UP Infrastructure Projects 2022 Yotta Data Center Greater Noida PM Gati Shakti Yamuna Authority

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यूपी इन्फ्रास्ट्रक्चर अपडेट

यूपी में रखा जाएगा फेसबुक, ट्विटर,
इंस्टाग्राम, और यू-ट्यूब का डाटा

देश के 60% लोगों का डाटा ग्रेटर नोएडा में रहेगा
देश का सबसे बड़ा डाटा सेंटर पार्क

यमुना ऑथॉरिटी के 4 प्रोजेक्ट्स के लिए
केंद्र सरकार देगी 276 करोड़ रुपये

नोएडा के 4 प्रोजेक्ट्स के लिए
केंद्र सरकार देगी 230 करोड़ रुपये

यमुना ऑथॉरिटी की नकली वेबसाइट से सावधान
नकली वेबसाइट के ज़रिए 50 लोगों से ठगी

उत्तर प्रदेश के पहले और देश के सबसे बड़े डेटा सेंटर पार्क का पहला फेज़ पूरा हो चुका है. अत्याधुनिक तकनीक से युक्त इस डेटा सेंटर में लोगों के सोशल मीडिया का डेटा सुरक्षित रखा जाएगा.

ग्रेटर नोएडा में बने इस डेटा सेंटर में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, और यू-ट्यूब के करोड़ों यूज़र्स का डेटा सुरक्षित स्टोर किया जाएगा. इसके अलावा बैंकिंग, व्यापार, हेल्थ सेक्टर, ट्रैवल, टूरिज़्म और आधार का डेटा भी इस सेंटर में सुरक्षित रहेगा.

इनवेस्ट यूपी कैम्पेन के तहत हीरानंदानी ग्रुप ने उत्तर प्रदेश में डाटा सेंटर बनाने के लिए ग्रेटर नोएडा को चुना था. ग्रेटर नोएडा ऑथॉरिटी ने डेटा सेंटर बनाने के लिए हीरानंदानी ग्रुप को नॉलेज पार्क-5 में 15 अक्तूबर 2020 को करीब 116 करोड़ रुपये में 81 हजार स्क्वायर मीटर जमीन अलॉट की थी. इस प्रोजेक्ट का पहला चरण दो साल में पूरा हुआ है.

यूपी के इस पहले डेटा सेंटर पार्क में कंप्यूटर सर्वर का डेटा स्टोर करने और प्रोसेसिंग करने में आसानी होगी. देश के करीब 60 फीसदी लोगों का डाटा ग्रेटर नोएडा के योट्टा डेटा सेंटर में सुरक्षित रखा जाएगा.

वैसे तो इस डेटा सेंटर का पहला टॉवर जुलाई 2022 में शुरू करने का लक्ष्य था लेकिन कोविड-19 के कारण इसमें देरी हो गई. हालांकि अब सेंटर का पहला टॉवर तैयार हो गया है. इसकी कैपैसिटी 30 मेगावाट डेटा स्टोर करने की होगी। डेटा सेंटर में लगभग सात हजार करोड़ के निवेश का अनुमान है. इससे प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से 1500 लोगों को रोजगार मिलेगा.

इसके अलावा दो और टॉवर्स का निर्माण जनवरी 2022 में शुरू किया जा चुका है. इन दोनों टॉवर्स की क्षमता 30-30 मेगावाट डेटा स्टोर करने की होगी। दोनों टॉवर जुलाई 2024 तक तैयार हो जाएंगे. योट्टा के इस पार्क में इस तरह के कुल छह टावर बनाए जाएंगे.

इस डेटा सेंटर की उद्घाटन तारीख है 31 अक्टूबर 2022. उद्घाटन यूपी के चीफ मिनिस्टर योगी आदित्यनाथ करेंगे.

देश में डेटा सेंटर्स की वर्तमान कुल क्षमता 400 मेगावाट है. इसमें से 180 मेगावाट की जरूरत इसी योट्टा डाटा सेंटर पार्क से पूरी हो सकेगी.

यूपी के इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी दूसरी बड़ी खबर है यमुना ऑथॉरिटी के बारे में.
यमुना ऑथॉरिटी की चार परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार ने ‘प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना’ के तहत 276 करोड़ रुपये का फंड मंज़ूर किया है.

