुरी, केरल हाई कार्ट के पूर्व जज जस्टिस पी. एन. रवींद्रन और राजस्थान हाई कार्ट के जज रह चुके जस्टिस आर. एस. राठौर शामिल हैं।
इन जजों ने इंडिया ब्लॉक का नाम तो नहीं लिया, लेकिन सामूहिक बयान में कहा है कि न्यायपालिका में जस्टिस रेड्डी का ऊंचा कद रहा है, फिर भी वे निजी तौर पर ऐसे शख्स से मुलाकात करते हैं, जिसके आपराधिक कृत्यों की पुष्टि भारतीय अदालतें कर चुकी हैं। आमतौर पर मामूली आरोपों पर भड़क उठने वाले कुछ गुटों की इस मामले में चुप्पी चौंकाने वाली है।
पूर्व जजों ने कहा है कि यह मामला खुद को संविधान के स्वयंभू संरक्षक बताने वालों के भेदभाव भरे स्वभाव को सामने लाता है। उनकी स्वार्थी राजनीति अपने फायदे के लिए गंभीर दोषों तक की अनदेखी करती है। जजों ने लालू यादव से मुलाकात को जस्टिस रेड्डी की बड़ी चूक करार दिया है। साथ ही कहा है कि इसका मूल्यांकन करना देश की जनता का फर्ज है।
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