Why is the Congress party avoiding the question of Tejashwi Yadav’s claim to the Chief Ministership of Bihar? Why is the CWC meeting held in Patna? बिहार में सीएम पद पर तेजस्वी यादव की दावेदारी के सवाल पर कन्नी क्यों काट रही है कांग्रेस? सीडब्ल्यूसी की बैठक पटना में ही क्यों?


Tejashwi Yadav’s claim to the Chief Ministership of Bihar? Why is the CWC meeting held in Patna? बिहार में सीएम पद पर तेजस्वी यादव की दावेदारी के सवाल पर कन्नी क्यों काट रही है कांग्रेस? सीडब्ल्यूसी की बैठक पटना में ही क्यों?

 रवि पाराशर
अगले हफ्ते मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का बिहार दौरा होना है। इसके बाद राज्य में विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान जल्द ही हो जाएगा। ऐसे में पटना में आजादी के बाद पहली बार कांग्रेस कार्य समिति यानी सीडब्ल्यूसी की बैठक माइने रखती है। बैठक से पहले ही महागठबंधन के कुछ नेताओं के बयान संकेत दे रहे हैं कि सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है।

राहुल के बाद अब शिवकुमार का चौका!
कर्नाटक के उप-मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने पटना पहुंचने पर सवाल के जवाब में कहा कि महागठबंधन के बिहार के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार का नाम कांग्रेस अध्यक्ष ही तय करेंगे। इससे पहले राहुल गांधी भी मुख्यमंत्री पद पर तेजस्वी यादव की दावेदारी के सीधे सवाल को स्क्वैयर कट लगा कर बाउंड्री के पार पहुंचा चुके हैं।

हम जानते हैं कि आरजेडी का पूरा कुनबा और खुद तेजस्वी यादव यह मान कर चल रहे हैं कि अगर इंडिया ब्लॉक विधानसभा चुनाव में बाजी मारता है, तो वे ही सीएम की कुर्सी पर बैठेंगे। पार्टी अध्यक्ष लालू यादव साफ-साफ कह चुके हैं कि महागठबंधन के जीतने पर तेजस्वी ही मुख्यमंत्री बनेंगे। उप-मुख्यमंत्री के तौर उनका अनुभव भी इस दावेदारी की बड़ी वजह है।

क्या कांग्रेस भी है सीएम पद की दौड़ में?
बिहार में इंडिया ब्लॉक की राजनीति में आज की जमीनी हकीकत भी यही दिखाई देती है कि आरजेडी ही महागठबंधन की नाव पार लगा सकता है। लेकिन शायद कांग्रेस यह सोच कर चल रही है कि वह आरजेडी से ज्यादा या कम से कम उसके आसपास सीटें जीतने का करिश्मा कर सकती है। ऐसे में चुनाव नतीजे आने के बाद कांग्रेस भी मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल हो सकती है। सवाल यह है कि क्या सचमुच ऐसा हो सकता है या फिर कांग्रेस के तमाम नेता मुंगेरी लाल का हसीन सपना ही देख रहे हैं?

सीडब्ल्यूसी बैठक पटना में ही क्यों?
बहरहाल, भारतीय राजनीति में कथनी और करनी में बहुत अंतर होता है, यह बात भी कांग्रेस ने फिर से साबित की है। कांग्रेस का कहना है कि पटना बैठक का आगामी विधानसभा चुनावों से कोई लेना-देना नहीं है। यह पार्टी का सामान्य फैसला है। लेकिन यह बात गले से नहीं उतरती। पटना में बैठक कर चुनाव से ऐन पहले कांग्रेस गहमा-गहमी बढ़ा कर इंडिया ब्लॉक के अंदर शक्ति प्रदर्शन ही कर रही है, यह बात सहज ही में समझ आ जाती है। इस बीच, बक्सर से आरजेडी के लोकसभा सदस्य सुधाकर सिंह ने कहा है कि पटना में कांग्रेस की इस बैठक से सिर्फ उसे ही फायदा नहीं होगा, बल्कि महागठबंधन की दूसरी पार्टियों की स्थिति भी मजबूत होगी।

कांग्रेस का सीएम कौन हो सकता है?
महागठबंधन की पार्टियों की हैसियत पर सीडब्ल्यूसी की बैठक से कोई फर्क पड़े या नहीं पड़े, इतना जरूर तय है कि आरजेडी के निजी कुटुंब को कांग्रेस का यह जमावड़ा फूटी आंखों नहीं सुहा रहा होगा। लेकिन बड़ा सवाल यह भी है कि अगर कांग्रेस के मन में संभावना का कोई अंकुर फूटा है और उसकी सोच के मुताबिक अगर नतीजे आ गए, तो उसका मुख्यमंत्री कौन होगा, इस पर भी मंथन शुरू हो गया होगा।

क्या टूट सकता है कांग्रेस का ख्वाब?
वैसे ऐसी सूरत में अगर नंबर गेम में कांग्रेस आरजेडी के आसपास पहुंची, तो सीएम की कुर्सी के ख्वाब कांग्रेस में बड़ी दरारें भी डाल सकते हैं। मार्के की बात यह भी है कि ऐसी दरारों को चटका कर टुकड़े-टुकड़े करने का हुनर एनडीए कई राज्यों में दिखा चुका है।

क्या कर रहे हैं नीतीश कुमार?
वैसे यह जानना भी दिलचस्प होगा कि पटना में जिस वक्त कांग्रेस तमाम सवालों पर मंथन कर रही है, तब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य के कैमूर जिले में 980 करोड़ रुपये की 178 योजनाओं का उद्घाटन कर दिया है। हम यह तो पहले से ही जानते हैं कि नीतीश सरकार ने महिलाओं और वंचित वर्गों के कल्याण की कई योजनाओं पर मुहर लगा कर बिहार के खजाने के दरवाजे उनके लिए पूरी दरियादिली से खोल दिए हैं।
………………..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *