टप्पल नगर पंचायत में शामिल किये गये 5 गांव वापस यमुना ऑथॉरिटी के अधिसूचित क्षेत्र में शामिल, अवैध निर्माण पर चलेगा बुलडोज़र?

टप्पल नगर पंचायत में शामिल किये गये 5 गांव वापस यमुना ऑथॉरिटी के अधिसूचित क्षेत्र में शामिल, अवैध निर्माण पर चलेगा बुलडोज़र?

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यूपी सरकार ने पांच गांवों को नगर पंचायत टप्पल में शामिल करने के बाद यमुना ऑथॉरिटी में वापस कर दिया है। ये फैसला 25 नवंबर 2022, शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया। यीडा यानी यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवेलपमेंट ऑथॉरिटी के पांच गांवों की करीब 2627 हेक्टेयर जमीन है।

प्राधिकरण की 250 हेक्टेयर जमीन पर लॉजिस्टिक हब विकसित करने की योजना थी और इसकी डीपीआर भी बन गई थी। लेकिन इसे कुछ नेताओं और अधिकारियोंकी शह पर पंचायत में शामिल करने की कोशिश की जा रही थी. इन गांवों के अब फिर से यमुना ऑथॉरिटी में आने के बाद इन गांवों की जमीन पर हुए अतिक्रमण पर बुल्डोजर चलाया जाएगा. अब प्राधिकरण यहां पर दो हजार हेक्टेयर ज़मीन पर एक और लॉजिस्टिक हब बनाएगा।

अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से नेताओं और अफसरों के लाखों-करोड़ों रुपये बर्बाद हो जाएंगे. सूत्र बताते हैं कि गौतमबुद्धनगर से लेकर अलीगढ़, आगरा और लखनऊ में बैठे कुछ नेता और अधिकारियों का इन गांवों में पैसा लगा है। इससे उनकी लाखों-करोड़ों की संपत्ति का नुकसान होना तय है। नगर पंचायत की ओर से आनन-फानन प्लॉट और ग्रुप हाउसिंग के नक्शे पास कर दिए गये थे। इससे अवैध निर्माण काफी हो गया है।

मामला ये है कि यमुना प्राधिकरण के नोटिफाइड एरिया में गौतमबुद्धनगर, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा और आगरा जिले का भी कुछ-कुछ हिस्सा आता है। स्थानीय नेताओं और अधिकारियों की पेशकश पर करीब डेढ़ साल पहले टप्पल नगर पंचायत का गठन किया था। इसमें यीडा के पांच अधिसूचित गांव भी चले गए थे। इसमें टप्पल, उदयपुर, मेवा नगला, नूरपुर और मिलिक गांव का लगभग 2627 हेक्टेयर एरिया नगर पंचायत में शामिल कर दिया गया था। इसकी जानकारी यीडा के अफसरों को भी नहीं दी गई थी. जब ऑथॉरिटी को जानकारी मिली तो उसने यूपी सरकार से यमुना ऑथॉरिटी का एरिया लौटाने की मांग की।

ऑथॉरिटी ने सरकार को बताया कि उसकी योजना इन गांवों की ज़मीन पर लॉजिस्टिक हब बनाने की है और उसकी डीपीआर भी बन चुकी है। इसके बाद यूपी सरकार ने शुक्रवार को इन 5 गांवों के क्षेत्र को फिर से प्राधिकरण के अधिसूचित क्षेत्र में शामिल कर दिया है। अब प्राधिकरण इन गांवों की जमीन पर काटी गई अवैध कालोनी और ग्रुप हाउसिंग
की योजनाओं को ध्वस्त करेगा।

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