क्या सोच कर कांग्रेस ने प्रियंका को भेजा है बिहार? क्या करेंगी बेड़ा पार या दोहराएंगी यूपी की हार!
क्या सोच कर कांग्रेस ने प्रियंका को भेजा है बिहार? क्या करेंगी बेड़ा पार या दोहराएंगी यूपी की हार!

रवि पाराशर
बिहार की राजनीति में कांग्रेस ने एक और नया अध्याय जोड़ दिया है, लेकिन यह देखना होगा कि यह नई पहल पार्टी के लिए फायदेमंद साबित होगी या फिर वही ढाक के तीन पात। गत 17 अगस्त से शुरू हुई वोटर अधिकार यात्रा में मंगलवार को कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी भी भाई राहुल गांधी के साथ कंधे से कंधा मिला कर शामिल हो गई हैं। बिहार में प्रियंका गांधी वाड्रा का यह पहला चुनावी कार्यक्रम है। राहुल, तेजस्वी और प्रियंका ने मंगलवार को सुपौल और मधुबनी में वोटर अधिकार यात्रा की, जबकि बुधवार को ये त्रयी दरभंगा और मुजफ्फरपुर में चहल कदमी करेगी। समझने वाली बात यह है कि कांग्रेस और आरजेडी ने प्रियंका को जिन क्षेत्रों में घुमाया है, वे एनडीए के गढ़ माने जाते हैं।
तो क्या यह समझा जाना चाहिए कि क्या प्रियंका गांधी वाड्रा के सहारे कांग्रेस (और जाहिर है कि आरजेडी) एनडीए के गढ़ में गहरी सेंध लगाने का भरोसा रखती है? क्या महागठबंधन को लगता है कि प्रियंका सुशासन बाबू नीतीश कुमार की ज्यादा सगी महिला वोटरों पर असर डालने का माद्दा रखती हैं? बिहार में पुरुष वोटरों की संख्या महिला वोटरों के मुकाबले कुछ ही ज्यादा है। तथ्य यह भी है कि 2010 के चुनाव और उसके बाद के चुनावों में महिलाओं ने पुरुषों के मुकाबले ज्यादा संख्या में वोट डाले हैं और जाहिर है कि एनडीए का पलड़ा ही भारी किया है। कहने वाले कह रहे हैं कि बिहार में प्रियंका का पदार्पण महिलाओं को रिझाने का ही दांव है। यही वजह है कि वे बिहार में उस दिन आई हैं, जब चौरचन और हरितालिका तीज का त्यौहार है। इस दिन महिलाएं उपवास रखती हैं और पतियों की लंबी उम्र की दुआ करती हैं। लेकिन क्या प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी मंगलवार को व्रत रखा है या नहीं, इसकी कोई जानकारी अभी तक तो नहीं मिली है। हां, जानकी मंदिर में उनका जाने का कार्यक्रम जरूर रखा गया। लेकिन क्या इतने भर से वे बिहार की महिला वोटरों का दिल जीत पाएंगी?
अब जरा प्रियंका गांधी वाड्रा के करियर में अब तक के राजनैतिक श्रम के नफे-नुकसान पर सरसरी नजर डाल लेते हैं। कोविड19 के साये में उत्तर प्रदेश में साल 2022 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने प्रियंका के बाकायदा नेतृत्व में ही ताल ठोकी थी। वे लड़की हूं, लड़ सकती हूं के नारे के साथ चुनाव मैदान में उतरीं। राजनीति की समझ रखने वाले कई बुद्धिजीवियों ने इसे जीत का मंत्र तक करार दे दिया था। प्रियंका के प्रभाव में ही कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में महिलाओं के कल्याण के लिए कई लोक-लुभावन वादे भी किए थे। प्रियंका वर्चुअल रैलियों की मदद से राज्य में 340 विधानसभा क्षेत्रों तक पहुंचीं। बाद में रैलियों की इजाजत मिलने पर उन्होंने 42 रोड शो किए। उन्होंने 167 रैलियां कर यूपी का दिल जीतने के लिए बहुत मेहनत की। हर दिन वे मीडिया में छाई रहीं। इतना ही नहीं, उत्तर प्रदेश के कार्यक्रमों में से समय निकाल कर 2022 में ही हुए उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर के विधानसभा चुनावों में भी प्रियंका ने कांग्रेस के लिए प्रचार किया।
लेकिन हकीकत यह है कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस केवल दो सीटें ही जीत पाई। ये थीं प्रतापगढ़ की रामपुर खास और महाराजगंज की फरेंदा सीट। फरेंदा विधानसभा सीट पर कांग्रेस सिर्फ 1246 वोटों से जीत पाई। यूपी में कांग्रेस को सिर्फ 2.33 प्रतिशत वोट ही मिले। गौर करने वाली बात यह रही कि 10 सीटों पर कांग्रेस को नोटा से भी कम वोट मिले। साल 2012 के चुनाव में कांग्रेस को 22 सीटें मिली थीं। अगले चुनाव यानी 2017 के चुनाव में पार्टी सिर्फ सात सीटों पर ही जीत सकी थी। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या बिहार में प्रियंका कुछ करिश्मा कर सकती हैं?