यमुना ऑथॉरिटी के चार प्रोजेक्ट्स को ‘प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना’ से और रफ्तार मिलेगी। जिन परियोजनाओं के लिए पैसा मिला है, उसमें प्लास्टिक प्रोसेसिंग पार्क,
टॉय पार्क,
अपैरल पार्क
और
मेडिकल डिवाइस पार्क शामिल हैं।
इनमें से तीन परियोजनाओं पर पहले से काम चल रहा है।

‘प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना’ के तहत बड़ी परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार फंड जारी करती है. अधिकारियों का कहना है कि केंद्र की फंडिंग से इन चारों विकास योजनाओं को और रफ्तार मिलेगी। इससे जेवर एयरपोर्ट के चारों ओर इंडस्ट्रियल डेवेलपमेंट तेज होगा और युवाओं को रोजगार मिलेगा। 

यमुना ऑथॉरिटी के सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह ने मीडिया को बताया कि ‘प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना’ से फंडिंग मिलने से विकास कार्य और तेज होंगे। अब ये सारी परियोजनाएं समय पर और सुगमता से पूरी हो सकेंगी।

इन चार प्रोजेक्ट्स में पहला है

1. मेडिकल डिवाइस पार्क

प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना’ में मेडिकल डिवाइस पार्क को फंडिंग मिली है। मेडिकल डिवाइस पार्क सेक्टर-28 में विकसित किया जा रहा है। इसमें 37 कंपनियों को जमीन आवंटित हो चुकी है। यहां पर आंतरिक विकास कार्य हो रहे हैं। इस परियोजना की लागत 439.49 करोड़ रुपये है। अब इस परियोजना को केंद्र की ओर से 69.50 करोड़ रुपये दिए जाने की मंजूरी मिली है। यमुना प्राधिकरण में विकसित हो रहा यह पार्क उत्तर भारत का पहला मेडिकल डिवाइस पार्क है। इससे पहले मेडिकल डिवाइस पार्क के लिए केंद्र सरकार 100 करोड़ रुपये की सब्सिडी दे चुकी है।

दूसरा प्रोजेक्ट है

2. टॉय पार्क

यमुना प्राधिकरण के सेक्टर-33 में विकसित हो रहे टाय पार्क के लिए भी ‘प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना’ के तहत पैसा मिला है। यह पार्क जेवर एयरपोर्ट के सबसे नजदीक है। इसमें 132 कंपनियों को जमीन आवंटित हो चुकी है। यहां पर आंतरिक विकास कार्य हो रहे हैं। कंपनियों को भूखंड पर कब्जा देने की तैयारी है। इस परियोजना की लागत 48.02 करोड़ रुपये है। इस परियोजना के लिए 28.95 करोड़ रुपये केंद्र से मंजूर हुए हैं। खिलौनों के आयात को लेकर चीन पर भारत की निर्भरता खत्म किए जाने के लिए यह पार्क विकसित किया जा रहा है।

तीसरा प्रोजेक्ट है

3. अपैरल पार्क

यमुना प्राधिकरण के सेक्टर-29 में अपैरल पार्क, एमएसएमई पार्क और हैंडीक्राफ्ट पार्क विकसित हो रहा है। इन पार्कों में कंपनियों को जमीन आवंटित की जा चुकी है। इनमें 500 से अधिक कंपनियां हैं। इस परियोजना की लागत 143.72 करोड़ रुपये है। इसमें से केंद्र सरकार ने 128.12 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। इस पार्क के लिए जमीन मौजूद है। प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना से मिली इस आर्थिक सहायता से यह परियोजना रफ्तार पकड़ेगी।

चौथे नंबर पर है

4. प्लास्टिक प्रोसेसिंग पार्क

सेक्टर-10 में प्लास्टिक प्रोसेसिंग पार्क, इलेक्ट्रिक व्हीकल पार्क, लेदर फुटवेयर गुड्स एंड एक्सेसरीज पार्क विकसित करने की योजना है। इसके लिए ऑथॉरिटी को भूमि अधिग्रहण करना है। इसकी प्रक्रिया शुरू हो गई है। गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय को सोशल इंपैक्ट असेसमेंट करने की जिम्मेदारी दी गई है। परियोजना की लागत 550.09 करोड़ रुपये प्रस्तावित है। केंद्र सरकार ने परियोजना शुरू करने के लिए 55.09 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। अब जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया और तेज होगी।

इससे पहले नोएडा के चार प्रोजेक्ट्स के लिए भी ‘प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना’ के तहत 230 करोड़ रुपये की मंजूरी पहले ही मिल चुकी है। नोएडा के चार प्रोजेक्ट्स में डीएससी रोड पर बन रहा भंगेल एलिवेटेड रोड,
पर्थला गोलचक्कर पर बन रहा फ्लाईओवर,
सेक्टर-69 बहलोलपुर अंडरपास
और
नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर बन रहा सेक्टर-142 एडवेंट अंडरपास शामिल हैं।

ये परियोजनाएं करीब 600 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होंगी और इनके लिए 230 करोड़ रुपये मार्च 2023 तक के लिए मिल जाएंगे। भंगेल एलिवेटेड रोड़ को छोड़कर बाकी दोनों परियोजनाओं का काम मार्च तक पूरा हो जाएगा। बहलोलपुर अंडरपास का काम लगभग पूरा हो चुका है।

यूपी के इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी चौथी और सावधान करने वाली खबर है यमुना ऑथॉरिटी की वेबसाइट के बारे में.

