Ghazal by Ravi Parashar पहले अपने भीतर देख
Ghazal by Ravi Parashar पहले अपने भीतर देख

पहले अपने भीतर देख,
फिर तू घर के बाहर देख।
ख़ुद के गले लिपट कर देख,
ख़ुद से ख़ुद ही खुल कर देख।
जिनको तूने फूल दिए,
उन हाथों में ख़ंज़र देख।
अपने क़द को छोड़ ज़रा,
पहले अपनी चादर देख।
नंगे ने भी मना किया,
मैली कितनी खद्दर, देख।
हंस लेता है खुल कर वो,
उसका यार मुक़द्दर देख।