How much more alone do we want to be in this era of disintegration of social values by spreading hatred in the name of love! लव के नाम पर नफरत फैला कर सामाजिक मूल्यों के विखंडन के इस दौर में और कितना अकेला होना चाहते हैं हम!

How much more alone do we want to be in this era of disintegration of social values by spreading hatred in the name of love!
लव के नाम पर नफरत फैला कर सामाजिक मूल्यों के विखंडन के इस दौर में और कितना अकेला होना चाहते हैं हम!
 रवि पाराशर
‘आई लव अखिलेश…’
आई लव मोहम्मद से सिलसिला शुरू होने के बाद अब बात आई लव अखिलेश तक पहुंच गई है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में समाजवादी पार्टी के दफ्तर के बाहर लगे इस पोस्टर पर आई लव शिक्षा, विकास, रोजगार भी लिखा हुआ है। जाहिर है कि समाजवादी पार्टी के जिन नेता जी ने यह पोस्टर लगवाया है, उनका नाम भी पोस्टर के साथ-साथ टीवी न्यूज चैनलों के दर्शकों तक पहुंचने में देर नहीं लगी। प्रचार का हींग लगे न फिटकरी वाला यह तरीका रंग चोखा ही लाता है।

‘आई लव योगी…’
इससे पहले लखनऊ में ही बीजेपी युवा मोर्चा के एक नेता की ओर से आई लव योगी आदित्यनाथ का पोस्टर लगाया गया था। फिर ऐसे ही पोस्टर कई जगहों पर दिखाई देने लगे और मीडिया में छा गए। लेकिन पहले पोस्टर पर नेता जी का नाम पोस्टर के साथ-साथ अच्छा-खासा प्रचार पा गया। राजनैतिक अवसरवादिता का इससे बेहतर उदाहरण नहीं मिलेगा।

आई लव… पर क्रिया-प्रतिक्रिया
कुल मिला कर, उत्तर प्रदेश के कानपुर में आई लव मोहम्मद का बैनर लगने के बाद पैदा हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोशल मीडिया के दौर में इस तरह के मामले पलक झपकते ही तूल पकड़ लेते हैं। -आई लव मोहम्मद- के संदेश पर वैसे तो किसी को ऐतराज नहीं होना चाहिए था, लेकिन जैसे-जैसे इसका इस्तेमाल मुस्लिम समुदाय को उकसाने के लिए किया गया, वैसे-वैसे हिंदुओं में भी प्रतिक्रिया होने लगी। विश्व हिंदू परिषद ने भी आई लव इंडिया अभियान चलाया।

बरेली में राजनीति गर्माने की कोशिश
आई लव मोहम्मद के जवाब में आई लव महाकाल, आई लव महादेव और दूसरे देवी-देवताओं के इस तरह के ही पोस्टर, बैनर, प्लेकार्ड जगह-जगह दिखाई देने लगे। ये सब कुछ खेमेबाजी के जरये शक्ति प्रदर्शन के तौर पर ही हो रहा था, लेकिन बरेली में गैर-जिम्मेदाराना तरीके से इस पर राजनीति गर्माने की कोशिश भी की गई।

अब मांग रहे हैं माफी
वक्त-वक्त पर बात-बात पर ऊटपटांग बयान देने वाले विवादास्पद रहने के शौकीन तौकीर रजा ने भीड़ जुटा कर मसला सुलगाने की कोशिश की। बिना पुलिस-प्रशासन की अनुमति के जुट रही भीड़ जब उग्र होने लगी, तो यूपी पुलिस ने ताबड़तोड़ कार्रवाई की। तौकीर को जेल की हवा खिला दी गई। पुलिस पर पथराव और माहौल खराब करने वालों की अब गिरफ्तारियां हो रही हैं, तो वे हाथ जोड़ कर माफी मांग रहे हैं।

लव के नाम पर बंद हो नफरत!
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बलवाइयों और सामाजिक वातावरण खराब करने वालों पर कड़ी कार्रवाई करने का बयान दिया, तो पुलिस ने उस पर अमल करने में देर नहीं लगाई। अब जब -आई लव- विवाद नए-नए आयाम ले रहा है, तब यह उम्मीद की जानी चाहिए कि लव यानी प्रेम जताने की बात करते हुए नफरत फैलाने की कोशिशें बंद होनी चाहिए। लव के नाम पर नफरत परोसने का कुत्सित खेल बंद होना चाहिए।

आई… आई का शोर शोर बंद कर, कहिए वी
वैसे एक बात और है। कोई भी धार्मिक विश्वास यानी आस्था सामूहिक ही होती है। आई लव… मुहिम ने आस्था की सामूहिकता को तार-तार कर दिया है। सामाजिक आस्था का वैयक्तिक स्वरूप हो ही नहीं सकता। इस नजर से देखें, तो आई लव… मुहिम सिर्फ जुबानी जंग भर है, इसका कोई दूरगामी प्रभाव भारतीय लोकतांत्रिक विचार पर पड़ने वाला है नहीं। एक साथ खड़े हो कर आई… आई…. चिल्लाते रहने से समाज में विघटन का ही भाव प्रबल हो सकता है। सामाजिक मूल्यों के विखंडन के इस दौर में और कितना अकेला होना चाहते हैं हम! हमारे संविधान की प्रस्तावना भी ‘वी द पीपुल ऑफ इंडिया…’ से ही शुरू हुई है। संविधान का सम्मान कीजिए।
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