100 years of RSS: Bharat Mata’s picture on a coin for the first time, where is the Congress Seva Dal, formed 102 years ago, today? आरएसएस के 100 साल: सिक्के पर पहली बार भारत माता की तस्वीर, 102 साल पहले बना कांग्रेस सेवा दल आज कहां है?
100 years of RSS: Bharat Mata’s picture on a coin for the first time, where is the Congress Seva Dal, formed 102 years ago, today?
आरएसएस के 100 साल: सिक्के पर पहली बार भारत माता की तस्वीर, 102 साल पहले बना कांग्रेस सेवा दल आज कहां है?

रवि पाराशर
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस की स्थापना के सौ साल पूरे होने के मौके पर दिल्ली में सौ रुपये के सिक्के पर देश में पहली बार भारत माता की तस्वीर अंकित की गई है। यह सिक्का चांदी से बनाया गया है। सिक्के के एक ओर हर सिक्के की तरह भारत के आधिकारिक चिन्ह अशोक स्तंभ के शेरों की छवि अंकित है। दूसरी ओर अपनी सवारी शेर के साथ हाथ में पताका लिए भारत माता की तस्वीर अंकित की गई है। भारत माता के सामने नमन करते स्वयंसेवकों की तस्वीर भी है। सिक्के पर आरएसएस का ध्येय वाक्य भी लिखा है- राष्ट्राय स्वाहा, इदं राष्ट्राय इदं न मम।
इस मौके पर सौ रुपये के चांदी के सिक्के के साथ ही आरएसएस के सौ वर्ष के सफर की याद में खास डाक टिकट भी जारी की गई है। टिकट पर साल 1963 में 26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल आरएसएस कार्यकर्ताओं की तस्वीर छापी गई है।
साल 1962 में चीन के साथ भारत की लड़ाई के दौरान आरएसएस ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। सीमावर्ती इलाकों में बचाव और राहत के काम में सेना का हाथ बंटाया था। इससे प्रभावित हो कर तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने आरएसएस को 1963 में 26 जनवरी की परेड का न्योता दिया था।
इस डाक टिकट के जारी होने के बाद अब आरएसएस ने 26 जनवरी की परेड में हिस्सा लिया था या नहीं, इस बात को ले कर विवाद पर विराम लग जाना चाहिए। कांग्रेस नेता आजादी की लड़ाई और उसके बाद देश में शांति का माहौल बनाने में आरएसएस की भूमिका की आलोचना करते हैं। कांग्रेस के साथ ही कई विपक्षी पार्टियों के नेता भी यह कहते सुनाई देते हैं कि आजादी की लड़ाई में आरएसएस शामिल नहीं था। अब परेड में आरएसएस के शामिल होने पर खुद केंद्र सरकार ने मुहर लगा दी है।
जानकारी के लिए महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि जब डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार ने 1925 में नागपुर में आरएसएस की स्थापना की थी, तब वे बाकायदा कांग्रेस में सक्रिय थे। तब के कलकत्ता से डॉक्टरी की पढ़ाई पूरी कर वे 1915 में नागपुर लौटे और कांग्रेस में शामिल हो गए। वे इतने सक्रिय थे कि कुछ अर्से बाद ही उन्हें विदर्भ प्रांतीय कांग्रेस का सचिव भी बना दिया गया।
प्रसंगवश यह भी जान लेते हैं कि साल 1923 में कांग्रेस में सक्रिय डॉ. एन. एस. हार्डीकर ने पार्टी के कहने पर हिंदुस्तानी सेवा मंडल का गठन किया। बाद में इसका नाम बदलकर कांग्रेस सेवा दल कर दिया गया। उन्होंने भी लगभग उन्हीं दिनों में तत्कालीन कलकत्ता से मेडिकल की पढ़ाई की, जब डॉ. हेडगेवार वहां पढ़ रहे थे। सेवा दल का शुरुआती गणवेश खादी की शर्ट, हाफ पेंट और सफद टोपी था।
यानी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना से दो साल पहले कांग्रेस सेवा दल की स्थापना की गई थी, लेकिन आज उसकी स्थिति क्या है? क्या जिस जेन-जी की बात कांग्रेस नेता राहुल गांधी करते हैं, उसे पता है कि सेवा दल नाम का भी कोई संगठन कांग्रेस के अंब्रेला में शामिल था? जबकि दो साल बाद बना आरएसएस आज अपनी सौवां स्थापना दिवस देश-विदेश में धूमधाम से मना रहा है।
ऐसा क्यों हुआ, कांग्रेस नेताओं को इस बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए। बार-बार विभाजन के दौर झेलते हुए भी मूल कांग्रेस का दावा कायम रखने वाली कांग्रेस आई अगर सेवा दल के अनुशासन को अपनाए रहती, तो शायद आज उसकी हालत खराब नहीं होती। चुनावी राजनीति में तुष्टीकरण को जीत का अंतिम मूल मंत्र मान बैठी कांग्रेस को मंथन करना चाहिए।
चलते-चलते, बड़ा सवाल यह है कि भारत माता की जय कहने को गैर-इस्लामिक मानने वाले क्या आरएसएस के सौ साल पर जारी नए सिक्के को स्वीकार नहीं करेंगे। इसका विरोध करेंगे। जो कट्टरपंथी बात-बात पर दलील देते हैं कि भारत तो संविधान से ही चलेगा, क्या वे भारत माता की छवि वाले इस सिक्के को भारत की संवैधानिक करेंसी का दर्जा नहीं देंगे? कितनी विडंबना की बात है कि मादरे वतन की बात करने वाले भारत माता की जय बोलने को गैर-इस्लामी ठहरा देते हैं। जबकि फर्क सिर्फ भाषाओं का है, अर्थ एक ही है।
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