यूपी रेरा ने दिखाया डर, अलर्ट हुए सभी बिल्डर UP RERA resolves 76% complaints in 2025
यूपी रेरा ने दिखाया डर, अलर्ट हुए सभी बिल्डर UP RERA resolves 76% complaints in 2025

दिल्ली-एनसीआर में अपना घर चाहने वाले लाखों लोगों का सपना पूरे पैसे जमा करने के बाद भी वर्षों से पूरा नहीं हो पा रहा है। बहुत से बिल्डरों ने पैसे तो ले लिए, लेकिन अर्से से उनके प्रोजेक्ट अटके पड़े हैं। जिन्होंने जैसे-तैसे पजेशन दे दिए हैं, वे मकान मालिकों की रजिस्ट्री नहीं करा पा रहे हैं। दूसरी तरफ बिल्डर भी सरकारी नियम-कायदों का रोना रो रहे हैं। इसे देखते हुए विंटरनेट पर हम मुहिम शुरू कर रहे हैं, ताकि ये पड़ताल की जा सके कि मकान खरीददार, बिल्डर और सरकार, तीनों किस तरह फायदे में रह सकते हैं।
बिल्डर, ऑथॉरिटी, प्रशासन, सरकार, और अदालतों के मकड़जाल में फंसा होम बायर वैसे तो बरसों से सिस्टम के आगे बेबस रहा है लेकिन पिछले बीस-पच्चीस साल में ये टॉर्चर काफी बढ़ गया था. इस दौरान हजारों की संख्या में घर खरीददार परेशान, बर्बाद और कंगाल हुए. यहां तक कि कुछ तो इस दुनिया को ही छोड़ कर चले गए. खास तौर पर एनसीआर में प्राइवेट बिल्डर्स ने खूब तबाही मचाई. हालांकि अब हालात में थोड़ा बहुत बदलाव आया है।
अगर यूपी की बात करें तो यहां रियल एस्टेट सेक्टर लंबे समय से विवादों, प्रोजेक्ट में देरी, और ग्राहकों की शिकायतों का केंद्र बना हुआ है। खास तौर पर नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और लखनऊ जैसे शहरी क्षेत्रों में हज़ारों ऐसे फ्लैट खरीदार हैं, जिन्हें समय पर पजेशन नहीं मिला या जिनसे वादे के मुताबिक सुविधाएं नहीं दी गईं।
हालांकि सरकार और नियामक संस्थाएं अब बिल्डरों की मनमानी पर लगाम लगाने की दिशा में लगातार कदम उठा रही हैं। उत्तर प्रदेश रेरा यानी UP RERA के पास अब तक बिल्डरों के खिलाफ 58,545 शिकायतें दर्ज की जा चुकी हैं, जो पूरे देश में सबसे ज़्यादा हैं। ये संख्या रियल एस्टेट सेक्टर में उपभोक्ताओं की नाराज़गी और बिल्डरों की लापरवाही को साफ दिखाती है।
यूपी रेरा ने अपनी स्थापना से अब तक 50,812 मामलों का समाधान कर लिया है, यानी उसका सक्सेस रेट लगभग 85.20% रहा है। ये आंकड़ा न केवल रेरा की सक्रियता का सबूत है, बल्कि फ्लैट खरीदारों को इंसाफ दिलाने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत भी है।
बिल्डर्स के खिलाफ इन 58,545 शिकायतों में सबसे अधिक मामले गौतमबुद्ध नगर, लखनऊ, गाजियाबाद, वाराणसी और मेरठ से आए थे। ये वो जिले हैं जहां पिछले दशक में रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स की बाढ़ आई थी और सैकड़ों बिल्डर्स ने बड़े-बड़े वादों के साथ प्रोजेक्ट लॉन्च किए थे, लेकिन समय पर प्रोजेक्ट पूरा नहीं किया या खरीदारों को धोखा दिया।
रेरा ने इन मामलों में कई बिल्डरों पर जुर्माना लगाया है, प्रोजेक्ट्स का रजिस्ट्रेशन रद्द किया है और कुछ मामलों में एफआईआर तक दर्ज करवाई गई है। डिफॉल्टर बिल्डर्स की संपत्तियों की कुर्की की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। रेरा की कार्यवाही से यह स्पष्ट हो गया है कि अब बिल्डरों को प्रोजेक्ट लॉन्च कर अधूरा छोड़ देने की खुली छूट नहीं है।
नोएडा और ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने भी ऐसे बिल्डरों के खिलाफ कार्रवाई तेज की है जिन्होंने अथॉरिटी से लिए गए प्लॉट्स की किश्तें जमा नहीं कीं या बिना अनुमति के निर्माण किया। कई बिल्डरों की संपत्तियां सील की गई हैं और बकाया वसूली की प्रक्रिया तेज की गई है।
इसके अलावा, हाल ही में विकास प्राधिकरणों से खरीदे गए एफ ए आर यानी अतिरिक्त फ्लोर एरिया रेशियो पर टैक्स चोरी का मामला सामने आया था जिसके तहत 500 से अधिक बिल्डरों को 18 प्रतिशत जीएसटी की पेनल्टी भरने का नोटिस भी जारी किया गया है। ये कार्रवाई कानपुर, आगरा, लखनऊ, मेरठ और नोएडा जैसे शहरों में की जा रही है, जिससे संकेत मिलता है कि सरकार अब टैक्स चोरी और नियम के उल्लंघन पर सख्त है।
इन कार्रवाइयों का असर अब धीरे-धीरे दिखने लगा है। कई बिल्डर कंपनियों ने पुराने प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए फंडिंग जुटाई है या नए निवेशकों के साथ मिलकर काम दोबारा शुरू किया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने भी बिल्डरों और खरीदारों के बीच विवादों को सुलझाने के लिए विशेष समाधान सेल स्थापित करने की पहल की है।
हालांकि अभी भी ज़रूरत है कि फ्लैट खरीदारों को भरोसेमंद, पारदर्शी और न्यायपूर्ण रियल एस्टेट वातावरण मिले। जिन लोगों ने अपने जीवन की सबसे बड़ी पूंजी एक घर के सपने में लगा दी, उनके लिए एक मजबूत कानूनी सिस्टम समय पर न्याय मिलना ज़रूरी है। उत्तर प्रदेश में रेरा की सक्रियता और हालिया कार्रवाइयों से ये उम्मीद जगी है कि अब रियल एस्टेट सेक्टर में अनुशासन, पारदर्शिता और उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा हो सकेगी।