बिहार चुनाव 2025 : आपस में खटकने लगे एनडीए और महागठबंधन के बर्तन, नीतीश ने चला एक और मास्टर स्ट्रोक Bihar Elections 2025: NDA and Mahagathbandhan’s utensils started clashing with each other, Nitish played another master stroke
बिहार चुनाव 2025 : आपस में खटकने लगे एनडीए और महागठबंधन के बर्तन, नीतीश ने चला एक और मास्टर स्ट्रोक
Bihar Elections 2025: NDA and Mahagathbandhan’s utensils started clashing with each other, Nitish played another master stroke

रवि पाराशर
बिहार में चुनावी माहौल गर्माता जा रहा है। महागठबंधन और एनडीए की पार्टियों के बीच सीट बंटवारे पर मंथन शुरू हो चुका है। दोनों ही गठबंधनों के लिए यह कवायद काफी मुश्किलों भरी रह सकती है। हाल ही में वोटर अधिकार यात्रा कर इंडिया ब्लॉक ने सड़कों पर समां बांधा था। वहीं चुनावी पंडित प्रशांत किशोर अपनी जन सुराज पार्टी के साथ चुनावी चौपालों में नजर आ रहे हैं।
हालांकि जन सुराज पार्टी और महागठबंधन की सड़कों पर मौजूदगी ने दम जरूर दिखाया, लेकिन पीएम नरेंद्र मोदी की मां को गाली और केरल कांग्रेस की बीड़ी वाली पोस्ट के जरिये बिहार को नीचा दिखाने की कोशिश इंडिया ब्लॉक के गले की फांस बन गई है। एनडीए सीधे सड़कों पर अभी उतनी नजर भले ही नहीं आ रही हो, लेकिन माहौल उसकी तरफ भी ठीक-ठाक ही नजर आ रहा है। नीतीश सरकार भी पिछले कुछ महीनों के दौरान अपनी कोर वोटरों यानी महिला वोटरों को रिझाने में लगी है।
समाज कल्याण योजना की पेंशन राशि तीन गुनी करने, राज्य की सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 35 फीसदी आरक्षण देने के फैसले के बाद सोमवार को सरकार ने आंगनबाड़ी सेविका और आंगनबाड़ी सहायिकाओं का मानदेय बढ़ा दिया है। आंगनवाड़ी सेविकाओं को अब सात हजार रुपये की बजाय नौ हजार रुपये हर महीने मिलेंगे। साथ ही आंगनवाड़ी सहायिकाओं की जेब में अब चार हजार की बजाय साढ़े चार हजार रुपये हर महीने जाएंगे। जाहिर है कि इससे बहुत सी महिलाओं को फायदा होगा। पिछले तीन चुनावों में महागठबंधन के मुकाबले एनडीए को महिलाओं के ज्यादा वोट मिले हैं।
इस बीच, महागठबंधन में शामिल वाम दलों ने सोमवार को 40 सीटों पर दावेदारी की बात कह कर तेजस्वी यादव और राहुल गांधी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। साल 2020 के चुनाव में वाम दलों का स्ट्राइक रेट बहुत ज्यादा रहा था, ऐसे में इस बार वे ज्यादा सीटों पर रूमाल रखेंगे, यह पहले से ही लग रहा था। वीआईपी के मुकेश सहनी भी 60 सीटों पर दावेदारी जता चुके हैं। इसके अलावा झारखड मुक्ति मोर्चा और चिराग पासवान के चाचा पशुपति पारस की अगुवाई वाली पार्टी ने भी महागठबंधन में शामिल होने का फैसला किया है। जाहिर है कि वे भी कुछ सीटें मांगेंगे ही।
उधर, एनडीए के लिए सीटों का बंटवारा आसान नहीं होगा। चिराग पासवान की एलजेपी ने पिछला विधानसभा चुनाव एनडीए के साथ नहीं, बल्कि अलग रहते हुए लड़ा था। तब एलजेपी ने जनता दल यूनाइटेड को काफी नुकसान पहुंचाया था। लेकिन अब चिराग एनडीए के साथ हैं। माना जा रहा है कि वे उन सीटों पर भी दावेदारी करेंगे, जिन पर पिछले चुनाव में वे दूसरे नंबर पर रहे थे।
ऐसी करीब सारी की सारी आठ-नौ सीटों पर जेडीयू की जीत हुई थी। अब चिराग अगर उन सीटों की जिद करते हैं, तो जेडीयू के लिए यह आसान नहीं होगा। एनडीए में शामिल जीतन राम मांझी दो दिन पहले ही अपनी सहयोगी पार्टी एलजेपी के चिराग पासवान के चाल-चरित्र पर उंगलियां उठा चुके हैं। ऐसे में, एनडीए की रसोई में बर्तन आपस में खन-खन नहीं करेंगे, यह नहीं हो सकता।
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