भारत को लेकर नर्मी-गर्मी की दोहरी कूटनीति पर उतर आया है अमेरिका America has started a dual diplomacy of soft-hot with respect to India

भारत को लेकर नर्मी-गर्मी की दोहरी कूटनीति पर उतर आया है अमेरिका
America has started a dual diplomacy of soft-hot with respect to India


 रवि पाराशर

रविवार के अखबारों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक-दूसरे के लिए दिए गए सकारात्मक बयान सुर्खियों में हैं। राष्ट्रपति ट्रंप की तरफ से तारीफ किए जाने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार को कहा कि उन की भावनाओं और हमारे संबंधों के सकारात्मक मूल्यांकन की हम तहे दिल से तारीफ करते हैं और उनका पूर्ण समर्थन करते हैं। भारत और अमेरिका के बीच अत्यंत सकारात्मक और दूरदर्शी व्यापक और वैश्विक रणनैतिक साझेदारी है।

इससे पहले शनिवार को ही ट्रंप ने भारत-अमेरिकी संबंधों के बारे में कहा था कि वे हमेशा मोदी के मित्र रहेंगे। वे महान प्रधानमंत्री हैं। भारत और अमेरिका के बीच खास रिश्ता है और इसके बारे में चिंता की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि हम दोनों साथ हैं। ट्रंप ने सुरों में नरमी लाते हुए कहा, “जैसा कि आप जानते हैं, मेरी (भारतीय प्रधानमंत्री) मोदी के साथ बहुत अच्छी बनती है, वे कुछ महीने पहले यहां आए थे, हम रोज गार्डन गए थे।”

यह बात अलग है कि उपरोक्त बयान के एक दिन पहले शुक्रवार को ही ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पीएम मोदी, चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति पुतिन की तस्वीर साझा करते हुए लिखा था कि भारत और रूस शायद चीन के साथ चले गए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि हमने भारत और रूस को चीन के हाथों खो दिया है।

साफ है कि अमेरिकी प्रशासन बाकायदा रणनीति के तहत सुरों में नर्मी और गर्मी का दोहरी कूटनीति पर उतर आया है। राष्ट्रपति ट्रंप भारत को ले कर नर्मी दिखा रहे हैं, लेकिन पीटर नवारो समेत व्हाइट हाउस के कई अधिकारी खरी-खोटी सुनाने में जुटे हैं। ट्रंप के बयान के साथ ही नवारो ने फिर आरोप लगाया है कि भारत की ऊंची टैरिफ नीतियों की वजह से अमेरिकी नौकरियां जा रही हैं। ऐसे में अब यह देखना होगा कि ट्रंप अपने नर्म रुख पर कब तक कायम रह सकते हैं।

इस बीच, राष्ट्रपति बनने के करीब आठ महीने बाद ट्रंप ने मान लिया है कि जिसको बहुत आसान समझा था, वह सबसे मुश्किल निकला। रूस के राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन के लिए उन्होंने यह बात कही। चुनाव प्रचार के दौरान ट्रंप ने कई बार कहा था कि अगर जो बाइडेन की जगह वे राष्ट्रपति होते, तो रूस और यूक्रेन के बीच जंग छिड़ती ही नहीं और अगर वे प्रेसीडेंट बने, तो ये जंग वे 24 घंटे में बंद करा देंगे। लेकिन ऐसा अभी तक तो हो नहीं पाया है।

वहीं, ब्लूमबर्ग को दिए इंटरव्यू में अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक ने कह दिया है कि भारत से बातचीत के लिए अमेरिका हमेशा तैयार है, लेकिन उसे कुछ शर्तें माननी होंगी। भारत को अपना बाजार खोलना होगा, रूसी तेल खरीदना बंद करना होगा और ब्रिक्स समूह से दूरी बनानी होगी। उन्होंने भारत से माफी मांगने की बात भी कही है। लेकिन भारत के अभी तक के रुख को देखते हुए ऐसा लगता नहीं है कि हम एक शर्त भी मानने को तैयार होंगे। जो भी हो, यह तो तय है कि बातचीत की मेज पर ही मामला कुछ सुलझ सकता है।
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