Swami Prasad Maurya Impact अखिलेश को हरवाएंगे स्वामी प्रसाद मौर्य ?

Swami Prasad Maurya Impact अखिलेश को हरवाएंगे स्वामी प्रसाद मौर्य ?

अखिलेश को जिताएंगे या हराएंगे स्वामी मौर्य ?

जब से स्वामी प्रसाद मौर्य अपने कुछ साथियों के साथ बीजेपी छोड़कर समाजवादी पार्टी में गए हैं तब से ही ये चर्चा ज़ोरों पर है कि उनके जाने से उत्तर प्रदेश में बीजेपी को कितना नुकसान होगा और समाजवादी पार्टी को कितना फायदा होगा. बीजेपी सरकार में यूपी के रोज़गार मंत्री रहे स्वामी प्रसाद तो दावा कर रहे हैं कि वो बीजेपी को बरबाद कर देंगे. स्वामी प्रसाद ने ये भी दावा किया है कि 2017 में बीजेपी उत्तर प्रदेश में सत्ता में आई ही उनकी वजह से थी और अब जब वो समाजवादी पार्टी में जा चुके हैं तो बीजेपी का सत्ता से बाहर होना तय है. ये उनका दावा है और दावा करने का हक हर नेता और हर पार्टी को है.

Swami Prasad Maurya Impact अखिलेश को हरवाएंगे स्वामी प्रसाद मौर्य ?

हम इस वीडियो में बात करेंगे कि क्या स्वामी प्रसाद मौर्य का किसी पार्टी में रहना वाकई उस पार्टी की जीत की गारंटी है या नहीं.

Swami Prasad Maurya Impact अखिलेश को हरवाएंगे स्वामी प्रसाद मौर्य ?


ये बात सही है कि 2016 में स्वामी बीजेपी में उस वक्त शामिल हुए थे जब किसी को उम्मीद नहीं थी कि बीजेपी 2017 में 300 प्लस सीटें जीतकर यूपी की सत्ता में आने वाली है. स्वामी के इस एक फैसले की वजह से उन्हें राजनीति का मौसम वैज्ञानिक भी कहा गया है. जबकि इससे पहले स्वामी ने कभी भी ऐसा कदम नहीं उठाया जिससे कि कहा जा सके कि उन्हें सत्ता में आने वाली पार्टी का अहसास पहले ही हो जाता है. फॉर एग्ज़ाम्पल अगर हम 2012 के विधानसभा चुनाव की बात करें तो उसमें समाजवादी पार्टी को बम्पर जीत हासिल हुई थी लेकिन स्वामी प्रसाद मौर्य उस वक्त बीएसपी में थे और उन्हें ज़रा भी अंदाज़ा नहीं हो पाया कि उनकी पार्टी की मुखिया मायावती की 2007 से चल रही सरकार जाने वाली है और समाजवादी पार्टी की सरकार आने वाली है.

2012 का यूपी का विधानसभा चुनाव कई मायनों में महत्वपूर्ण था. समाजवादी पार्टी के लिए भी और बीएसपी के स्वामी प्रसाद मौर्य के लिए भी. दरअसल यही वो चुनाव था जिसके रिज़ल्ट का ऐनैलिसिस करके आप स्वामी प्रसाद मौर्य की राजनीतिक हैसियत का अंदाज़ा लगा सकते हैं. 2012 के विधानसभा चुनाव के लिए बीएसपी की मुखिया मायावती ने स्वामी मौर्य को उनके राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा मौका दिया था.

हुआ ये था जब 2007 में मायावती उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं तो उसके अगले ही साल यानी 2008 में उन्होंने स्वामी प्रसाद मौर्य को बीएसपी की पूरे यूपी की ज़िम्मेदारी सौंप दी थी. मायावती ने स्वामी को बहुजन समाज पार्टी का उत्तर प्रदेश राज्य का अध्यक्ष बना दिया था. मायावती को उम्मीद थी कि स्वामी प्रसाद मौर्य उत्तर प्रदेश में पिछड़ी जातियों को बीएसपी से जोड़ेंगे.

Swami Prasad Maurya Impact अखिलेश को हरवाएंगे स्वामी प्रसाद मौर्य ?


2007 के बाद अगला विधानसभा चुनाव 2012 में होना था. इस लिहाज़ से स्वामी प्रसाद के पास चुनावी तैयारी के लिए 2008 से लेकर 2012 तक का अच्छा खासा वक्त भी था. लेकिन जब 2012 विधानसभा चुनाव के नतीजे आए तो बीएसपी को बुरी हार का मुंह देखना पड़ा. इस चुनाव में बीएसपी के प्रदेश अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य का सीधा मुकाबला हुआ था समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव से. और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर अखिलेश ने स्वामी को तगड़ी पटखनी दी थी.

इलेक्शन कमीशन की वेबसाइट पर दिए गए रिकॉर्ड के मुताबिक 2012 के विधानसभा चुनाव में बीएसपी की सीटें 2007 के मुकाबले 206 से घटकर 80 रह गई थीं. यानी जिस चुनाव के लिए स्वामी प्रसाद मौर्य को बीएसपी यानी बहुजन समाज पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया उस चुनाव में पार्टी की 126 सीटें कम हो गईं. इस चुनाव में स्वामी मौर्य के सामने जो चुनौती देने वाली पार्टी थी उसकी सीटें 2007 के मुकाबले 97 से बढ़कर 224 हो गई थीं.2012 में बीएसपी का वोट प्रतिशत भी 2007 के मुकाबले लगभग साढ़े चार प्रतिशत गिर गया था.

बीएसपी को 2007 में जहां कुल डाले गए 5 करोड़ 21 लाख 63 हज़ार 4 सौ 17 में से 1 करोड़ 58 लाख 72 हज़ार 5 सौ 61 यानी 30.43 प्रतिशत वोट मिले थे वहीं 2012 में बीएसपी को कुल डाले गए 7 करोड़ 58 लाख 31 हज़ार 6 सौ 82 वोट में से 1 करोड़ 96 लाख 47 हज़ार 3 सौ 3 वोट मिले थे. 2012 में बीएसपी का वोट प्रतिशत 2007 के मुकाबले 30.43 प्रतिशत से गिर कर 25.91 प्रतिशत रह गया था. ये वो चुनाव था जब समाजवादी पार्टी बड़े बहुमत से सत्ता में आई थी. समाजवादी पार्टी को उस चुनाव में 224 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल हुई थी. दूसरी तरफ स्वामी प्रसाद मौर्य की मौजूदगी वाली बीएसपी को 2012 में केवल 80 विधानसभा सीटों पर जीत मिली थी. हालांकि उस चुनाव में बीजेपी का और भी बुरा हाल था. बीजेपी को केवल 47 सीटें मिल पाई थीं. तब कांग्रेस को केवल 28 सीटें मिली थीं.अपनी-अपनी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर अखिलेश और स्वामी के मुकाबले वाले इस चुनाव में समाजवादी पार्टी को कुल पड़े वोटों में से 29.13 प्रतिशत वोट मिले थे. यानी 2 करोड़ 20 लाख 90 हज़ार 5 सौ 71 वोट.

यहां ये ध्यान रखना ज़रूरी है कि 2012 में नरेंद्र मोदी का प्रभाव बीजेपी में गुजरात के बाहर कहीं नहीं था और यूपी में तो पार्टी की हालत बेहद खराब थी. 2012 में बीजेपी को केवल 1 करोड़ 13 लाख 71 हज़ार 80 वोट मिले थे और बीजेपी का वोट प्रतिशत था 15.
अब अगर बात करें इसके 2 साल बाद आए लोकसभा चुनाव 2014 की तो 2014 में बीएसपी को उत्तर प्रदेश में 1 करोड़ 59 लाख 14 हज़ार 1 सौ 94 यानी 19.77 प्रतिशत वोट मिले थे. ये तब की बात है जब स्वामी प्रसाद मौर्य बीएसपी में थे और बीजेपी ने पहली बार उत्तर प्रदेश में अपनी धमक दर्ज कराई थी. इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को 3 करोड़ 43 लाख 18 हज़ार 8 सौ 54 वोट मिले थे. बीएसपी के 19.77 प्रतिशत के मुकाबले बीजेपी के वोट 42.63 प्रतिशत थे. यानी स्वामी प्रसाद मौर्य के रहते हुए भी बीजेपी को बीएसपी से डबल से भी ज्यादा वोट मिले थे. इसी लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी का प्रदर्शन देखें तो उसे 1 करोड़ 79 लाख 88 हज़ार 9 सौ 67 वोट मिले थ. एसपी का वोट परसेंटेज था 22.35. यानी 2014 में स्वामी प्रसाद मौर्य के बीएसपी में होते हुए भी समाजवादी पार्टी को बहुजन समाज पार्टी से भी ज्यादा वोट मिले थे.

इसके बाद 2016 में स्वामी प्रसाद मौर्य बीजेपी में आ गए और यूपी में अगला चुनाव आया 2017 में. इलेक्शन कमीशन की वेबसाइट पर दिए गए रिकॉर्ड के मुताबिक 2017 में कुल वोट पड़े 8 करोड़ 67 लाख 28 हज़ार 3 सौ 24. इलेक्शन कमीशन के रिकॉर्ड के मुताबिक 2017 में हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बीजेपी को कुल वोट मिले थे 3 करोड़ 44 लाख 3 हज़ार 2 सौ 99. बीजेपी का वोट परसेन्टेज 39.66 प्रतिशत था. 2017 में समाजवादी पार्टी को 21.82 प्रतिशत के हिसाब से 1 करोड़ 89 लाख 23 हज़ार 7 सौ 69 वोट मिले थे. 2017 में बीएसपी को वोट मिले 1 करोड़ 92 लाख 81 हज़ार 3 सौ 40 और बीएसपी का वोट प्रतिशत था 22.23. यहां ध्यान दीजिए कि जब 2014 में स्वामी प्रसाद मौर्य बीएसपी में थे तब वो बीएसपी को कुल 19.77 प्रतिशत वोट दिला पाए थे लेकिन जैसे ही वो बीएसपी से बाहर आए तो उनके जाने के बाद अगले चुनाव में ही बीएसपी का वोट प्रतिशत बढ़ गया. वो 2014 के 19.77 प्रतिशत से बढ़कर 2017 में 22.23 प्रतिशत हो गया. यानी स्वामी प्रसाद मौर्य का जाना बीएसपी के लिए अच्छा साबित हुआ.


दूसरी तरफ 2019 के लोकसभा चुनाव के आंकड़ों पर नज़र डालें तो इसमें कुल 8 करोड़ 57 लाख 56 हज़ार 3 सौ 1 वोट डाले गए थे जिसमें से Bahujan Samaj Party को 19.42 Percent के हिसाब से 1 करोड़ 66 लाख 59 हज़ार 7 सौ 54 votes मिले. 2019 में Bharatiya Janata Party को 49.97 Percent के हिसाब से 4 करोड़ 28 लाख 58 हज़ार 1 सौ 71 Votes मिले. जबकि Samajwadi Party को 18.11 Percent के हिसाब से 1 करोड़ 55 लाख 33 हज़ार 6 सौ 20 votes हासिल हुए.


अब अगर 2019 के लोकसभा चुनाव की तुलना 2014 से करें जब स्वामी प्रसाद मौर्य बीएसपी में थे तो कई मजेदार आंकड़े निकल कर सामने आते हैं. जैसे 2014 में बीजेपी को लोकसभा की 71 सीटें हासिल हुई थीं जबकि बीएसपी को ज़ीरो सीट मिली थी. लेकिन जब 2019 में स्वामी बीजेपी में थे तो बीजेपी की सीटें घटकर 62 रह गईं और बीएसपी की सीटें 2014 के मुकाबले 10 बढ़ गईं. इन तमाम आंकड़ों को जानने के बाद अब आप खुद अंदाजा लगा सकते हैं कि स्वामी प्रसाद मौर्य किसके वोट और सीटें घटवा सकते हैं और किसकी बढ़वा सकते हैं.

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