Gen-Z in India is more positive, but it leads the world in wasteful spending भारत में जेन-जी ज्यादा सकारात्मक है, लेकिन फिजूलखर्ची में है दुनिया में सबसे आगे
Gen-Z in India is more positive, but it leads the world in wasteful spending
भारत में जेन-जी ज्यादा सकारात्मक है, लेकिन फिजूलखर्ची में है दुनिया में सबसे आगे

रवि पाराशर
इन दिनों जेन-जी यानी आज की पीढ़ी की दुनिया भर में काफी चर्चा में है। साथ ही जेन-जी के बारे में यह धारणा बनाने की कोशिश भी की जा रही है कि वह परिवर्तनकारी है, नकारात्मक है, आक्रोश में ही रहती है, कुंठित है, व्यवस्था से गुस्सा ही रहती है। बांग्लादेश में जेन-जी सड़कों पर उतरी और शेख हसीना सरकार को पटरी से उतार दिया। नेपाल में भी जेन-जी सड़कों पर उतरी, लेकिन वहां उसने सत्ता पक्ष और विपक्ष में भेदभाव नहीं किया। पावर वालों को जम कर बुझाया और विपक्ष वालों को भी जम कर जलाया।
भारत में भी जेन-जी चर्चा में है। एक तो इस वजह से कि भारत के कई पड़ोसी देशों में जेन-जी ने व्यवस्था विरोधी सामूहिक आंदोलन चलाए, तो हमारे यहां भी जेन-जी की ऊर्जा की चर्चा होने लगी। हालांकि चर्चाओं का प्रमुख नतीजा यही निकला कि कोई भी टूल किट कितनी भी कोशिश कर ले, भारत में ऐसा नहीं हो सकता, जो बांग्लादेश या नेपाल में हुआ है। पिछले दिनों हमने अपने पड़ोस श्रीलंका में भी इस तरह की ही तस्वीरें देखी थीं। वैसे जेन-जी के आक्रोश की तस्वीरें दुनिया भर से आती रहती हैं।
तर्क यह है कि भारतीय जेन-जी का बहुमत संस्कारवान है, राष्ट्र प्रेमी है। लेकिन लेह में हुई हिंसा और देश के कई प्रांतों में आई लव… मुहिम के दौरान जेन-जी की नकारात्मकता की तस्वीरें जरूर दिखाई दी हैं। लेकिन अच्छी बात यह है कि ये तस्वीरें भारतीय जेन-जी की सामूहिक सामाजिक अभिव्यक्ति नहीं कही जा सकतीं। कह सकते हैं कि भारत में नकारात्मकता के अब तक के प्रयोग नाकाम ही साबित हुए हैं। लेकिन प्रयास तो हो रहे हैं, इसलिए हमें ज्यादा चौकन्ना, सतर्क रहना चाहिए।
वैसे भारतीय जेन-जी दूसरी पीढ़ियों के मुकाबले ज्यादा फिजूलखर्ची करती है। पीढ़ी उधार लेकर खरीदारी करने में भी आगे रहती है। अमेरिकी कंसल्टिंग कंपनी मैकिन्से की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय युवा पैसे नहीं होने पर ‘बाय नाउ, पे लेटर’ सर्विस का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं। दूसरी पीढ़ियों के मुकाबले जेन-जी की उधार पर खरीदारी 13 फीसदी ज्यादा है।
रिपोर्ट के मुताबिक इस पीढ़ी के 34 फीसदी लोगों ने कपड़ों और कॉस्मेटिक पर 29 प्रतिशत खर्च किया है। ये कंज्यूमर ई-कॉमर्स से शॉपिंग करना पसंद कर रहे हैं। भारत में 40 फीसदी लोग महंगाई को लेकर परेशान हैं। लेकिन 31 प्रतिशत लोग फिजूलखर्ची के लिए भी तैयार रहते हैं। सिर्फ नौ प्रतिशत लोग ही फिजूलखर्ची से बचने की कोशिश करते हैं।
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