Natural Paint Made from Cow dung By KVIC 1 KG गोबर के बदले क्या मिलेगा?

Natural Paint Made from Cow dung By KVIC

Natural Paint Made from Cow dung By KVIC 1 KG गोबर के बदले मिलेगा कितना पैसा?

कौन खरीदेगा आपकी गाय का गोबर ?

1 किलो गोबर के बदले मिलेगा कितना पैसा ?

गोबर से कौन बनाएगा पेंट ?

गोबर से बना पेंट आम पेंट से कितना सस्ता होगा ?

https://youtu.be/zhqZQGOmNeU

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दोस्तों, अगर आप भी भारत के किसी गांव में रहते हैं और आपके पास गाय भी हैं तो मोटी कमाई के लिए तैयार हो जाइए. अब आपको मिलने वाला है गाय से काम और गोबर का अच्छा दाम.

Natural Paint Made from Cow dung By KVIC

KVIC यानी KHADI AND VILLAGE INDUSTRIES COMMISION जल्द ही देश भर के कई इलाकों में गाय के गोबर से नैचुरल पेंट बनाने की यूनिट लगाने जा रहा है. इन यूनिट्स पर आम लोगों और गौशालाओं से गोबर बाकायदा खरीदा जाएगा. गाय के गोबर के लिए पांच रुपये प्रति किलो के हिसाब से भुगतान किया जाएगा. यानी अगर कोई ग्रामीण महीने भर में गाय का 2000 किलो गोबर भी बेचता है तो उसे 10000 रुपये महीने की कमाई होने लगेगी.

फिलहाल गांवों में गोबर का इस्तेमाल उपले बनाकर ईंधन के तौर पर या खाद के तौर पर किया जाता है. लेकिन शहरी इलाकों में कई गौशालाओं में गोबर को पानी के साथ नालियों में बहा दिया जाता है. जिससे गंदगी तो फैलती ही है गोबर का भी इस्तेमाल नहीं हो पाता. लेकिन अब KVIC की मदद से न सिर्फ गोबर का सही इस्तेमाल होगा बल्कि गांव के लोगों को गोबर से अच्छा पैसा कमाने का मौका भी मिलेगा.

KVIC ने देश की राजधानी दिल्ली, यूपी के वाराणसी, गुजरात के अहमदाबाद, कर्नाटक के बेंगलुरू, महाराष्ट्र के नाशिक और ओडिशा के चौद्वार में भी नैचुरल पेंट की फैक्ट्री लगाने का फैसला किया है.

अब अगर आपको लगता है कि ये कोई अफवाह है या ऐसा पॉसिबल ही नहीं है तो इन तस्वीरों को देखिए. ये तस्वीरें हैं जनवरी 2021 की. ये तस्वीरें उस ईवेंट की हैं जब देश के MSME मिनिस्टर के तौर पर नितिन गडकरी ने पहली बार राजस्थान के जयपुर में गाय के गोबर से बना पेंट लॉन्च किया था.

KVIC चेयरमैन विनय कुमार सक्सेना ने बताया कि आम लोगों और गौशालाओं (Gaushala) से पांच रुपये प्रति किलोग्राम की कीमत पर गोबर खरीदा जाएगा. KVIC के मुताबिक अभी लोग एक से डेढ़ रुपये प्रति किलोग्राम की दर पर गाय के गोबर को खाद या दूसरे कामों के लिए बेचते हैं. गोबर के उपले बनाकर भी बेचे जाते हैं जिसमें लागत और मेहनत भी लगती है. लेकिन अब KVIC चार से पांच गुना ज्यादा कीमत देकर गोबर खरीदेगा.

आमतौर पर एक हेल्दी गाय दिन में 20 से 25 किलोग्राम तक गोबर करती है. ऐसे में पांच रुपये प्रतिकिलो के हिसाब से एक गाय के गोबर को बेचने से ही रोजाना 100 रुपये से 125 रुपये तक की कमाई की जा सकती है. साथ ही महीने का तीन हजार रुपये से चार हजार रुपये तक एक गाय से कमाया जा सकता है. जबकि गाय का दूध और घी अलग हैं.

6 महीने पहले लांच हुए इस Natural Paint Made from Cow dung By KVIC की मांग लगातार बढ़ रही है. महज 12 दिन के अंदर गोबर से बना साढ़े तीन हजार लीटर पेंट बिक गया था. ये बिक्री सिर्फ दिल्ली और जयपुर के 2 स्टोर्स से की गई थी.

लोग अपने घरों की दीवारों पर इसका यूज़ कर रहे हैं. इस पेंट को लॉन्च करने वाले नितिन गडकरी ने भी इसका इस्तेमाल अपने घर की दीवारों पर किया है. वहीं खादी ग्रामोद्योग आयोग की कई बिल्डिंग्स में भी इसे यूज़ किया गया है. अब खादी ग्रामोद्योग आयोग ने इस पेंट की ऑनलाइन सेल Online Sale भी शुरू कर दी है. अब देशभर में कहीं से भी लोग इसे ऑर्डर कर सकते हैं.

गाय के गोबर से बना ये नैचुरल पेंट बाज़ार में मिलने वाले बड़ी कंपनियों के पेंट्स के मुकाबले लगभग आधी कीमत पर मिल रहा है. इसके डिस्टेम्पर की कीमत 120 रुपये किलो और इमलशन की कीमत 215 रुपये किलो रखी गई है. 