जेवर एयरपोर्ट के पास जमीन और घर दिलाने के नाम पर 50 से ज्यादा लोगों के साथ ठगी का मामला सामने आया है. ये ठगी की गई है यमुना ऑथॉरिटी की फर्जी वेबसाइट बनाकर.

मामला है उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले के ग्रेटर नोएडा का जहां साइबर क्राइम का एक बड़ा केस सामने आया है. यहां पर यमुना प्राधिकरण की फर्जी वेबसाइट बनाकर 50 से ज्यादा लोगों से ठगी की वारदात को अंजाम दिया गया है. बताया जा रहा है कि जेवर एयरपोर्ट प्रोजेक्ट के आसपास लोगों को जमीन और घर देने के नाम पर फर्जी वेबसाइट के जरिए धोखाधड़ी की गई है. पुलिस मामले की जांच कर रही है.

पुलिस ने मीडिया को बताया है कि ये केस प्रपोज़्ड नोएडा एयरपोर्ट और प्रपोज़्ड फिल्म सिटी के पास रेसिडेंशियल स्कीम के नाम पर की गई लाखों रुपये की ठगी का है. धोखाधड़ी का शिकार होने वालों की संख्या बढ़ भी सकती है. ठग प्रपोज़्ड नोएडा एयरपोर्ट और प्रपोज़्ड फिल्म सिटी के पास घर बनाने का सपना देखने वालों को निशाना बना रहे हैं. ठगों ने यमुना ऑथॉरिटी की नकली वेबसाइट तैयार की और रेसिडेंशियल स्कीम के नाम पर लोगों से लाखों रुपये हड़प लिए.

यमुना अथॉरिटी ने लोगों से अपील की है कि केवल असली वेबसाइट से ही जानकारी लें. यमुना प्राधिकरण ने सूचना जारी कर लोगों से आग्रह किया है कि फर्जी वेबसाइट्स से बचें और यमुना प्राधिकरण की असली वेबसाइट पर ही जाकर कोई भी स्कीम सर्च करें और उसके लिए अप्लाई करें. ठगों से बचने के लिए यमुना प्राधिकरण की अधिकारिक वेबसाइट http://www.yamunaexpresswayauthority.com/ पर ही विजिट करें।

ग्रेनो वेस्ट निवासी मनोज ने बताया कि उन्हें यमुना प्राधिकरण की आवासीय योजना के बारे में पता चला था। उन्होंने नोएडा एयरपोर्ट व फिल्म सिटी के पास प्लॉट लेने के लिए पांच अक्तूबर को गूगल पर जाकर यमुना प्राधिकरण की वेबसाइट सर्च की। वेबसाइट ओपन करने के बाद उन्होंने पत्नी के नाम से 200 मीटर के प्लॉट के लिए आवेदन किया। वेबसाइट पर ही ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन अमाउंट जमा करने का ऑप्शन दिया गया था। इस पर मनोज ने 31000 हजार रुपये जमा कर दिए, लेकिन रुपने जमा करने का ऑप्शन फिर भी खुला रहा, ताकि ऐसा लगे कि रुपये जमा नहीं हुए हैं और वह फिर से प्रयास करें। इससे मनोज को वेबसाइट फर्जी होने का एहसास हो गया। इसकी शिकायत उन्होंने तुरंत पुलिस से की।

मनोज ने बताया कि पुलिस उनकी शिकायत पर जांच में जुटी, लेकिन वह बैंकिंग के काम से जुड़े हैं। इस कारण वह भी यह पता लगाने का प्रयास करते रहे कि आखिर रुपये किसके खाते में गए हैं। जिस खाते में रुपये गए हैं वह दिल्ली के हैं। पुलिस ने कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेकर उनके सामने पूछताछ भी की है। हालांकि, पुलिस का कहना है कि आरोपी फरार है।
ग्रेनो वेस्ट निवासी मनोज की शिकायत पर बिसरख कोतवाली पुलिस ने केस दर्ज कर जांच की तो करीब 50 लोगों को ठगने की बात सामने आई है. पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी की कोशिश में जुटी हुई है.

बिसरख कोतवाली प्रभारी का कहना है कि पांच अन्य पीड़ितों की लिखित तहरीर मिली है और जांच में लगभग 50 पीड़ित और सामने आए हैं।

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