Ghazal by Ravi Parashar अपने मन के अंदर देख

Ghazal by Ravi Parashar अपने मन के अंदर देख

रवि पाराशर की ग़ज़ल


अपने मन के अंदर देख,
फिर तू बड़ा समंदर देख।

हाथ झटक कर भाग गए,
तीन सयाने बंदर, देख।

कितने आए, चले गए,
हिटलर देख, सिकंदर देख।

पानी मछली ने देखा,
रोटी, गोपीचंदर देख।

ख़ुद की आंख गुलाबी कर,
मुझको मस्त कलंदर देख।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *