भारत के साथ ही जापान, रूस और चीन भी ट्रंप के टैरिफ की हवा निकालने में जुटे Along with India, Japan, Russia and China are also trying to counter Trump’s tariffs

भारत के साथ ही जापान, रूस और चीन भी ट्रंप के टैरिफ की हवा निकालने में जुटे
Along with India, Japan, Russia and China are also trying to counter Trump’s tariffs

रवि पाराशर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जापान दौरे पर दोनों दोनों देशों के संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में जुटे हैं और 31 अक्टूबर को शंघाई सहयोग संगठन यानी एससीओ की बैठक में शामिल होने के लिए चीन के दो दिन के दौरे पर जा रहे हैं। वहां भी वे भारत के हित और ज्यादा साधने का प्रयास करेंगे। ऐसे में यह खबर भी ध्यान खींच रही है कि अमेरिका के टैरिफ अड़ंगे के खिलाफ रूस और चीन ने नया मोर्चा खोल दिया है।

बड़ी खबर यह भी है कि भारत और जापान सहयोग की पींगें बढ़ाने में लगे हैं, तो अमेरिका और जापान के बीच व्यापार वार्ता फिर अटक गई है। जापान के टॉप ट्रेड मध्यस्थ अकाजावा ने अपना अमेरिकी दौरा अचानक ही रद्द कर दिया है। इस बीच भारत पर भारी टैरिफ थोपने के राष्ट्रपति ट्रंप के फैसले का विरोध अमेरिका में भी तेज हो गया है।

अमेरिकी सांसदों, राजनयिक रह चुके बुद्धिजीवियों और विशेषज्ञों ने चेताया है कि राष्ट्रपति ट्रंप का फैसला भारत-अमेरिका के संबंधों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। इन लोगों ने ट्रंप के फैसले को ‘रणनैतिक आपदा’ करार दिया है। इस बीच अमेरिकी अर्थशास्त्री रिचर्ड वोल्फ ने कहा कि है ट्रंप ने अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मारने का काम किया है। उनका मानना है कि ब्रिक्स देश अब वैश्विक अर्थव्यवस्था के केंद्र बन गए हैं।

पक्की खबर है कि रूस के आर्कटिक एलएनजी- टू प्लांट से लिक्वीफाइड नेचुरल गैस यानी एलएनजी चीन के बेहाई एलएनजी टर्मिनल तक पहुंच गई है। अमेरिका की तरफ से लगाए गए प्रतिबंध को धता बताते हुए गत 28 अगस्त को दोनों महा देशों के बीच ऐसा पहली बार हुआ और अगर पहली बार ऐसा हुआ है, तो अब आगे ऐसा होता ही रहेगा, यह भी तय है। आर्कटिक एलएनजी-टू प्लांट पर राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल में प्रतिबंध लगाया गया था। लेकिन अब रूस इस प्लांट से एनएलजी निर्यात क्षमता को तीन गुना करना चाहता है।

यह भी जान लेते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ-साथ राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन भी एससीओ की बैठक में शामिल होने चीन पहुंच रहे हैं। तो यह हुआ कि जापान में क्वाड की रणनीति पर विचार-विमर्श के तुरंत बाद चीन में शी जिनपिंग, व्लादीमीर पुतिन और नरेंद्र मोदी की तिकड़ी भी अमेरिकी टैरिफ अड़ंगों का तोड़ निकालने के लिए महा-मंथन कर सकती है। ऐसे में अमेरिका का अलग-थलग पड़ना तय नजर आ रहा है।
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