Ghazal by Dr. Surendra Singhal कहीं कुछ तो बदलना चाहिए अब

Ghazal by Dr. Surendra Singhal कहीं कुछ तो बदलना चाहिए अब

डॉ. सुरेंद्र सिंघल
………………………..
कहीं कुछ तो बदलना चाहिए अब,
कि जैसी है न दुनिया चाहिए अब।

मैं कब तक बैठ पाऊंगा लिहाजन,
मुझे महफ़िल से उठना चाहिए अब।

ये बदबू मारते तालाब ठहरे,
मुझे दरिया में बहना चाहिए अब।

फिर उसके बाद हंगामा तो होगा,
पर अपनी बात कहना चाहिए अब।

लकीरें हाथ की कब तक कहेंगी,
मेरे हाथों को कहना चाहिए अब।

ख़ुदा को रख लिया ज़िंदा बहुत दिन,
उसे हर हाल मरना चाहिए अब।

मैं अपने आप से भागा फिरू हूं,
मुझे ख़ुद से भी लड़ना चाहिए अब।
………………………….

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *