Israel approves Trump’s peace plan in Gaza; Hamas will be wiped out if it doesn’t agree गाजा में शांति की ट्रंप की योजना पर इजराइल की मुहर, नहीं माना हमास, तो मिट जाएगा उसका वजूद
Israel approves Trump’s peace plan in Gaza; Hamas will be wiped out if it doesn’t agree
गाजा में शांति की ट्रंप की योजना पर इजराइल की मुहर, नहीं माना हमास, तो मिट जाएगा उसका वजूद

रवि पाराशर
क्या गाजा में विध्वंसक धमाकों की गूंज बंद हो जाने वाली है? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइल के प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू ने गाजा में जंग खत्म करने के लिए शांति योजना का ऐलान कर दिया है। व्हाइट हाउस ने कहा है कि दो साल से गाजा में चल रही लड़ाई को खत्म करने का वक्त आ गया है। इजराइल ने भी शांति योजना को मंजूरी दे दी है। अगर हमास भी राजी हो जाए, तो लड़ाई तुरंत रुक जाएगी। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या हमास इस शांति प्रस्ताव को मान लेगा?
वैश्विक स्तर पर तमाम माथापच्ची के बाद इस साल 19 जनवरी को इजराइल और हमास के बीच युद्धविराम हो गया था, लेकिन 18 मार्च को हमास की टालमटोल की वजह से नेतन्याहू के सब्र का बांध टूट गया और इजराइली गोले गाजा में फिर से आग उगलने लगे। अब हालात ये हैं कि आठ मुस्लिम देश गाजा में शांति की ट्रंप की योजना का स्वागत कर चुके हैं। ये देश हैं- कतर, जॉर्डन, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, पाकिस्तान, तुर्की, इंडोनेशिया और अरब गणराज्य मिस्र। ऐसे में हमास पर शांति योजना मानने का दबाव तो बढ़ेगा।
लेकिन हमास ने इनकार किया, तो क्या होगा? गाजा में शांति की ट्रंप की योजना में स्पष्ट किया गया है कि हमास को अगले 72 घंटों में इजराइल के सभी बंधकों को रिहा करना होगा। अगर ऐसा नहीं किया गया, तो अमेरिका उसका वजूद मिटाने में इजराइल की मदद करेगा। इतना ही नहीं, फिलिस्तीन ने भी कह दिया है कि हमास ने शांति योजना पर हामी नहीं भरी, तो वह खुद उसे खत्म करने में इजराइल की मदद करेगा। ऐसे में लगता तो नहीं है कि हमास के पास शांति योजना को मंजूर करने के अलावा और कोई विकल्प बचा है।
ट्रंप की शांति योजना के तहत शांति पूरी तरह कायम होने और गाजा के पुनर्निर्माण तक अस्थाई एक्जीक्यूटिव बोर्ड सारे काम पर नजर रखेगा। इसके अध्यक्ष डोनाल्ड ट्रंप होंगे। बोर्ड में ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर भी शामिल होंगे। ब्रिटेन ने हाल ही में फिलिस्तीन को राजनयिक मान्यता दी है। जो भी हो, गाजा में अगर शांति कायम होती है, तो ट्रंप सिर उठा कर इसका श्रेय ले सकते हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम का श्रेय लेते वक्त झूठ बोलने की हीनता जैसा बोध इस मामले में उन्हें नहीं होगा।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल तो यही है कि हमास अगर मुस्लिम ब्रदरहुड के दबाव और अमेरिकी दादागीरी के आगे मजबूरन अभी झुक भी गया, तो वह आगे आखिर करेगा क्या? क्या वह आगे भी शांत ही बैठा रहेगा? इजराइल की खुशहाली और इलाके में उसका एकछत्र दबदबा क्या हमास को एक भी पल मंजूर होगा? क्या हमास इजराइल के लिए ऐसा सोता हुआ राक्षस नहीं बन जाएगा, जो अनुकूल परिस्थितियों में जाग कर फिर से आग बरसाने का काम करने लगे? या फिर क्या वह अमेरिका के हाथ की ऐसी कठपुतली बन कर रह जाएगा, जो जब चाहे इलाके में उसके हुक्म की तामील करे?
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