Peace is expected to return to Gaza with Hamas ready to lay down its arms! Why has Pakistan’s behavior changed? गाजा में शांति बहाल होने के आसार, हमास हथियार डालने को तैयार! पाकिस्तान का क्यों बदल गया व्यवहार!!
Peace is expected to return to Gaza with Hamas ready to lay down its arms! Why has Pakistan’s behavior changed?
गाजा में शांति बहाल होने के आसार, हमास हथियार डालने को तैयार! पाकिस्तान का क्यों बदल गया व्यवहार!!

रवि पाराशर
करीब-करीब दो साल पूरे होते-होते गाजा में शांति की संभावनाएं साफ नजर आने लगी हैं। साल 2023 में सात अक्टूबर को हमास ने इजराइल पर बड़ा हमला बोला था। जवाब में इजराइल ने भी हमास को नेस्तनाबूद करने की ठान ली। लेकिन अब रविवार शाम छह बजे तक यानी पांच अक्टूबर, 2025 की शाम छहे बजे तक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रस्ताव पर अमल को तैयार फिलिस्तीनी आतंकी संगठन हमास ने फिलहाल मजबूरन ही सही, शांति बहाली का संदेश दे दिया है।
फिलहाल इसलिए कि ट्रंप के इस शांति बहाली प्रस्ताव में हमास के वजूद को ले कर कोई खिड़की खुली नहीं रखी गई है। शांति प्रस्ताव के तहत गाजा पट्टी पर ट्रंप की अध्यक्षता में जो बोर्ड शासन करने वाला है, उसमें हमास की कोई भूमिका नहीं रहने वाली है। ऐसे में कथित तौर पर हथियार डाल चुका हमास कितने दिनों तक अपनी छटपटाहट और कुलबुलाहट रोके रह सकता है, यह देखने वाली बात होगी।
शांति प्रस्ताव की डेडलाइन रविवार शाम छह बजे की है। यानी इजराइल के समय के हिसाब से देखें, तो भारत में उस वक्त रात के साढ़े आठ बज रहे होंगे और अमेरिकी समय के हिसाब से देखें, तो भारत में रविवार का दिन बीतने के बाद रात के साढ़े तीन बज रहे होंगे। हमास पर न सिर्फ अमेरिका का दबाव है, बल्कि कुछ मुस्लिम देशों ने भी उसे हथियार डालने के लिए मजबूर किया है।
अब हमास के शांति के लिए सहमत हो जाने के बाद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी खुशी जताई है। सोशल मीडिया पर उन्होंने लिखा कि गाजा में शांति की कोशिशों में निर्णायक प्रगति के बीच हम राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व का स्वागत करते हैं। बंधकों की रिहाई के संकेत महत्वपूर्ण कदम है। भारत स्थाई और न्यायसंगत शांति की दिशा में सभी कोशिशों का मजबूती से समर्थन करता रहेगा।
इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान की हालत अजीब-ओ-गरीब हो गई है। व्हाइट हाउस में जिस दिन राष्ट्रपति ट्रंप और इजराइल के प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू ने 20 सूत्री शांति प्रस्ताव सार्वजनिक किया, उस दिन पाकिस्तान समेत आठ मुस्लिम देशों ने इसका पूरा समर्थन किया था। तब ट्रंप ने पाकिस्तान की बहुत तारीफ की थी। लेकिन पाकिस्तान के लोगों को अपनी सरकार का यह रुख बिल्कुल भी पसंद नहीं आया।
पाकिस्तान के लोग गाजा में फिलिस्तीन के शासन की बजाए ट्रंप की अध्यक्षता वाले बोर्ड के शासन की बात से खासे नाराज नजर आए। लोगों का मानना है कि फिलिस्तीन को राजनयिक मान्यता दे चुके पाकिस्तान ने अमेरिकी शांति प्रस्ताव को मान कर एक तरह से उसकी अनदेखी की है।
इसे देखते हुए शुक्रवार को पाकिस्तान के विदेश मंत्री ईशाक डार ने संसद में अपने पहले के फैसले से पीछे हटते हुए कहा कि शांति प्रस्ताव का मसौदा वह नहीं है, जिस पर वे और कुछ मुस्लिम देश सहमत हुए थे। उन्होंने कहा कि मसौदे में बदलाव किए गए हैं। उन्होंने कहा, “मैं कहता हूं कि हमारे पास जो मसौदा था, उसमें कुछ बदलाव किए गए हैं।”
विदेश मंत्री ईशाक डार का संसद में यह बयान तब आया था, जब हमास की ओर से शांति प्रस्ताव पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। लेकिन ट्रंप ने रविवार शाम छह बजे की डेडलाइन घोषित करते हुए आंखें तरेरीं कि कहना नहीं माना, तो हमास का अस्तित्व मिटा दिया जाएगा। बुरी तरह मार पड़ने के अंदेशे से दहशत में आए आतंकी संगठन हमास की ओर से सुलह का बयान आते देर नहीं लगी।
अब जब हमास सभी इजराइली बंधकों की रिहाई को तैयार हो गया है, तब पाकिस्तान बुरी तरह फंस गया है। अमेरिका उसके बदले हुए रुख पर गुस्से में है। बहरहाल, रविवार शाम छह बजे के बाद तस्वीर क्या करवट लेगी, अब यह देखने वाली बात होगी। युद्ध विराम होता है, तो दुनिया के लिए यह राहत वाली बात होगी, क्योंकि लड़ाई कहीं भी हो, पूरी दुनिया पर उसका बुरा असर ही पड़ता है।
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