Delhi Meerut RRTS Latest News आपके इलाके में बनेगा रैपिड रेल स्टेशन ?

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दिल्ली-मेरठ RRTS रूट पर कब से चलेगी रैपिड रेल ?

सबसे पहले कौन से सेक्शन पर चलेगी रैपिड रेल ?

दिल्ली से मेरठ तक कुल कितने स्टेशन बनाए जाएंगे ?

क्या आपके इलाके में बनेगा रैपिड रेल स्टेशन ?

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Delhi-Meerut RRTS यानी रीजनल रेल ट्रांजिट सिस्टम के ट्रैक पर रैपिड रेल दौड़ाने की तैयारी फुल स्पीड में है. NCRTC यानी National Capital Region Transport Corporation यानी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम की पूरी कोशिश है कि कम से कम 17 किलोमीटर के रूट पर जल्द से जल्द रैपिड रेल चला दी जाए.

इसके लिए मार्च 2023 का वक्त तय किया गया है. 17 किलोमीटर के जिस सेक्शन पर मार्च 2023 तक रैपिड रेल दौड़नी शुरू हो जाएगी वो है साहिबाबाद से दुहाई के बीच का सेक्शन. इसमें 5 स्टेशन होंगे. ये स्टेशन हैं साहिबाबाद, गाज़ियाबाद, गुलधर, दुहाई और दुहाई डिपो.

Delhi Meerut RRTS Rapid Rail Route Map

दिल्ली से मेरठ तक RRTS यानी रीजनल रेल ट्रांसपोर्ट सिस्टम का पूरा रूट लगभग 82 किलोमीटर का है. इस पूरे प्रोजेक्ट पर 30,274 करोड़ रुपए का खर्च आने का अनुमान है. इस प्रोजेक्ट के लिये UP Government ने इस साल बजट में 1,326 करोड़ रुपए का प्रोविजन किया है. RRTS Project से जुड़े अफसरों का कहना है कि इस 82 किलोमीटर के प्रपोज़्ड दिल्ली-मेरठ RRTS कॉरिडोर पर कुल 24 स्टेशन बनाए जाने हैं.

इस प्रोजेक्ट की खासियत ये है कि इसे एयरपोर्ट्स, रेलवे स्टेशन और अंतरराज्यीय बस अड्डा यानी आईएसबीटी से भी कनेक्ट किया जाएगा. इसके अलावा मेट्रो स्टेशन्स की भी RRTS Station के साथ कनेक्टिविटी बनाने का प्लान है.

दिल्ली-मेरठ RRTS का पूरा कॉरीडोर मार्च, 2025 में आम लोगों के लिए शुरू कर देने की डेडलाइन रखी गई थी लेकिन COVID-19 के चलते इसके काम पर असर पड़ा है. हालांकि अभी भी दावा किया जा रहा है कि RRTS प्रोजेक्ट वक्त पर पूरा कर लिया जाएगा. ये उम्मीद इसलिए है क्योंकि इस प्रोजेक्ट के वो ज्यादातर पिलर्स तैयार कर दिए गए हैं जो उत्तर प्रदेश में आते हैं. कॉरीडोर के एलिवेटेड हिस्से में लगभग 700 पिलर खड़े कर लिए गए हैं जो पूरे कॉरीडोर का लगभग 20 किमी से ज्यादा है या एक चौथाई हिस्से जितना निर्माण है.

इसके अलावा दिल्ली के Anand Vihar में जल्द ही टनल का निर्माण शुरू होने वाला है. आनंद विहार साइट पर दिल्ली जल बोर्ड की इंटरसेप्टर सीवर लाइन को शिफ्ट करने का काम भी किया जा रहा है. इस लाइन को MTB माइक्रो टनलिंग बोरिंग के तहत शिफ्ट किया जा रहा है.


आनंद विहार में 20 मीटर लंबी और 16 मीटर चौड़ाई वाली टनल बोरिंग मशीन के लॉन्चिंग शाफ्ट का काम चल रहा है. दो TBM यानी टनल बोरिंग मशीन्स को लॉन्चिंग शाफ्ट में उतारा जाएगा ताकि आनंद विहार से सराय काले खां की ओर RRTS के लिए दो यानी जुड़वां सुरंगों को बोर किया जा सके. ये सुरंग लगभग 3 किमी लंबी होगी.

अब बात करते हैं उन इलाकों की जहां दिल्ली मेरठ RRTS कॉरीडोर के स्टेशन्स बनाए जाएंगे. कुल 24 स्टेशन्स में सराय काले खां, न्यू अशोक नगर, आनंद विहार, साहिबाबाद, गाजियाबाद, गुलधर, दुहाई, दुहाई डिपो, मुरादनगर, मुरादनगर डिपो, मोदीनगर साउथ, मोदीनगर नॉर्थ, मेरठ साउथ, परतापुर, रिठानी, शताब्दी नगर, ब्रह्मपुरी, मेरठ सेंट्रल, भैंसाली, बेगमपुल, MES कॉलोनी, दरौली मेट्रो, मेरठ नॉर्थ और मोदीपुरम हैं. इसके अलावा RRTS ट्रेन फीड के लिए दो डिपो अलग से भी तैयार किए जा रहे हैं.

2025 में जब दिल्ली-मेरठ रूट पूरी तरह शुरू हो जाएगा तो रैपिड रेल से हर रोज करीब 8 लाख पैसेंजर के सफर करने का अनुमान है.

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