States of India and Union Territories of India

States of India and Union Territories of India

States and Capitals of India

Following is the list of states and capitals of India.

Total states in India are 28.

राज्य राजधानी

आंध्र प्रदेश हैदराबाद
Andhra Pradesh Hyderabad

अरूणाचल प्रदेश ईटानगर
Arunachal Pradesh Itanagar

असम दिसपुर
Assam Dispur

बिहार पटना
Bihar Patna

छत्तीसगढ़ रायपुर
Chhattisgarh Raipur

गोवा पणजी
Goa Panaji


Goa is the smallest state in india in terms of area.

गुजरात गांधीनगर
Gujarat Gandhinagar

हरियाणा चंडीगढ़
Haryana Chandigarh

हिमाचल प्रदेश शिमला
Himachal Pradesh Shimla

झारखण्ड रांची
Jharkhand Ranchi

कर्नाटक बंगलौर
Karnataka Bangalore

केरल तिरूवनंतपुरम
Kerala Thiruvananthpuram

मध्य प्रदेश भोपाल
Madhya Pradesh Bhopal

महाराष्ट्र मुंबई
Maharashtra Mumbai

मणिपुर इंफाल
Manipur Imphal

मेघालय शिलांग
Meghalaya Shilong

मिजोरम आइजोल
Mizoram Aizawl

नागालैण्ड कोहिमा
Nagaland Kohima

ओडिशा भुवनेश्वर
Odisha Bhubaneshwar

पंजाब चंडीगढ़
Punjab Chandigarh

राजस्थान जयपुर
Rajasthan Jaipur


Rajasthan is the Largest state of India in terms of area.

सिक्किम गैंगटोक
Sikkim Gangtok

तमिलनाडु चेन्नई
Tamilnadu Chennai

तेलंगाना हैदराबाद
Telangana Hyderabad

त्रिपुरा अगरतला
Tripura Agartala

उत्तराखंड देहरादून
Uttarakhand Dehradun

उत्तर प्रदेश लखनऊ
Uttar pradesh Lucknow

पश्चिम बंगाल कोलकाता
West Bengal Kolkata

Following is the list of 9 Union Territories of India. Their capitals are also given below.

संघ राज्य क्षेत्र राजधानी
केंद्र शासित प्रदेश

Union Territories Capital

अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह पोर्ट ब्लेयर
Andaman and Nicobar Islands Port Blair

चण्डीगढ़ चंडीगढ़
Chandigarh Chandigarh

दादरा तथा नगर हवेली सिलवास
Dadra and Nagar Haveli Silvassa

दमन एवं दीव दमन
Daman & Diu Daman

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली दिल्ली
The Government of NCT of Delhi Delhi

जम्मू एवं कश्मीर श्रीनगर(ग्रीष्मकाल)
Jammu & Kashmir Srinagar-S*

जम्मू(शीतकाल)
Jammu-W*

लद्दाख लेह
Ladakh Leh

लक्षद्वीप कवारत्ती
Lakshadweep Kavaratti

पुडुचेरी पुडुचेरी
Puducherry Puducherry

Delhi Tourism दिल्ली Best Places to visit in Delhi

Delhi Tourism दिल्ली Best Places to visit in Delhi

Top Places to visit in Delhi

Delhi Travel Guide

Delhi में घूमने के लिए बेस्ट जगह

आज Delhi दिल्ली भारत की राजधानी है लेकिन एक वक्त था जब Delhi दिल्ली मुगल काल में मुगलों की शान थी। उस वक्त Delhi दिल्ली जीतने का मतलब इतिहास में नाम दर्ज होना होता था। Delhi दिल्ली पर एक से बड़े एक और दिग्गज बादशाहों ने राज किया है।

Delhi दिल्ली का इतिहास बहुत लम्बा-चौड़ा और उतार-चढ़ावों से भरा है। ये इतिहास ऐतिहासिक इमारतों, दीवारों और मीनारों में रचा बसा है और इन सबसे मिलकर ही बना है. इसी विरासत और इतिहास की वजह से शायद दिल्ली को देश की राजधानी बनाया गया।

कहा जाता है कि Delhi दिल्ली दिल वालों का शहर है जहाँ इतिहास और वर्तमान हाथ थामे चलते हैं।

Delhi दिल्ली शहर ने बहुत सी अलग-अलग संस्कृतियों को अपनाया है और उन संस्कृतियों की झलक इस मेट्रोपोलिटन सिटी की इमारतों, कला, खानपान, रहन-सहन, त्यौहारों और जीवनशैली में दिखाई भी देती है।

इस शहर में घूमने के लिए इतनी सारी ऐतिहासिक जगहें हैं, जिन्हें देखकर आप खुश हो जाएंगे। वैसे आज लोगों के दिलो दिमाग में Delhi दिल्ली शहर की तस्वीर बदल गई है। आज देश की राजधानी दिल्ली शहर को हम भीड़, ट्रैफिक जाम, अपराध की राजधानी और प्रदूषण की वजह से ज्यादा जानने लगे हैं।

वैसे ऐसा नहीं है कि Delhi दिल्ली का दूसरा रूप उतना बदरंग है। आज भी दिल्ली अपने इतिहास की वजह से जानी जाती है और उस इतिहास की तरह दिल्ली आज भी काफी खूबसूरत है। यहां आज भी मीनारें हैं और दीवारों से घिरे किले हैं। कोई भी टूरिस्ट या मुसाफिर अगर ऐतिहासिक चीजों को देखने का शौक रखता है तो दिल्ली उसे निराश नहीं करेगी।

Delhi दिल्ली की यात्रा करने वालों के लिए यहां देखने को बहुत कुछ है।इस पोस्ट के ज़रिए हम आपको बता रहे हैं दिल्ली की कुछ ऐतिहासिक इमारतों, प्रमुख पर्यटन स्थलों और ऐतिहासिक जगहों के बारे में.

अक्षरधाम मंदिर

Delhi दिल्ली में स्थित स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर 10,000 वर्ष पुरानी भारतीय संस्कृति के प्रतीक को बहुत विस्मयकारी, सुंदर, बुद्धिमत्तापूर्ण और सुखद रूप में पेश करता है। ये भारतीय शिल्पकला, परंपराओं और प्राचीन आध्यात्मिक संदेशों के तत्वों को शानदार ढंग से दिखाता है। अक्षरधाम मंदिर ज्ञानवर्धक यात्रा का एक ऐसा अनुभव है जो मानवता की प्रगति, खुशियों और सौहार्दता के लिए भारत की शानदार कला, मूल्यों और योगदान का ब्यौरा देता है।

स्वामीनारायण अक्षरधाम परिसर का निर्माण कार्य एचडीएच प्रमुख बोचासन के स्वामी महाराज श्री अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (बीएपीएस) के आशीर्वाद से और 11,000 कारीगरों और हज़ारों बीएपीएस स्वयंसेवकों के विराट धार्मिक प्रयासों से केवल पांच साल में पूरा हुआ। गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज विश्व के सबसे बड़े विस्तृत हिंदू मंदिर, परिसर का उद्घाटन 6 नवंबर, 2005 को किया गया था।

भगवान स्वामीनारायण को समर्पित एक पारंपरिक मंदिर भारत की प्राचीन कला, संस्कृति और शिल्पकला की सुंदरता और आध्यात्मिकता की झलक प्रस्तुत करता है।

नीलकण्ठ वर्णी अभिषेक
एक प्रतिष्ठित आध्यात्मिक परंपरा, जिसमें वैश्विक शांति और व्यक्ति, परिवार और मित्रों के लिए अनवरत शांति की प्रार्थनाएं की जाती हैं जिसके लिए भारत की 151 पवित्र नदियों, झीलों और तालाबों के पानी का उपयोग किया जाता है।

कार्यक्रम-शोज़-प्रदर्शनियां

हॉल ऑफ़ वैल्यूज़ (50 मिनट)

अहिंसा, ईमानदारी और आध्यात्मिकता का उल्लेख करने वाली फिल्मों और रोबोटिक शो के माध्यम से चिरस्थायी मानव मूल्यों का अनुभव।

विशाल पर्दे पर फिल्म (40 मिनट)

इस फिल्म में नीलकण्ठ नाम के एक 11 वर्षीय योगी की अविश्वसनीय कथा के माध्यम से भारत की जानकारी दी जाती है जिसमें भारतीय रीति-रिवाज़ों को संस्कृति और आध्यात्मिकता के माध्यम से जीवन-दर्शन में उतारा गया है, इसकी कला और शिल्पकला का सौंदर्य तथा अविस्मरणीय दृश्यावलियों, ध्वनियों और इसके प्रेरक पर्वों की शक्ति का अनुभव किया जा सकता है।

कल्चरल बोट राइड (15 मिनट)

ये बोट राइड भारत की शानदार विरासत के 10,000 वर्षों का सफ़र कराती है। इसमें भारत के ऋषियों-वैज्ञानिकों की खोजों और आविष्कारों की जानकारी ली जा सकती है। विश्व का प्रथम विश्वविद्यालय तक्षशिला, अजंता-एलौरा की गुफाएं और प्राचीन काल से ही मानवता के प्रति भारत के योगदान की जानकारी भी इस राइड में दी जाती है।

संगीतमय फव्वारा – जीवन चक्र (सूर्योदय के बाद सायंकाल में – 15 मिनट)

एक दर्शनीय संगीतमय फव्वारा शो, जिसमें भारतीय दर्शन के अनुरूप जन्म, जीवनकाल और मृत्यु चक्र का उल्लेख किया जाता है।

गार्डन ऑफ इंडिया
लोटस गार्डन

मंदिर परिसर में कमल के आकार का एक बागीचा उस आध्यात्मिकता का आभास देता है, जो दर्शनशास्त्रियों, वैज्ञानिकों और लीडरों द्वारा व्यक्त की जाती है।

जंतर मंतर
जंतर मंतर राजधानी Delhi दिल्ली के दिल कनॉट प्लेस के बीचों-बीच स्थित है। जंतर-मंतर प्राचीन भारत की वैज्ञानिक उन्नति की मिसाल है। जंतर मंतर का निर्माण महाराजा जयसिंह द्वीत्तीय ने 1724-1725 में करवाया था। ये जयपुर के शासक महाराजा जयसिंह द्वितीय द्वारा बनवायी गयी ऑब्जर्वेटरी में से एक है। उन्होंने दिल्ली के साथ जयपुर, उज्जैन, मथुरा और वाराणसी में भी इनका निर्माण कराया था। मोहम्मद शाह के शासन काल में हिंदू और मुस्लिम खगोलशास्त्रियों में ग्रहों की स्थिति को लेकर बहस छिड़ गई थी। जयसिंह ने इसे खत्म करने के लिए जंतर-मंतर का निर्माण करवाया था। इसमें मौजूद विशालकाय उपकरण खगोलीय गणनाओं में मददगार हुआ करते थे। यहाँ ऐसे कई उपकरण मौजूद हैं जो खगोलीय ब्रह्माण्ड से जुड़ी दिव्य गणनाओं और ग्रहणों के पूर्वानुमान लगाने में मदद करते थे। इसमें बड़ा सन डायल भी है जिसे प्रिंस ऑफ डायल कहा जाता है।

पुराना किला
पुराना किला Delhi दिल्ली के सबसे प्राचीन किलों में से एक है। ये एक आयताकार किला है। इसके मुख्य दरवाजे के अंदर एक छोटा-सा पुरातत्व संग्रहालय है। हर शाम यहाँ ‘साउंड एंड लाइट शो’ होता है। इसका निर्माण सूरी साम्राज्य के संस्थापक शेर शाह सूरी ने किया था। शेर शाह सूरी ने इसके आस-पास के शहरी इलाके के साथ ही इस गढ़ को बनाया था। 1540 में शेर शाह सूरी ने हुमायूँ को पराजित किया और किले का नाम शेरगढ़ रखा गया। तब किले के परिसर में और भी बहुत सी चीजों का निर्माण करवाया गया। पुराना किला और इसके आस-पास के परिसर में विकसित हुई जगहों को “दिल्ली का छठा शहर” भी कहा जाता है।

लाल किला
वैसे तो दिल्ली में घूमने के लिए कई सारी जगहें हैं, लेकिन लाल किले की बात ही कुछ और ही है। लाल पत्थर से बना दिल्ली का लाल किला पारसी, यूरोपीय और भारतीय स्थापत्य कला का मेल होने के कारण अपनेआप में अनूठा है। हर साल स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भारत के प्रधानमंत्री लाल किले पर झंडा फहराते हैं और देश को संबोधित करते हैं। शाहजहां ने 1638 में ये किला बनवाया था जिसे बनने में 10 साल का समय लगा था। ऐतिहासिक तौर पर महत्वपूर्ण लाल किला लाल रंग के बलुआ पत्थर से बने होने के कारण लाल किला कहलाया। इसमें मौजूद दीवान-ए-आम, दीवान-ए-खास, रंग महल, खास महल, हमाम, नौबतखाना, हीरा महल और शाही बुर्ज लाल किले की ऐतिहासिक और यादगार इमारतें हैं।

कुतुब मीनार
दिल्ली में मौजूद कुतुब मीनार दुनिया की सबसे बड़ी ईंटों की मीनार है. कुतुब मीनार अफ़गान वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। मोहाली की फ़तह बुर्ज के बाद कुतुब मीनार भारत की दूसरी सबसे बड़ी मीनार है। इसकी ऊँचाई 72.5 मीटर है। इसका व्यास इसकी 2.75 मी. की ऊंचाई से आधार तक आते-आते 14.32 मी. हो जाता है। इसकी मंजिलें कोण वाले तथा गोलाकार कंगूरों से सजाई गई हैं। प्राचीन काल से ही क़ुतुब मीनार का इतिहास चलता आ रहा है। दिल्ली के पहले मुस्लिम शासक कुतुबुद्दीन ऐबक ने इसका निर्माण 1193 में करवाया था।दिल्ली के अंतिम हिन्दू शासक की पराजय के तत्काल बाद कुतुबुद्धीन ऐबक द्वारा इसे 73 मीटर ऊंची विजय मीनार के रूप में निर्मित कराया गया।

कुतुब मीनार के आस-पास का परिसर कुतुब कॉम्पलेक्स से घिरा हुआ है, जो कि एक UNESCO वर्ल्ड हेरिटेज साईट भी है। कुतुब मीनार दिल्ली के महरौली में स्थापित है। इसके आसपास पुरातत्व संबंधी क्षेत्र में ऐतिहासिक भवन हैं, जिनमें शानदार अलाई-दरवाज़ा भारतीय-मुस्लिम कला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है इसका निर्माण 1311 में हुआ था। इसके अलावा कुव्वतुल-इस्लाम उत्तर भारत में सबसे प्राचीन मस्जिद है जिसके निर्माण के लिए 20 ब्राह्मण मंदिरों की सामग्री का फिर से इस्तेमाल किया गया था।

कुतुबमीनार का निर्माण विवादपूर्ण है कुछ मानते है कि इसे विजय की मीनार के रूप में भारत में मुस्लिम शासन की शुरूआत के रूप में देखा जाता है। कुछ मानते है कि इसका निर्माण अजान देने के लिए किया गया है।

बहरहाल इस बारे में लगभग सभी एकमत हैं कि यह मीनार भारत में ही नहीं बल्कि विश्व का बेहतरीन स्मारक है। दिल्ली के पहले मुस्लिम शासक कुतुबुद्धीन ऐबक ने 1200 ई. में इसका निर्माण कार्य शुरु कराया किन्तु वे केवल इसका आधार ही पूरा कर पाए थे। इनके उत्तराधिकारी अल्तमश ने इसकी तीन मंजिलें बनाई और 1368 में फिरोजशाह तुगलक ने पांचवीं और अंतिम मंजिल बनवाई थी।

ऐबक से तुगलक काल तक की वास्तुकला शैली का विकास इस मीनार में स्पष्ट झलकता है। प्रयोग की गई निर्माण सामग्री और अनुरक्षण सामग्री में भी विभेद है। 238 फीट ऊंची कुतुबमीनार का आधार 17 फीट और इसका शीर्ष 9 फीट का है । मीनार को शिलालेख से सजाया गया है और इसकी चार बालकनी हैं। जिसमें अलंकृत कोष्ठक बनाए गए हैं। कुतुब परिसर के खंडहरों में भी कुव्वत-ए-इस्‍लाम (इस्लाम का नूर) मस्जिद विश्व का एक भव्य मस्जिद मानी जाती है। कुतुबुद्धीन-ऐबक ने 1193 में इसका निर्माण शुरू कराया और 1197 में मस्जिद पूरी हो गई।

साल 1230 में अल्तमश ने और 1315 में अलाउद्दीन खिलजी ने इस भवन का विस्तार कराया। इस मस्जिद के आंतरिक और बाहरी प्रागंण स्तंभ श्रेणियों में है आंतरिक सुसज्जित लाटों के आसपास भव्य स्तम्भ स्थापित हैं। इसमें से अधिकतर लाट 27 हिन्दू मंदिरों के अवशेषों से बनाए गए हैं। मस्जिद के निर्माण हेतु इनकी लूटपाट की गई थी अतएव यह आचरण की बात नहीं है कि यह मस्जिद पारंपरिक रूप से हिन्दू स्थापत्य–अवशेषों का ही रूप है। मस्जिद के समीप दिल्ली का आश्चर्यचकित करने वाला पुरातन लौह-स्तंभ स्थित है।

फिरोज शाह कोटला किला
दिल्ली में फिरोजशाह कोटला किले का निर्माण मुगल शासक फिरोजशाह तुगलक ने 1354 में करवाया था। ये किला दिल्ली के सबसे पुराने स्मारकों में से एक है। फिरोजशाह कोटला किले का निर्माण तब हुआ जब मुगलों ने इस इलाके में पानी की कमी की वजह से अपनी राजधानी तुगलकाबाद से फिरोजाबाद ट्रांसफर करने का फैसला किया। पानी की कमी को हल करने के लिए किले का निर्माण यमुना नदी के पास किया गया था। किले के अंदर सुंदर बाग़, महलों, मस्जिदों और मदरसों का निर्माण किया गया था। राजधानी का ये शाही गढ़ तुगलक वंश के तीसरे शासक के शासनकाल के प्रतीक के रूप में जाना जाता है।

राष्ट्रपति भवन
राष्ट्रपति भवन एडविन लुटियंस द्वारा डिजाइन किया गया दिल्ली का एक प्रसिद्ध स्मारक है। 1911 में इस भवन का निर्माण शुरू हुआ और इसे पूरा होने में करीब 19 साल लग गए। आज़ादी से पहले राष्ट्रपति भवन में भारत के तत्कालीन वायसराय रहा करते थे और अब भारत के राष्ट्रपति रहते हैं। इस भवन के पश्चिमी हिस्से में मौजूद मुग़ल गार्डन काफी मशहूर है। मुग़ल गार्डन को हर साल बसंत में आम लोगों के लिए खोला जाता है।

जामा मस्जिद
पुरानी दिल्ली में स्थित एक महत्वपूर्ण मस्जिद है जामा मस्जिद। इसका निर्माण 1644 में शुरू हुआ और 1658 में ये मस्जिद बनकर तैयार हुयी। ये देश की सबसे बड़ी मस्जिदों में से एक है और शाहजहां द्वारा बनवायी गयी कई इमारतों में से आखिरी आलीशान इमारत भी है। लाल पत्थर और संगमरमर से बनी इस मस्जिद में तीन भव्य दरवाजे हैं।

लोटस टेम्पल
कमल के फूल जैसे अपने आकार के कारण बहाई मंदिर को लोटस टेम्पल भी कहा जाता है। लोटस टेम्पल ईरानी-कनाडाई वास्तुविज्ञ फ्यूरीबुर्ज सबा ने 1986 में डिजाइन किया था।

इसमें सफेद रंग की 27 पंखुड़ियां हैं। इनकी खूबसूरती इस मंदिर को दिल्ली के प्रमुख आकर्षणों में से एक बनाती हैं। इसका निर्माण 1987 में बहाई सम्प्रदाय के अनुयायियों द्वारा कराया गया था। यह मंदिर शुद्धता और सभी धर्मों की समानता का प्रतीक है। नेहरु प्लेस की पूर्व दिशा में स्थित कमल के फूल के आकार का ये मंदिर पूरे विश्व में बने सात बड़े मंदिरों में अंतिम बना मंदिर है। ये मंदिर हरे-भरे बागों के बीच स्थित है। यह मंदिर शुद्ध सफेद संगमरमर से निर्मित है। इसके शिल्पकार फ्यूरीबुर्ज सबा ने कमल को प्रतीक के रूप में चुना जो हिन्दू, बौद्ध, जैन और इस्लाम धर्म में समान है। प्रत्येक सम्प्रदाय के अनुयायी मंदिर में निःशुल्क प्रवेश कर सकते हैं और प्रार्थना अथवा ध्यान कर सकते हैं। यहां कमल की खिली हुई पंखुड़ियों के चारों ओर पानी के नौ तालाब है, जो प्राकृतिक प्रकाश में प्रकाशमान होते हैं। गोधूलि वेला में रोशनी में नहाया बहाई मंदिर शानदार दिखाई देता है।

राजघाट
राजघाट यमुना नदी के पश्चिमी किनारे पर स्थित एक पवित्र स्थान है जहाँ राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी का स्मारक है। यहाँ का माहौल बेहद शांतिपूर्ण हैं। इस स्मारक के पास मौजूद दो संग्रहालयों को महात्मा गाँधी को समर्पित किया गया है। काले संगमरमर का एक साधारण चौकोर पत्थर उस स्थान पर लगा है, जहां राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का अंतिम संस्कार किया गया था। स्मारक पर लिखे दो शब्द ‘हे राम’ महात्मा गाँधी द्वारा बोले गए आखिरी दो शब्द थे।

लोधी गार्डन
किसी दौर में ‘लेडी वेलिंगटन पार्क’ के नाम से जाना जाने वाला ये पार्क, बाद में लोधी गार्डन कहलाने लगा। इस गार्डन में मुबारक शाह, इब्राहिम लोधी और सिकंदर लोधी की मज़ारें हैं।

इंडिया गेट
राजपथ पर स्थित इंडिया गेट, प्रथम विश्व युद्ध और अफगान युद्ध में मारे गए भारतीय सैनिकों की याद में बनाया गया था। उन शहीदों के नाम इस इमारत पर खुदे हुए हैं।
इस गेट का डिजाइन एडविन लुटियंस ने बनाया था और 42 मीटर ऊँचे इस गेट को बनने में 10 साल लगे थे।

चांदनी चौक
दिल्ली के सबसे व्यस्त और पुराने बाज़ारों में से एक है चांदनी चौक, जो दिल्ली के किसी पर्यटन स्थल से कम महत्व का नहीं है।एशिया के इस सबसे बड़े थोक बाजार को शाहजहां ने बनवाया था और ये बाजार लाल किले से जामा मस्जिद तक पुराने शहर में फैला हुआ है।

दिल्ली हाट
इस पारम्परिक बाज़ार में खानपान, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक गतिविधियों का मिश्रण दिखाई देता हैं और जरुरत की सभी आधुनिक चीज़ें भी यहाँ मिलती हैं। भारतीय संस्कृति की एक अनूठी झलक इस बाजार में देखी जा सकती है।

लक्ष्मी नारायण मंदिर
बिरला मंदिर के नाम से प्रसिद्ध, उड़ीसा शैली में 1938 में निर्मित यह विशाल हिन्दू मंदिर प्रख्यात बिरला परिवार द्वारा बनवाया गया था। इस मंदिर में सभी धर्म के अनुयायी पूजा-अर्चना कर सकते हैं।

हुमायूं का मकबरा
1570 ई. में निर्मित ये मकबरा विशेष सांस्कृतिक महत्व वाला है क्योंकि यह भारतीय उपमहाद्वीप का पहला बागीचे वाला मकबरा था। इसने वास्तुकला के अनेक नवीन कार्यों को प्रेरणा दी, ये दिखने में ताजमहल के जैसा लगता है।

Hindi Shayari on winter season शिमला से आगे निकली दिल्ली

Hindi Shayari on winter season शिमला से आगे निकली दिल्ली

Hindi Shayari on winter season अबकी दिल्ली में वो ठंड पड़ी

सुनते आए हैं बचपन से शिमला में है ठंड बड़ी

शिमला पीछे छूटा अबकी दिल्ली में वो ठंड पड़ी


होगा शिमला हिल स्टेशन पड़ती भी होगी बर्फ़ वहां

चिल स्टेशन बन के दिल्ली ने कर दी सबकी खाट खड़ी


टेम्प्रेचर शिमला से घटा कड़ाका शिमला से ज्यादा

2 डिग्री के पारे से दिल्ली की रैंकिंग और बढ़ी


खाने को ठंडा होने में नहीं मिनट भी लगता है

ऑर्डर देकर मंगवा लो कहती है बीवी पड़ी-पड़ी


सर्दी में रूखेपन ने चेहरे की चमक उड़ा डाली

सूखी त्वचा, फटी एड़ी और उतरी होठों की पपड़ी


सुन्न हाथ और पैर सुन्न पानी करंट सा लगता है

अलार्म लगता दुश्मन घड़ी दिखाती आंखें घड़ी-घड़ी


मफलर टोपी पहन के निकले हम कोहरे से लड़ते हैं

ज़िद पे अड़ी हुई ये सर्दी होती जाती और कड़ी


सुनते आए हैं बचपन से शिमला में है ठंड बड़ी

शिमला पीछे छूटा अबकी दिल्ली में वो ठंड पड़ी

Sunte aye hain bachpan se shimla mein hai thand badi
Shimla pichhe chhoota abki dilli mein vo thand padi

Hoga shimla hill station padti bhi hogi barf vahan
Chill station banke dilli ne kar di sabki khaat khadi

Temperature shimla se ghata kadaka shimla se zyada
2 digree ke pare se dilli ki ranking aur badhi

Khane ko thanda hone mein nahin minute bhi lagata hai
Order dekar mangwa lo kehti hai biwi padi-padi

Sardi mein rukhepan ne chehre ki chamak uda daali
Sukhi tvchaa, fati edi aur utri hothon ki papdi

Sunn haath aur pair sunn pani current sa lgata hai
Alarm lagata dushman ghadi dikhati ankhen ghadi-ghadi

Muffler topi pehen ke nikle hum kohre se ladte hain
Zid pe adi hui ye sardi hoti jaati aur kadi

Sunte aye hain bachpan se shimla mein hai thand badi
Shimla pichhe chhoota abki dilli mein vo thand padi  

 

Funny Shayari पड़ रही ठंड नहाने की ज़रूरत क्या है Comedy Shayari 

Funny Shayari पड़ रही ठंड नहाने की ज़रूरत क्या है Comedy Shayari 

जल है जीवन तो बहाने की ज़रूरत क्या है

पड़ रही ठंड नहाने की ज़रूरत क्या है

गर्मा-गर्म पानी ही चेहरे के लिए काफी है

बेवजह सोप लगाने की ज़रूरत क्या है

दुनिया को इल्म है कि कंपकंपी क्या होती है

ना नहाने पे बहाने की ज़रूरत क्या है

राहे ड्राइक्लीन के बस तुम ही मुसाफिर तो नहीं

आपको नज़रें चुराने की ज़रूरत क्या है

जल है जीवन तो बहाने की ज़रूरत क्या है

पड़ रही ठंड नहाने की ज़रूरत क्या है

Jal hai jivan to bahane ki zarurat kya hai
Pad rahi thand nahane ki zarurat kya hai

Garma garm pani hi chehre ke liye kafi hai
Bevajah soap lgane ki zarurat kya hai

Duniya ko ilm hai ki kanpkanpi kya hoti hai
Na nahane pe bahane ki zarurat kya hai

Rahe dryclean ke bas tum hi musafir to nahin
Aapko nazren churane ki zarurat kya hai

Jal hai jivan to bahane ki zarurat kya hai
Pad rahi thand nahane ki zarurat kya hai

Funny Shayari पड़ रही ठंड नहाने की ज़रूरत क्या है Comedy Shayari 

Jaisalmer Tourism जैसलमेर Best Places to visit in Jaisalmer

Jaisalmer Tourism जैसलमेर Best Places to visit in Jaisalmer

Top Places to visit in Jaisalmer

Jaisalmer Travel Guide

Jaisalmer में घूमने के लिए बेस्ट जगह

जैसलमेर
किले और हवेलियों का शहर
Jaisalmer जैसलमेर पर्यटन के त्रिकोणीय सर्किट यानी गोल्डन ट्राएंगल का महत्वपूर्ण शहर है। राजस्थान आने वाला हर देशी और विदेशी पर्यटक अपने ट्रिप में जैसलमेर को शामिल करना नहीं भूलता। ‘धरती धोरां री’ गीत जैसलमेर के धोरों के लिए उपयुक्त नज़र आता है। थार मरूस्थल के बीच बसा जैसलमेर, अपनी पीले पत्थर की इमारतों और रेत के धोरों पर ऊँटों की कतारों के लिए विशेषकर विदेशी पर्यटकों के लिए सुनहरी याद बन जाता है। किलों का नगर – अगर आपकी रूचि भूविज्ञान में है तो जैसलमेर आपकी पहली पसंद होगा। जोधपुर से लगभग 15 कि.मी. दूर स्थित अक़क्ल वुड फॉसिल पार्क में आप 180 मिलियन वर्ष पूर्व थार रेगिस्तान की भूगर्भीय घटनाओं और परिवर्तनों को जान सकते हैं। ‘गोल्डन सिटी’ के नाम से लोकप्रिय जैसलमेर पाकिस्तान की सीमा और थार रेगिस्तान के निकट पश्चिमी राजस्थान और भारत के सीमा प्रहरी के रूप में कार्य करता है। शहर का सबसे प्रमुख आकर्षण है जैसलमेर का क़िला, जिसे सोनार किला (द गोल्डन फोर्ट) भी कहा जाता है। भारत के अधिकांश अन्य क़िलों से अलग जैसलमेर के क़िले मात्र पर्यटन आकर्षण ही नहीं हैं, इनके भीतर दुकानें, होटल और प्राचीन हवेलियाँ (घर) आज भी मौजूद हैं, जहाँ पीढ़ी दर पीढ़ी लोग रहते आ रहे हैं। जैसलमेर का इतिहास 12वीं शताब्दी पूर्व से मिलता है जैसलमेर का इतिहास। देवराज के रावल और सबसे बड़े वारिस रावल जैसल के एक छोटे सौतेले भाई को लोदुरवा का सिंहासन दे दिया गया था। अतः वे अपना राज्य स्थापित करने के लिए नया स्थान खोजने लगे। जब वे ऋषि ईसल के पास आए तब ऋषि ने उन्हें भगवान कृष्ण की उस भविष्यवाणी के बारे में बताया। जिसमें कहा गया था कि यदुवंश के वंशज इस स्थान पर एक नया राज्य बनाएंगे। 1156 में रावल जैसल ने यहां एक मिट्टी के क़िले का निर्माण करवाया, जिसका नाम जैसलमेर रखा और उन्होंने इसे अपनी राजधानी घोषित कर दिया। वक्त के थपेड़े खाने के बावजूद, यहाँ की कला, संस्कृति, क़िले, हवेलियाँ और सोने जैसी माटी, बार बार जैसलमेर आने के लिए आमंत्रित करती है। यहाँ की रेत के कण-कण में पिछले आठ सौ वर्षों के इतिहास की गाथाएं छिपी हुई हैं।

राजस्थान में हमेशा कुछ अनूठा देखने को मिलता है। जैसलमेर में आपको विस्मयकारी आकर्षण और अनूठे स्थल देखने को मिलेंगे।

जैसलमेर का क़िला
यह क़िला एक वर्ल्ड हैरिटेज साइट है। थार मरूस्थल के त्रिकुटा पर्वत पर खड़ा यह क़िला बहुत सी ऐतिहासिक लड़ाइयाँ देख चुका है। सूरज की रोशनी जब इस क़िले पर पड़ती है तो यह पीले बलुआ पत्थर से बना होने के कारण, सोने जैसा चमकता है। इसीलिए इसे सोनार क़िला या गोल्डन फोर्ट कहते हैं। अस्तांचल में जाता सूर्य भी अपने उजास से क़िले को रहस्यपूर्ण बना देता है। बेजोड़ शैली में निर्मित यह क़िला स्थानीय कारीगरों द्वारा शाही परिवार के लिए बनाया गया था। सोनार किला एक विश्व धरोहर स्थल है। महान फिल्मकार सत्यजीत रे की प्रसिद्ध फिल्म फेलुदा में सोनार क़िला (द गोल्डन फोर्ट) का विशेष उल्लेख है। इसके अलावा भी यहाँ बहुत सी फिल्मों की शूटिंग की गई है। इस क़िले के सामने, प्रतिवर्ष, राजस्थान पर्यटन विभाग द्वारा, फरवरी माह में डैजर्ट फैस्टिवल मनाया जाता है। इस उत्सव में ऊँट दौड़, ऊँट श्रृंगार, ऊँट सजावट, ऊँटनी का दूध निकालने की प्रतियोगिता, पगड़ी बाँधने की प्रतियोगिता तथा विभिन्न प्रकार के नृत्य व संगीत के कार्यक्रम होते हैं। इस उत्सव में हज़ारों की संख्या में देशी व विदेशी पर्यटक यहाँ आते हैं।

जैसलमेर सरकारी संग्रहालय
पुरातत्व और संग्रहालय विभाग द्वारा स्थापित यह संग्रहालय Jaisalmer जैसलमेर आने वाले पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण का केन्द्र है। सबसे मुख्य यहाँ प्रदर्शित राजस्थान के राज्य पक्षी गोडावण की ट्रॉफी है। यहाँ पर 7वीं और 9वीं शताब्दी ईस्वी की परम्परागत घरेलू वस्तुओं, रॉक-कट क्रॉकरी, आभूषण और प्रतिमाएं शहर के समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के अवशेष प्रदर्शित हैं।

नथमल जी की हवेली
दीवान मोहता नथमल, जो कि जैसलमेर राज्य में प्रधान मंत्री थे, उनके रहने के लिए यह हवेली बनाई गई थी। दो वास्तुकार भाइयों हाथी और लूलू ने इस हवेली की वास्तुकला में सहयोग किया। मेन गेट पर दो पत्थर के हाथी देखकर लगता है कि वो आपके स्वागत के लिए खड़े हैं। 19वीं शताब्दी में दो वास्तुकार भाईयों ने नथमल जी की हवेली का निर्माण किया। उन्होंने दो तरफ से हवेली पर काम किया और इसका परिणाम सम विभाजित संरचना के एक सुंदर रूप में सामने आया। मिनिएचर शैली के चित्रों और पीले बलुआ पत्थर पर नक्काशीदार हाथी सजावट के लिए प्रयोग किये गये हैं। इस हवेली का प्रारूप तथा नक्काशी अन्य सभी हवेलियों से अलग हैं।

सालिम सिंह की हवेली
Jaisalmer जैसलमेर रेलवे स्टेशन के नज़दीक, यह हवेली मोर के पंखों जैसी गोलाई लिए छज्जों और मेहराबों से सजी है। तीन सौ साल पुरानी यह हवेली, जैसलमेर के एक दुर्जेय प्रधानमंत्री सालिम सिंह का निवास थी। ये हवेली 18वीं शताब्दी के आरंभ में बनाई गयी थी और इसका एक हिस्सा अब भी इसके वंशजों के अधीन है। ऊंचे मेहराबदार छत में खाँचे बांटकर मोर के आकार से अलंकरण तैयार किये गये हैं। किंवदंती है कि वहाँ दो लकड़ी की मंजिलें और थीं जो इसे महाराजा के महल के समान ऊँचाई प्रदान करती थीं। लेकिन उन्होंने इसको ध्वस्त करने का आदेश दे दिया था। स्वर्ण आभूषणों जैसी इस हवेली को पर्यटक बड़े विस्मय से देखते हैं तथा इसकी ढेरों तस्वीरें लेते हैं।

पटवों की हवेली
इस हवेली के अन्दर पाँच हवेलियाँ हैं जो कि गुमान चंद पटवा ने अपने पाँच बेटों के लिए, 1805 ई. में बनवाई थी। इसे बनाने में 50 साल लग गए थे। जैसलमेर में सबसे बड़ी और सबसे ख़ूबसूरत नक्काशीदार हवेली, यह पांच मंज़िला संरचना एक संकरी गली में गर्व से खड़ी है। हालांकि हवेली अब अपनी उस भव्य महिमा को खो चुकी है, फिर भी कुछ चित्रकारी और काँच का काम अभी भी अंदर की दीवारों पर देखा जा सकता है। पर्यटक इस हवेली को देखने के लिए पैदल या रिक्शे में ही आ सकते हैं, क्योंकि यह पतली गली के अन्दर है।

मंदिर पैलेस
इसे ताज़िया टॉवर भी कहते हैं। बिल्कुल ताज़िए के शेप में यह महल, एक के ऊपर एक मंजिल के साथ खड़ा है। दो सौ साल तक यह महल, जैसलमेर के शासकों का निवास स्थान था। इसके बादल विलास नाम के हिस्से को शहर की सबसे ऊँची इमारत माना जाता है। बादल महल (क्लाउड पैलेस) की पांच मंजिली वास्तु संरचना को इसके पगोड़ा ताज़िया टॉवर द्वारा आगे बढ़ाया गया है। महल की प्रत्येक मंजिल में एक अद्भुत नक़काशीदार छज्जा है। बादल पैलेस मुस्लिम कारीगरों की कला कौशल का एक बेहतरीन नमूना है जिसमें ताज़िया के आकार में टॉवर को ढाला गया है। अब यह मंदिर पैलेस पर्यटकों के लिए, हैरिटेज होटल के रूप में संचालित किया जा रहा है, जहाँ रहकर पर्यटक स्वयं को महाराजा और महारानी महसूस करते हैं।

जैसलमेर के जैन मंदिर
Jaisalmer जैसलमेर में बने जैन मंदिरों में कला की दृष्टि से सर्वाधिक महत्वपूर्ण हैं लौद्रवा जैन मन्दिर। दूर से इसका भव्य शिख़र नजर आता है। इसमें लगे कल्प वृक्ष के बारे में मान्यता है कि इसे छूकर जो भी मन्नत मांगी जाती है वह पूरी हो जाती है। मंदिर के गर्भगृह में सहसफण पार्श्वनाथ की श्याम मूर्ति है जो कि कसौटी पत्थर से बनी हुई है। जैसलमेर के क़िले के अंदर स्थित जैन मंदिर 12वीं और 15वीं शताब्दियों तक के माने जाते हैं। जैसलमेर की अन्य सभी संरचनाओं की तरह, इन मंदिरों को भी पीले बलुआ पत्थर से बनाया गया है। प्रसिद्ध दिलवाड़ा शैली में बने इन मंदिरों को इनकी सुंदर वास्तुकला के लिए जाना जाता है। जैन समाज के अनुयायी जैसलमेर की यात्रा को तीर्थ यात्रा मानते हैं। यहाँ दुर्ग के अन्दर भी सात आठ जैन मंदिर है।

गड़ीसर झील
Jaisalmer जैसलमेर के पहले राजा रावल जैसल द्वारा यह झील 14वीं सदी में बनवाई थी। कुछ वर्षों बाद महाराजा गड़सीसर सिंह द्वारा इसे पुननिर्मित करवाया गया। जैसलमेर के दक्षिण की ओर यह झील तिलों की पोल क्षेत्र में बनी है। जो एक सुन्दर नक्काशीदार, पीले पत्थर के गेट के अन्दर जाकर नज़र आती है। इसके आसपास कई छोटे मंदिर और तीर्थस्थल, इस झील के आकर्षण को दोगुना कर देते हैं। यहाँ आकर देशी व विदेशी पर्यटकों के लिए मनोरंजन और आकर्षण बढ़ जाता है।

बड़ा बाग
यह एक विशाल पार्क है तथा यह भाटी राजाओं की स्मृतियों को समेटे हुए है। बड़ा बाग Jaisalmer जैसलमेर के उत्तर में 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जिसे बरबाग़ भी कहा जाता है। इस बगीचे में जैसलमेर राज्य के पूर्व महाराजाओं जैसे जय सिंह द्वितीय सहित, राजाओं की शाही छतरियां हैं। उद्यान का स्थान ऐसी जगह है कि यहां से पर्यटकों को सूर्यास्त का अद्भुत दृश्य भी देखने को मिलता है। जैसलमेर के महाराजा जयसिंह द्वितीय (1688-1743) ने एक बाँध बनवाया था, जिसके कारण जैसलमेर का काफी हिस्सा हरा भरा हो गया था। उनकी मृत्यु के बाद 1743 में उनके पुत्र लूणकरण ने अपने पिता की छतरी यहाँ बनवाई थी। उसके बाद अन्य राजाओं की मृत्यु के बाद उनकी भी छतरियाँ यहाँ बनाई गईं।


डेज़र्ट नेशनल पार्क
थार रेगिस्तान के विभिन्न वन्यजीवों का सबसे अच्छा पार्क है। पार्क में रेत के टीले, यत्र तत्र चट्टानों, नमक झीलों और अंतर मध्यवर्ती क्षेत्रों का गठन किया गया है। जानवरों की विभिन्न प्रजातियां जैसे काले हिरण, चिंकारा और रेगिस्तान में पाई जाने वाली लोमड़ी, ये सब पार्क में विचरण करते हैं। अत्यधिक लुप्तप्राय ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, जो दुनिया का सबसे बड़ी उड़ान भरने वाले पक्षियों में से एक है, उसे भी यहां देखा जा सकता है। सर्दियों में पार्क में विविध जीव जैसे हिमालयी और यूरेपियन ग्रिफोन वाल्टर्स, पूर्वी इंपीरियल ईगल और ’स्केलेर फॉल्कन’ पक्षी यहां विहार करते हैं। यह नैशनल पार्क जैसलमेर से 40 कि.मी. की दूरी पर है तथा पर्यटकों के देखने लायक़ हैं।

कुलधरा
पालीवाल ब्राह्मणों द्वारा इन गाँवों का निर्माण लगभग 13वीं शताब्दी में माना जाता है। इन गाँवों के खण्डहरों को देख कर लगता है कि इनकी बहुत ही बढ़िया वास्तुकला रही होगी। सुनसान जंगल के बीच, काफी बड़े क्षेत्र में फैले, खण्डहरों में आधी अधूरी दीवारें, दरवाज़े, खिड़कियाँ दिखाई देते हैं। मध्ययुगीन 84 गांव थे जिनको पालीवाल ब्राह्मणों ने रातों रात छोड़ दिया था। उनमें से दो सबसे प्रमुख कुलधरा और खावा, Jaisalmer जैसलमेर के दक्षिण पश्चिम से क्रमशः लगभग 18 और 30 किलोमीटर दूर स्थित है। कुलधरा और खावा के खंडहर उस युग की वास्तुकला के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। इनके बारे में अनेक किवदंतियां प्रचलित हैं। लेकिन इस सम्बन्ध में कोई भी सच ज्ञात नहीं है कि बड़े पैमाने पर पलायन क्यों हुआ। ग्रामीणों का मानना है कि यह जगह शापित है और आतंक के डर से यहां बसावट नहीं होती। वर्तमान में यह स्थान एक प्रमुख पर्यटन आकर्षण है। जैसलमेर घूमने आने वाले पर्यटक, इन गाँवों की कहानियाँ सुनकर, यहाँ देखने ज़रूर आते हैं।

तन्नोट माता मंदिर
भाटी राजपूत नरेश तणुराव ने वि.सं. 828 में तन्नोट माता का मंदिर बनवा कर, मूर्ति की स्थापना की थी। यहाँ आस पास के सभी गाँवों के लोग तथा विशेषकर, बीएसएफ के जवान यहां पूर्ण श्रृद्धा के साथ पूजा अर्चना करते हैं। जैसलमेर से क़रीब 120 किलोमीटर दूर तन्नोट माता मंदिर है। तन्नोट माता को देवी हिंगलाज़ का पुनर्जन्म माना जाता है। 1965 में भारत पाकिस्तान युद्ध के दौरान, तन्नोट में हुए भारी हमले और गोलाबारी की कई कहानियाँ है। हालांकि मंदिर में गोले या बमों में से कोई भी विस्फोट नहीं हुआ। इससे लोगों की आस्था को बल मिला युद्ध के बाद से इस मंदिर का पुनर्निर्माण व प्रबंधन सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ ट्रस्ट) द्वारा किया जाता है। तन्नोट माता का एक रूप हिंगलाज माता का माना जाता है, जो कि वर्तमान में बलूचिस्तान (पाकिस्तान) में स्थापित है।

रामदेवरा मंदिर
रूणीचा बाबा रामदेव और रामसा पीर का पुण्य स्थान है ’रामदेवरा मंदिर’। इन्हें सभी धर्मों के लोग पूजते हैं। रामदेव जी राजस्थान के एक लोक देवता हैं। इनकी छवि घोड़े पर सवार, एक राजा के समान दिखाई देती है। इन्हें हिन्दू-मुस्लिम एकता का प्रतीक माना जाता है। वैसे भी राजस्थान के जनमानस में पाँच पीरों की प्रतिष्ठा है, उनमें से एक रामसा पीर का विशेष स्थान है। पोकरण से 12 किलोमीटर की दूरी पर जोधपुर जैसलमेर मार्ग पर रामदेवरा मंदिर स्थित है। अधिकांश लोग यह मानते हैं कि यह मंदिर भगवान राम को समर्पित है, पर वास्तव में यह प्रसिद्ध संत बाबा रामदेव को समर्पित है। यह मंदिर बाबा रामदेव के अन्तिम विश्राम का स्थान का माना जाता है। सभी धर्मों के लोग यहां यात्रा के लिए आते हैं। यहां अगस्त और सितम्बर के बीच, ’रामदेवरा मेले’ के नाम से एक बड़ा लोकप्रिय मेला आयोजित किया जाता है। बड़ी संख्या में भक्त यहां आकर रात भार भक्तिपूर्ण गीत गाते हैं।

जैसलमेर वॉर म्यूज़ियम
यदि आपने आज खाना खाया तो आप किसान को धन्यवाद दीजिए और यदि शांति से खाना खाया तो सैनिक को धन्यवाद दीजिए। हमारी सेना और सुरक्षा बल अपना जीवन रोज़ाना मुश्किलें और परेशानियों झेलकर गुज़ारते हैं ताकि भारत के नागरिक चैन की नींद सो सकें। जैसलमेर के मिलिट्री बेस पर एक ऐसा म्यूज़ियम बनाया गया है, जहाँ हम आदर के साथ उन सैनिकों को धन्यवाद देते हुए उन्हें सम्मान दे सकें। इस म्यूजियम में उन सैनिकों के द्वारा दिए गए बलिदान और उनके शौर्य को दर्शाने हेतु इस म्यूजियम को बड़े सलीक़े से सजाया गया है। यहाँ प्रदर्शित प्रत्येक वस्तु उन सैनिकों के बलिदान को मूर्तरूप से उजागर करती है, जिन्होंने सन् 1965 के भारत-पाक युद्ध तथा सन् 1971 में हुए लॉन्गेवाला युद्ध के दौरान अपना जीवन क़ुर्बान किया था।

इस म्यूज़ियम के दर्शन करने से आपको भारतीय सेना द्वारा अधिग्रहीत टैंक तथा युद्ध में काम आए अन्य साज़ो-सामान देखने को मिलेगा, जो आपको गौरवान्वित कर देगा। यहाँ एक ऑडियो – विज़ुअल कक्ष भी है, जिसमें आपको युद्ध सम्बन्धी फिल्में दिखाई जाती हैं। लॉन्गेवाला युद्ध में महत्वपूर्ण रूप से भागीदारी निभाने वाले मेज़र कुलदीप सिंह चंदपुरी का इन्टरव्यू भी आप यहाँ देख सकते हैं। जिसमें दिखाया गया है कि किस प्रकार हमारे सैनिकों ने किस बहादुरी के साथ लॉन्गेवाला युद्ध लड़ा था। इस म्यूज़ियम में बहुत सी वॉर ट्रॉफीज़, पुराने उपकरण, टैंक, बन्दूकें, लड़ाकू गाड़ियाँ तथा हथियार प्रदर्शित किए गए हैं। एयर-फोर्स द्वारा उपहार स्वरूप दिया गया ‘हन्टर-एयरक्राफ्ट’ जो कि लॉन्गेवाला युद्ध के दौरान सन् 1971 के भारत-पाक युद्ध में काम में लिया गया था, भी यहाँ देखा जा सकता है। हमारे देश के महत्वपूर्ण युद्ध इतिहास को संजोए हुए यह म्यूज़ियम जैसलमेर-जोधपुर हाइवे पर स्थित है तथा इसमें फ्री-एन्ट्री, निःशुल्क प्रवेश है, यानि इसे देखने का कोई टिकिट/चार्ज नहीं लगता।

लॉन्गेवाला वॉर मेमोरियल
पश्चिमी क्षेत्र में सन् 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान, लॉन्गेवाला का युद्ध सबसे बड़ा साहसिक कार्य था तथा यह अजेय-बाधाओं को पार करते हुए, हिम्मत और बहादुरी से की गई जंग की प्रेरणादायी कहानी है। यह इतिहास 4 दिसम्बर 1971 को बनाया गया ’बहादुरी और शौर्य’ का वह उदाहरण है, जब भारतीय सैनिकों ने पाक के लगभग 2000 सैनिकों और 60 टैंकों को खदेड़ दिया था। लॉन्गेवाला में हमारे डैज़र्ट कॉर्प्स ने यह लॉन्गेवाला वॉर मेमोरियल अपनी उस जीत का जश्न मनाने के लिए बनाया, जिसमें उन्होंने अपने दृढ़ संकल्प से पाक की फौजों का भारतीय सीमा के अन्दर घुसने का प्रयास विफल कर दिया था। आप जब इस म्यूज़ियम को देखेंगे तो आप हमारे बहादुर जवानों की वीरता, शौर्य और पराक्रम के उदाहरण देखकर गौरवान्वित महसूस करेंगे।

अमर सागर लेक
Jaisalmer जैसलमेर के पश्चिमी क्षेत्र में लगभग 7 कि.मी. दूरी पर अमर सागर लेक स्थित है जो कि अमर सिंह पैलेस के पास ही है। 17वीं शताब्दी में बनवाया गया यह महल झील पत्थर के नक्काशीदार जानवरों के मुखौटो से घिरा है, जिन्हें शाही परिवार का संरक्षक माना जाता है। यह शाही महल राजा महारावल अखाई सिंह द्वारा अमर सिंह के सम्मान में बनवाया गया था। इस महल में मंडप हैं जहाँ से सीढ़ियां अमर सागर झील की तरफ जाती हैं। पर्यटक इस पाँच मंज़िला इमारत की दीवारों पर आकर्षक भित्ति चित्र देख सकते हैं। इसके परिसर में कई तालाब, कुंए और मंदिर हैं। बड़े ही शांत और सौम्य वातावरण वाले अमर सागर से, आप जैसलमेर का सबसे ख़ूबसूरत सूर्यास्त का नज़ारा भी देख सकते हैं।

Jaisalmer जैसलमेर से निकटतम हवाई अड्डा जोधपुर हवाई अड्डा है जो 284 किलोमीटर दूर है। जैसलमेर बस और टैक्सी द्वारा जोधपुर बीकानेर और जयपुर से जुड़ा हुआ है। जैसलमेर और दिल्ली के बीच एक सीधी ट्रेन सेवा है।

Jaipur Tourism जयपुर Best Places to visit in Jaipur

Places to visit in Jaipur

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Top Places to visit in Jaipur

Jaipur Travel Guide

जयपुर में घूमने के लिए बेस्ट जगह

Jaipur जयपुर
गुलाबी शहर
Jaipur जयपुर की स्थापना सन् 1727 में की गई थी। आमेर के राजा जयसिंह द्वितीय द्वारा इस शहर का निर्माण करवाया गया। बढ़ती आबादी और पानी की कमी के कारण उन्होंने अपनी राजधानी को आमेर से इस नए शहर जयपुर में स्थानान्तरित कर दिया। इस शहर की बसावट तथा वास्तु, प्रसिद्ध वास्तुकार विद्याधर भट्टाचार्य के सिद्धान्तों के अनुरूप की गई। 1876 में जयपुर के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया जब प्रिंस ऑफ वेल्स ने भारत का दौरा किया। उनके स्वागत के लिए, तत्कालीन महाराजा रामसिंह ने पूरे शहर को गुलाबी (हिर्मिची) रंग में रंगवाया। आमेर, नाहरगढ़ और जयगढ़ के किले तथा गुलाबी नगर जयपुर स्वागत के लिए तैयार हो गया। सारी दुनिया में अपनी तरह का पहला नियोजित शहर बना जयपुर। अपने रंग-बिरंगे रत्नों और आभूषणों के लिए प्रसिद्ध, राजस्थान की राजधानी अपने वैभवपूर्ण इतिहास के साथ, सबसे बड़ी पर्यटन नगरी बन गया है। पारंपरिक तथा आधुनिकता का सम्मिश्रण, इस शहर की संस्कृति को अभूतपूर्व बनाता है। Jaipur जयपुर शहर टूरिज़्म के गोल्डन-ट्राएंगल यानी दिल्ली-आगरा-जयपुर का एक हिस्सा है।

आमेर महल Best Places to visit in Jaipur
Jaipur जयपुर से 11 कि.मी. की दूरी पर पुरानी राजधानी आमेर, अपने किले और स्थापत्य के लिए, पर्यटकों का मुख्य आकर्षण है। यूनेस्को की ‘विश्व धरोहर’ सूची में शामिल, पूर्व में कच्छवाहा राजपूतों की राजधानी आमेर महल, ऊँची पहाड़ी पर स्थित है। यह हिन्दू व मुगल शैली का सुन्दर मिश्रण है। आमेर का महल सन् 1592 में राजा मानसिंह प्रथम ने दुश्मनों से मुकाबला और बचाव करने के लिए बनवाया था। आमेर महल का आंतरिक भाग, लाल बलुआ पत्थर तथा संगमरमर से बनाया गया तथा इसमें नक्काशी का कार्य बहुमूल्य पत्थरों की जड़ाई, मीनाकारी का काम, पच्चीकारी काम, जगह-जगह लगे बड़े बड़े दर्पण, इसकी भव्यता को चार चाँद लगाते हैं। मावठा झील में आमेर किले व महल का प्रतिबिम्ब और इसके नीचे की तरफ बनी ’केसर क्यारी’ को देखकर पर्यटक आनन्दित होते हैं। महल का अतीत सात सदी पुराना है।

सिटी पैलेस Best Places to visit in Jaipur
महाराजा जयसिंह द्वितीय ने सिटी पैलेस की संचरनाओं के निर्माण के साथ साथ, इसकी भव्यता को भी बढ़ाया। परकोटे वाले शहर के बीच स्थित, सिटी पैलेस कॉम्प्लैक्स की कल्पना और निर्माण करवाने का श्रेय, जयपुर के संस्थापक महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय को जाता है। मुगल व राजपूत शैली का सम्मिश्रण इस महल को अद्वितीय बनाता है। इसमें मुबारक महल, महारानी का महल तथा कई अन्य छोटे महल, चौक और चौबारे हैं। मुबारक महल में अब महाराजा सवाई मानसिंह द्वितीय संग्रहालय बना दिया गया है, जिसमें शाही पोशाकें, अद्भुत पश्मीना शॉल, बनारसी साड़ियाँ, रेशमी वस्त्र, जयपुर के सांगानेर प्रिंटेड कपड़े और अन्य बहुमूल्य रत्न जड़ित कपड़े रखे हुए हैं। महाराजा सवाई माधोसिंह प्रथम तथा महारानियों के वस्त्रों का संग्रह भी यहाँ देख सकते हैं। महारानी पैलेस में सुसज्जित अस्त्र शस्त्र, कवच, ज़िरह-बख्तर आदि रखे हैं। महल की छत सुन्दर पेन्टिंग से सजाई गई है।

जंतर – मंतर Best Places to visit in Jaipur
Jaipur जयपुर के संस्थापक महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय द्वारा बनवाई गई पाँच खगोलीय वेधशालाओं में सबसे विशाल है, जयपुर की यह वेधशाला। इसे जंतर मंतर कहते हैं। यूनेस्को द्वारा इसे विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया है। इसमें बनाए गए जटिल यंत्र, समय को मापने, सूर्य की गति व कक्षाओं का निरीक्षण तथा आकाशीय पिंडों के सम्बन्ध में विस्तारपूर्वक जानकारी देते हैं। पर्यटकों को वेधशाला के सम्बन्ध में बताने के लिए यहाँ विशेषज्ञ मौजूद हैं।

हवा महल Best Places to visit in Jaipur
बाहर की तरफ से भगवान कृष्ण के मुकुट जैसा दिखाई देने वाला यह महल अनूठा है। सन् 1799 ई. में महाराजा सवाई प्रताप सिंह द्वारा बनवाया गया यह महल पाँच मंजिला है तथा इसका डिज़ाइन वास्तुकार लालचंद उस्ता द्वारा तैयार किया गया था। गुलाबी शहर का द्योतक हवा महल, बलुआ पत्थर से राजस्थानी वास्तुकला और मुगल शैली का मिश्रण है। इसकी दीवारें सिर्फ डेढ़ फुट चौड़ी हैं तथा 953 बेहद सुन्दर आकर्षक छोटे छोटे कई आकार के झरोखे हैं। इसे बनाने का मूल उद्देश्य था कि शहर में होने वाले मेले-त्यौहार तथा जुलूस को महारानियाँ इस महल के अन्दर बैठकर देख सकें। हवा महल गर्मी के मौसम में भी इन झरोखों के कारण वातानुकूलित रहता है। इसके आंगन में पीछे की तरफ एक संग्रहालय भी है।

अल्बर्ट हॉल (सेंट्रल म्यूजियम) Best Places to visit in Jaipur
अल्बर्ट हॉल की आधारशिला सन् 1876 ई. में प्रिंस ऑफ वेल्स ने रखी थी। लंदन के अल्बर्ट संग्रहालय के नाम पर इसका नाम अल्बर्ट हॉल रखा गया था। इसका डिज़ाइन सर स्विन्टन जैकब ने बनवाया था तथा इंडो-सार्सेनिक स्थापत्य शैली के आधार पर इसका निर्माण करवाया गया। रामनिवास बाग के बीच में यह अल्बर्ट हॉल की अभूतपूर्व और मनमोहक इमारत, हर मौसम में पर्यटकों को आकर्षित करती है। इसमें जयपुर कला विद्यालय, कोटा, बूंदी, किशनगढ़ और उदयपुर शैली के लघु चित्रों का बड़ा संग्रह है। धातु की वस्तुएं, लकड़ी के शिल्प, कालीन, मूर्तियाँ, हथियार, बहुमूल्य पत्थर, हाथी दांत का सामान – सभी कुछ दर्शनीय हैं।

नाहरगढ़ क़िला Best Places to visit in Jaipur
अंधेरी रात में, तारों की छाँव में, नाहरगढ़ किले से Jaipur जयपुर शहर का विहंगम, अभूतपूर्व, अद्भुत और मदमस्त नजारा, सारी दुनियां में और कहीं नहीं मिलेगा। शहर की रौशनी को देखकर लगता है, तारे जमीन पर उतर आए हैं। सन् 1734 ई. में महाराजा जयसिंह के शासनकाल के दौरान इस किले का निर्माण किया गया, जो कि शहर का पहरेदार मालूम होता है। नाहरगढ़ यानी शेर का किला। इस किले में बनाए गए माधवेन्द्र भवन को ग्रीष्म काल में महाराजा के निवास के रूप में काम में लिया जाता था। रानियों के लिए आरामदेय बैठक तथा राजा के कक्षों का समूह, आलीशान दरवाजों, खिड़कियों और भित्तिचित्रों से सजाया गया, नाहरगढ़ अतीत की यादों को समेटे शान से खड़ा है। अभी हाल ही में महल में एक स्कल्पचर आर्ट गैलरी भी बनवाई गई है।

जयगढ़ फोर्ट Best Places to visit in Jaipur
सन् 1726 में, महाराजा जयसिंह द्वितीय द्वारा यह किला आमेर की सुरक्षा के लिए बनवाया गया था। इसमें बने शस्त्रागार, अनूठा शस्त्र संग्रहालय, तोपें बनाने का कारखाना तथा विश्व की सबसे बड़ी तोप जयवाण के कारण राजस्थान में आने वाला प्रत्येक पर्यटक जयपुर आकर इस तोप को जरूर देखना चाहता है।इस तोप को एक बार चलाया गया था जिससे शहर से 35 कि.मी. दूर एक तालाब का गड्ढा बन गया था। इसकी लम्बाई 31 फीट 3 इंच है तथा वजन 50 टन है। इसके 8 मीटर लंबे बैरल में 100 किलो गन पाउडर भरा जाता था।

बिड़ला मंदिर Best Places to visit in Jaipur
लक्ष्मी नारायण मंदिर, जो कि बिड़ला मंदिर नाम से अधिक लोकप्रिय है, मोती डूंगरी की तलहटी में स्थित है। ऊँचे भूभाग पर अपेक्षाकृत आधुनिक रूप से निर्मित यह मंदिर पूरी तरह से श्वेत संगमरमर का बना है। मंदिर को 1988 में प्रसिद्ध भारतीय उद्योगपति बिड़ला द्वारा बनवाया गया था। यह मंदिर भगवान विष्णु, जिन्हें नारायण भी कहते हैं, को समर्पित है। उनके साथ ही धन और सौभाग्य की देवी लक्ष्मी है। यह मंदिर कला की एक नायाब रचना है। कई पौराणिक विषयों को शामिल करती अति सुंदर नक्काशी और मूर्तियां भी यहाँ शामिल हैं। रात में इस पर की गई रौशनी बेहद आकर्षक लगती है। मुख्य मंदिर के अतिरिक्त एक संग्रहालय है जो बिड़ला परिवार के पूर्वजों की यादगार को दर्शाता है।

सिसोदिया रानी महल और बाग़ Best Places to visit in Jaipur
Jaipur जयपुर से 8 किलोमीटर की दूरी पर आगरा रोड पर स्थित सिसोदिया रानी महल और बाग़ मुगल शैली से सजा – संवरा है।राधा और कृष्ण की लीलाओं के साथ चित्रित इस बहु-स्तरीय उद्यान में फव्वारे, पानी के झरने और चित्रित मंडप हैं। महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने इसे अपनी सिसोदिया रानी के लिए बनाया था।

जल महल Best Places to visit in Jaipur
मानसागर झील के बीच में बना अद्भुत जलमहल, पानी पर तैरता प्रतीत होता है। इसकी पाल (किनारे) पर रोजाना स्थानीय तथा विदेशी पर्यटक मनमोहक नजारा देखने आते हैं। रात के समय जलमहल रंग बिरंगी रौशनी में परी लोक सा लगता है। महाराजा जयसिंह द्वितीय द्वारा 18वीं सदी में बनवाया गया, रोमांटिक महल के नाम से भी जाना जाता है। राजा अपनी रानी के साथ इस महल में खास वक्त बिताने आते थे तथा राजसी उत्सव भी यहाँ मनाए जाते थे। इसके चारों कोनों पर बुर्जियां व छतरियां बनी हैं। बीच में बारादरी, संगमरमर के स्तम्भों पर आधारित है।

सैन्ट्रल पार्क Best Places to visit in Jaipur
सैन्ट्रल पार्क Jaipur जयपुर के केन्द्र में स्थित बड़ा हरा-भरा क्षेत्र है, जो शहर के निवासियों को राहत के पलों के लिए एक स्थान प्रदान करता है। जयपुर विकास प्राधिकरण द्वारा निर्मित यह Jaipur जयपुर का सबसे बड़ा पार्क है। यहाँ सुकून देते उद्यान, पोलो ग्राउण्ड और एक गोल्फ क्लब भी है। पार्क का मुख्य आकर्षण भारत का पहला सबसे ऊँचा राष्ट्रीय ध्वज है।

हैंड प्रिंटिंग का संग्रहालय “अनोखी” Best Places to visit in Jaipur
आमेर की ओर जाती सीढ़ी वाली सड़क से केवल दस मिनट की पैदल दूरी पर ही हैंड प्रिंटिंग के लिए विख्यात अनोखी संग्रहालय है। एक भव्य पुनर्स्थापित हवेली में स्थित ये संग्रहालय चित्र, उपकरण और संबंधित वस्तुओं के साथ विभिन्न चयनित ब्लॉक-मुद्रित वस्त्रों को प्रदर्शित करता है। जटिल प्राचीन परंपरा का गहराई से अवलोकन करने के लिए सभी इस स्थान को चुनते हैं।

गोविन्द देव जी मंदिर Best Places to visit in Jaipur
श्री गोविन्द देव जी की आकर्षक प्रतिमा सवाई जयसिंह वृन्दावन से जयपुर लाए थे। जो यहाँ पूरे सम्मान से शहर के परकोटे में स्थित श्री गोविन्द देव जी मंदिर में स्थापित की गई। शाही परिवार और स्थानीय लोगों द्वारा पूजनीय गोविन्द देवजी में सात झांकियों के माध्यम से दर्शन की समुचित व्यवस्था है।

मोतीडूंगरी गणेश मंदिर Best Places to visit in Jaipur
Jaipur जयपुर वासियों के लिए बुधवार को गणेश मंदिर जाना एक आदत बन गई है। जब तक यहाँ पूजा न की जाए उनका दिन सफल नहीं होता। 18वीं सदी में सेठ जयराम पालीवाल द्वारा इसका निर्माण शुरू किया गया था। हिन्दू धर्म के प्रथम पूज्य गणेश जी के मंदिर में लोग, कोई भी शुभ काम शुरू करने से पहले आशीर्वाद लेने आते हैं। इस मंदिर के पास ही पहाड़ी पर मोती डूंगरी महल स्थित है, जो कि एक स्कॉटिश महल का प्रतिरूप है। यहाँ महाराजा सवाई मानसिंह अपने परिवार के साथ रहा करते थे।

दिगम्बर जैन मंदिर Best Places to visit in Jaipur
Jaipur जयपुर का प्राचीन दिगम्बर जैन मंदिर शहर से 14 किमी दूर सांगानेर में स्थित है। संघीजी मंदिर में प्रमुख विग्रह भगवान आदिनाथ पद्मासन (कमल स्थिति) मुद्रा में है। यह आकर्षक नक्काशियों से बना लाल पत्थर का मंदिर है। सात मंजिला मंदिर में आसमान छूते शिखर हैं।

गलता जी Best Places to visit in Jaipur
गलता जी Jaipur जयपुर का एक प्राचीन तीर्थ स्थान है। यह गालव ऋषि की तपोस्थली है। गलता जी स्थित कुंड में स्नान का धार्मिक महत्व है। तीर्थ यात्री यहाँ पवित्र स्नान हेतु आते हैं। इस आकर्षक जगह में मंदिर, मंडप और पवित्र कुंड (प्राकृतिक झरने और पानी के कुण्ड) हैं। गलता जी आने के लिए आगंतुक पहले रामगोपाल जी मंदिर परिसर में आते हैं, जिसे स्थानीय रूप में ’बंदर मंदिर’ (गलवार बाग) कहा जाता है। इसे ये नाम यहां के निवासी ’बंदरों के एक बड़े समूह’ की वजह से मिला। हरियाली का खूबसूरत नजारा और उछलते कूदते बंदर क्षेत्र के खुशनुमा माहौल में इजाफा करते हैं। पहाड़ी की चोटी पर सूर्य देव को समर्पित एक छोटा मंदिर है, जिसे ’सूर्य मंदिर’ कहा जाता है। दीवान कृपाराम द्वारा निर्मित ये मंदिर शहर के लोगों के लिए पूजनीय है।

स्टेच्यू सर्किल Best Places to visit in Jaipur
Jaipur जयपुर के संस्थापक सवाई जयसिंह द्वितीय की एक विशाल आकार की श्वेत संगमरमर की मूर्ति सी-स्कीम क्षेत्र में एक सर्कल के बीच में स्थित है। उनके सम्मान में खड़ी हुई ये प्रतिमा जयपुर के संस्थापक को विनम्र श्रृद्धांजलि देती है। इसके चारों तरफ सुन्दर पार्क विकसित किया गया है।

रामनिवास बाग Best Places to visit in Jaipur
यह ऐतिहासिक उद्यान महाराजा सवाई रामसिंह द्वारा 1868 में बनवाया गया था। शहर के केन्द्र में स्थित इस बगीचे में अल्बर्ट हॉल संग्रहालय (अब केन्द्रीय संग्रहालय के रूप में जाना जाता है), जन्तुआलय, चिड़ियाघर, रवीन्द्र रंगमंच (थियेटर) एक आर्ट गैलेरी और एक प्रदर्शनी मैदान है।

जूलॉजिकल पार्क Best Places to visit in Jaipur
जूलॉजिकल पार्क या Jaipur जयपुर चिड़ियाघर की स्थापना सन् 1868 में सवाई राजा प्रतापसिंह ने की थी। यह पार्क राम निवास बाग में स्थित है और प्रसिद्ध अल्बर्ट हॉल से पैदल तय की जाने वाली दूरी है।

कनक वृन्दावन Best Places to visit in Jaipur
नाहरगढ़ पहाड़ियों की तलहटी में आमेर के रास्ते पर स्थित कनक वृंदावन पिकनिक स्थल के रूप में स्थानीय लोगों के बीच लोकप्रिय है। सुंदर परिदृश्य वाले बगीचे में एक बेहद आकर्षक नक्काशीदार मंदिर है, जिसे फिल्म शूट के लिए एक ड्रीम लोकेशन भी जाना जाता है।

ईसरलाट (सरगासूली) Best Places to visit in Jaipur
शहर के बीचों बीच 60 फीट ऊँची भव्य मीनार ’ईसरलाट’ को स्वर्ग भेदी मीनार या ‘सरगासूली’ भी कहते हैं। राजा ईश्वरी सिंह ने 1749 ई. में इस मीनार को एक शानदार जीत की स्मृति में बनवाया था। त्रिपोलिया गेट के निकट स्थित इस मीनार में अन्दर की तरफ ऊपर तक जाने के लिए सीढ़ियां बनी हैं, जिनसे चढ़कर ऊपर से Jaipur जयपुर का विहंगम दृश्य दिखाई देता है।

अमर जवान ज्योति Best Places to visit in Jaipur
अमर जवान ज्योति या अमर सैनिकों की लौ राजस्थान के शहीदों को समर्पित एक स्मारक है। अमर जवान ज्योति Jaipur जयपुर में नए विधानसभा भवन के पास स्थित है। अमर जवान ज्योति राजस्थान के सैनिकों के गर्व और गौरव का प्रतीक है। इसके चारों कोनों में ज्योति प्रज्जवलित हैं। शाम के समय अमर जवान ज्योति रंगों की आकर्षक छटा बिखेरती है। शाम की रौशनी से बढ़ी इसकी सुरम्यता, इसे पर्यटकों की एक पंसदीदा जगह बनाती है।

महारानी की छतरी Best Places to visit in Jaipur
शहर से आमेर के रास्ते में महारानी की छतरी, शाही परिवार की महिलाओं का अंतिम संस्कार का स्थल है। नक्काशीदार छतरियों की संरचना, संगमरमर पत्थर से की गई है। तथा राजपूत शैली की वास्तुकला के गुम्बद बनाए गए हैं। एक धारणा के अनुसार यह माना जाता था कि अगर रानी की मृत्यु अपने राजा के जीवित रहते तक हो गई तो इस छतरी की छत को पूरा बनाया जाएगा वरना यह छत अधूरी बनाई जाती थी।

नाहरगढ़ जैविक उद्यान Best Places to visit in Jaipur
Jaipur जयपुर दिल्ली राजमार्ग पर जयपुर से लगभग 12 कि.मी. दूर स्थित नाहरगढ़ जैविक उद्यान, नाहरगढ़ अभ्यारण्य का एक हिस्सा है। यह अरावली रेंज के अन्तर्गत 720 हैक्टेयर का एक बड़ा क्षेत्र है। उद्यान अपने विशाल वनस्पतियों और जीवों के लिए प्रसिद्ध है और उसका मुख्य उद्देश्य इनका संरक्षण करना है। यह लोगों को उपयोगी जानकारी देने और मौजूदा वनस्पतियों और जीवों पर शोध करने के लिए एक उपयुक्त जगह है। नाहरगढ़ जैविक उद्यान में पक्षी विज्ञानी 285 से अधिक प्रजातियों के पक्षियों को देखने की उम्मीद कर सकते हैं, जिनमें से सबसे लोकप्रिय श्वेत गर्दन वाली फुदकी है। उद्यान की सैर करते हुए रामसागर के समीप जाएं, विभिन्न प्रकार के पक्षियों को देखने के लिए एक शानदार जगह है। नाहरगढ़ जंतु उद्यान बेहद शानदार स्थल है और एशियाई मोर, बंगाल टाइगर, लॉयन एवम् पैंथर, लक्कड़बग्घे, भेड़िये, हिरण, मगरमच्छ, भालू, हिमालयी काले भालू, जंगली सूअर आदि जानवरों का घर है।

जयपुर वैक्स म्यूजियम Best Places to visit in Jaipur
नाहरगढ़ किले के दायरे में अरावली की तलहटी में, Jaipur जयपुर वैक्स संग्रहालय है, जिसकी यात्रा आपको विस्मय से भर देगी। यह संग्रहालय एंटरटेनमेंट 7 वेन्चर्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा विकसित किया गया है। 30 प्रसिद्ध व्यक्तियों की मोम प्रतिमाओं को संग्रहालय में रखा गया है। मोम संग्रहालय में अमिताभ बच्चन, महात्मा गांधी, भगत सिंह, रवीन्द्र नाथ टैगोर, अल्बर्ट आइंस्टीन, माइकल जैक्सन, सवाई जयसिंह द्वितीय, महारानी गायत्री देवी और भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय नेतृत्व के कई प्रमुख व्यक्तियों की मोम प्रतिमाओं का संग्रह है। सरल सजावट वाली जीवंत प्रतिकृतियां दिलकश अनुभव प्रदान करती हैं। संग्रहालय में 10 फुट लंबी बुलेट, गति-गामिनी, प्रसिद्ध पर्यटन मोटर बाइक भी प्रदर्शित है।

जवाहर कला केन्द्र Best Places to visit in Jaipur
जवाहर कला केन्द्र जो कि जेकेके के नाम से लोकप्रिय है, एक अंतर्राष्ट्रीय संस्था है। जो भारतीय संस्कृति और कला की विभिन्न शैलियों के संरक्षण और प्रचार का काम करती है। 1993 में जयपुर में स्थापित जवाहर कला केन्द्र, शहर में एक बहुत लोकप्रिय सांस्कृतिक गंतव्य है। जेकेके कलाकारों, कारीगरों ,विद्वानों, कला प्रेमियों और आगन्तुकों को आपसी चर्चा का वातावरण प्रदान करता है। केन्द्र कला प्रदर्शनियों, थिएटर शो,नृत्य और संगीत से सम्बन्धित पठन और कार्यशालाओं जैसी कई गतिविधियों के माध्यम से लोगों को राजस्थानी और भारतीय संस्कृति के आंतरिक पहलुओं को देखने में मदद करता है। जेकेके भारतीय खगोल विज्ञान की नवग्रह संकल्पना पर बनाया गया है। छह प्रदर्शनी दीर्घाओं, छात्रावासों, सभागारों और एक खुले हुए थिएटर के साथ जेकेके के पास अपना शिल्पग्राम कॉम्पलेक्स भी है। जिसमें राज्य के ग्रामीण पहलू का प्रतिनिधित्व करती छः झोपड़ियाँ और हाट बाजारों, त्यौहारों और मेलों के लिए स्थल है। यहाँ इंडियन कॉफी हाउस भी है जो स्थानीय लोगों और दर्शकों के बीच बहुत लोकप्रिय है।

राजमंदिर Best Places to visit in Jaipur
Jaipur जयपुर के प्रसिद्ध स्थलों में से एक राज मंदिर एक सिनेमा थियेटर है। इस सिनेमा हॉल का गुलाबी शहर में एक विशेष स्थान है। इस सिनेमा हॉल में हिन्दी फिल्म देखना अद्भुत अनुभव है और अपनी सीट अग्रिम में बुकिंग करवाना एक अच्छा विचार है। 1976 में स्थापित इस थिएटर का खास बाहरी डिजाइन थियेटर को अलग सा दिखने में मदद करता है। थिएटर के अन्दर की अतिरंजित छत भव्य मंडल और लॉबी के बगल में बढ़ती घुमावदार विषाल सीढ़ियां, अनुपम आकर्षण प्रदान करते हैं। एमआई रोड पर स्थित राज मंदिर को देखे बिना जयपुर यात्रा पूरी नहीं मानी जा सकती।

सांभर झील Best Places to visit in Jaipur
Jaipur जयपुर से सिर्फ 70 किलोमीटर दूर यह देश की सबसे बड़ी खारे पानी की झील है। पर्यटन की दृष्टि से भी अत्यन्त आकर्षक स्थल है। शाकम्भरी माता मंदिर, देवयानी कुंड, शर्मिष्ठा सरोवर, नमक संग्रहालय, सर्किट हाउस, आदि भी महत्वपूर्ण दर्शनीय स्थल हैं। रास्ते में धार्मिक स्थल नरैणा और भैराणा भी जा सकते हैं। हज़ारों की संख्या में प्रवासी पक्षियों को देखने हेतु भी यह एक उपयुक्त स्थान है।

स्कल्प्चर पार्क ( प्रस्तर प्रतिमा / मूर्तियों का संग्रह ) नाहरगढ़ Best Places to visit in Jaipur
अरावली की पहाड़ियों के किनारे पर, ऊँचाई पर बसा नाहरगढ का क़िला, जयपुर शहर को ऊँचाई से देखता हुआ, हमेशा से ही एक प्रसिद्ध पर्यटक गन्तव्य रहा है। इस रंगीन ऐतिहासिक क़िले में अब एक और दिलचस्पी का अध्याय जुड़ गया है, जिसे राजस्थान सरकार की पहल पर एक स्कल्पचर पार्क इस क़िले में बनाया गया है। यह अपनी तरह का एक इकलौता स्थल है जो कि समकालीन कला को प्रदर्शित करता है। यह परियोजना राजस्थान राज्य की सरकार और एक एन. जी. ओ. साथ-साथ द्वारा किया गया मिला जुला प्रयास है। इस क़िले के इस महल के हिस्से को एक गैलरी में परिवर्तित कर के समकालीन कला को प्रस्तर प्रतिमाओं द्वारा दर्शाया गया है जिसमें उच्च श्रेणी के भारतीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय कलाकारों की मूर्तियां अन्दर तथा बाहर की तरफ लगाई गई हैं। नाहरगढ़ क़िले में इस स्कल्प्चर पार्क की स्थापना की पहल, देश में समकालीन कला के प्रति बढ़ती हुई दिलचस्पी को और बढ़ाने के लिए की गई है, साथ साथ ही भारत की विरासत को शामिल करके दर्शाने के लिए यह गैलरी बनाई गई है। यह गैलरी जनता के लिए खुली हुई है तथा भारत देश के विशेष विशिष्ट अतीत तथा वर्तमान को उत्कृष्ट रूप में एक साथ दर्शाती है।

अक्षरधाम मंदिरBest Places to visit in Jaipur
Jaipur जयपुर आने वाले पर्यटकों के लिए चित्रकूट (वैशाली नगर) का अक्षर धाम मंदिर आकर्षण का केन्द्र है। भगवान नारायण को समर्पित यह मंदिर सुन्दर वास्तुकला के कारण प्रसिद्ध है।

झालाना सफारी पार्क Best Places to visit in Jaipur
लम्बे चौड़े क्षेत्र में फैला, झालाना सफारी पार्क Jaipur जयपुर का एक सुन्दर पार्क है जो कि विशेषकर तेंदुआ देखने के लिए प्रसिद्ध है। लगभग 1978 हैक्टेयर में फैला यह जंगल, जयपुर शहर के दक्षिण पूर्व में है। सन् 1860 तक यह क्षेत्र सामंतवादी शासन के अधीन था। यह सम्पत्ति जयपुर के पूर्व महाराजा की थी तथा शाही परिवार के लिए क्रीड़ा स्थल था। यह क्षेत्र आस पास के गाँवों के लिए जलाने के ईंधन की भरपाई करता था। सन् 1862 में एक जर्मन ब्रिटिश जीव विज्ञानी डॉक्टर ब्रान्डीस को वन विभाग का महानिरीक्षक नियुक्त किया गया ताकि वे वन विभाग का भली भांति निरीक्षण तथा देख-भाल करें तथा प्रबन्धन संभालें। इस पार्क में जंगली पेड़, पौधे, फल व फूलों के वृक्ष हैं तथा इसे उष्ण कटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन माना जाता है। यहाँ की सैर करने में नम स्थान, जंगली आगामी वन दिखाई देता है तथा यहाँ वन्यजीवों को दर्शक अपने प्राकृतिक रूप में विचरण करते हुए देख सकते हैं। तेंदुए के साथ ही इस वन क्षेत्र में 15-20 चीते भी घूमते दिखाई पड़ते हैं। झालाना सफारी पार्क में इसके अलावा और भी बहुत से वन्य जीव देखे जा सकते हैं जैसे – धारीदार लकड़बग्घा, जंगली लोमड़ी, सुनहरी गीदड़, चीतल, भारतीय कस्तूरी बिलाव, नील गाय, जंगली बिल्ली आदि। इसके साथ ही यह पार्क पक्षी प्रेमियों के लिए भी स्वर्णिम अवसर प्रदान करता है, क्योंकि यहाँ पर विविध प्रजाति के पक्षी जिनमें भारतीय पित्रा, काला गिद्ध, उल्लू, छींटेदार छोटे उल्लू, शिकरा (छोटा बाज) और बड़े गिद्ध भी शामिल हैं। दूर तक फैले इस वन्यजीव क्षेत्र में कुछ रोचक स्थल भी देखने लायक हैं – जैसे सन् 1835 में महाराजा सवाई रामसिंह द्वारा बनवाई गई शिकार हौदी (जहाँ छिपकर बैठकर शिकार किया जाता था) तथा एक बड़ा काली माता का मंदिर और जैन चूलगिरी मंदिर भी हैं।

मसाला चौक Best Places to visit in Jaipur
Jaipur जयपुर के रामनिवास बाग में आने पर किरण कैफे की पुराने यादें भुला पाना बहुत मुश्किल था। परन्तु अब वह कौतूहलपूर्ण दृश्य वापस आ गया है, जिसका नाम मसाला चौक है, वो जगह जहाँ आप प्रफुल्लित होकर, जयपुर के मसालेदार मज़ेदार खाने का मज़ा ले सकते हैं। जयपुर शहर घूमने आने वाले लोगों के लिए मौज-मस्ती के लिए यह बड़ी मशहूर जगह बन गई है। आप मसाला चौक में बैठ कर जयपुर की पुरानी गलियों में मिलने वाला ज़ायकेदार खाने का स्वाद चखने के साथ ही, जयपुर में मिलने वाले अन्य प्रसिद्ध स्थानीय विशिष्ट स्वादिष्ट व्यंजनों का स्वाद भी ले सकते हैं। मसाला चौक में कुल 21 फूड स्टॉल्स यानी खाने पीने की छोटी दुकानें लगाई गई हैं। यहाँ आने के लिए शाम का समय सबसे उचित है, क्योंकि इस समय आप यहाँ के स्थानीय लोगों के साथ मिलने जुलने व बातचीत करने का मौक़ा भी पाएंगे।

आम्रपाली संग्रहालय Best Places to visit in Jaipur
आम्रपाली ज्वेल्स प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापकों द्वारा आम्रपाली संग्रहालय एक पहल है। यह संग्रहालय जयपुर शहर में स्थित भारतीय आभूषण और कलात्मक वस्तुओं को समर्पित है। संस्थापकों (राजीव अरोड़ा और राजेश अजमेरा) के लिए संग्रह प्रेम का एक श्रम रहा है जो लगभग चालीस साल पहले शुरू हुआ था जब वे कॉलेज में दोस्त बन गए थे, और यह आज भी जारी है। संग्रहालय में दो मंजिलों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कई क्षेत्र हैं। भूतल में शरीर के हर हिस्से के लिए सौंदर्य और अलंकरण, चांदी और सोने के आभूषणों की वस्तुओं को प्रदर्शित करता है, वस्तुतः भारत के हर क्षेत्र से; आभूषणों पर विशेष ध्यान देने के साथ, जो जन्म से मृत्यु तक पारित होने के संस्कार से जुड़े होते हैं।

तलघर में डिज़ाइन के लिए कई प्रेरणाएँ हैं जो भारतीय डिजाइनर को समय के साथ परिवर्तनों को बताती हैं, संग्रह में दोनों गहने और चांदी की वस्तुओं के माध्यम से देखा गया है। एक अलग खंड विरासत वस्त्रों के लिए समर्पित है जो सोने और चांदी से अलंकृत हैं। पूरा संग्रह 4000 से अधिक वस्तुओं से बना है, जिनमें से लगभग 800 प्रदर्शन पर हैं। बाकी को विजुअल स्टोरेज में देखा जा सकता है। अन्य संग्रहालयों के विपरीत, जहां जगह की कमी के कारण हजारों प्रदर्शन दृष्टि से बाहर रहते हैं, आम्रपाली संग्रहालय आपको विज़ुअल स्टोर लाता है, रिजर्व संग्रह को जगह देता है। संग्रहालय में विज़ुअल स्टोर के विषय में जानकारी चाहने वालों का स्वागत किया जाता है। संस्थापक अपने पूरे संग्रह को दुनिया के साथ साझा करने के इच्छुक हैं, इस विश्वास के साथ कि प्रत्येक कृति के अज्ञात रचनाकार चाहते थे कि उनका काम देखा जाए और प्रशंसा की जाए। क्योंकि ये रचनाएँ चपल, कालातीत और अमूल्य हैं। भारत के शिल्प कौशल की इस आकर्षक गवाही से विदेशी पर्यटक रोमांचित होंगे । मानव रूप के हर हिस्से के लिए आभूषण, भारत के हर कोने से आभूषणों से सजे गहने, सोने और चांदी से सुशोभित वस्त्र, और भी बहुत कुछ। आगंतुक संग्रहालय के समान हस्तनिर्मित चांदी के आभूषण और वस्तुएं भी खरीद सकते हैं और संग्रहालय की दुकान से सोने और चांदी के आभूषणों की पूरी श्रृंखला भी खरीद सकते हैं।

जयपुर अर्न्तराष्ट्रीय हवाई अड्डे को सांगानेर हवाई अड्डा कहा जाता है। दिल्ली, कोलकाता, मुम्बई, अहमदाबाद, जोधपुर, उदयपुर और कई अन्य स्थानों से घरेलू उड़ान संभव है। जयपुर से दुबई, मस्कट, सिंगापुर और बैंकॉक के लिए अर्न्तराष्ट्रीय उड़ानें भी हैं।

जयपुर जाने का एक सुविधाजनक तरीका सड़क मार्ग है। राजस्थान के सभी प्रमुख शहरों से ए.सी. और डीलक्स बसों की नियमित सेवा उपलब्ध है।

जयपुर दिल्ली, आगरा, मुम्बई, चेन्नई, कोलकाता, बीकानेर, जोधपुर, उदयपुर, अहमदाबाद, बैंगलोर सहित सभी प्रमुख शहरों से रेल के माध्यम से जुड़ा हुआ है।

Udaipur Tourism उदयपुर Best Places to visit in Udaipur

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Top Places to visit in Udaipur

Udaipur Travel Guide

वेनिस ऑफ द ईस्ट नाम दिया गया है इस शहर को. झीलों की नगरी Udaipur उदयपुर अरावली की पहाड़ियों से घिरा हुआ है. प्रसिद्ध लेक पैलेस पिछौला झील के मध्य में स्थित है जो कि उदयपुर के सबसे सुंदर स्थलों में से एक है. इसकी खूबसूरती दुनिया भर में मशहूर है. इस शहर की स्थापना 1553 ई. में महाराणा उदयसिंह द्वितीय ने की थी, जिसे मेवाड़ राज्य की राजधानी घोषित किया गया था. यह नागदा के दक्षिण पश्चिम की घुमावदार पहाड़ियों और गिर्वा घाटी में स्थित है. नीली झीलों, अरावली की पहाड़ियों और हरे भरे जंगलों से घिरा उदयपुर शहर एक वैभवपूर्ण पर्यटन स्थल है. यहाँ लेक पैलेस पिछोला झील के बीच, सीप में मोती की तरह नज़र आता है. लेक पैलेस यहाँ के सबसे प्रसिद्ध स्थलों में से एक है. एशिया की दूसरी सबसे बड़ी मानव निर्मित मीठे पानी की जयसमंद झील भी उदयपुर ज़िले में है. वैभवशाली सिटी पैलेस और सज्जनगढ़ पैलेस स्थापत्य कला के बेहतरीन नमूने हैं. उदयपुर में संगमरमर और जस्ते की भी खानें हैं.

Udaipur उदयपुर सिटी पैलेस Best Places to visit in Udaipur
पिछोला झील के तट पर स्थित सिटी पैलेस की भव्य इमारत अपने संरक्षण और उत्तम रख रखाव के कारण आकर्षक है. इसमें चार प्रमुख महल हैं तथा कई छोटे-छोटे महल हैं, जो कि शाही परिवार का निवास हुआ करते थे. अब इसके मुख्य भाग को संग्रहालय के रूप में संरक्षित कर पर्यटकों को देखने के लिए रखा गया है. इसमें अनेक प्राचीन कलाकृतियाँ, पेन्टिंग्स, अस्त्र – शस्त्र, ज़िरह – बख्तर, तलवारें, भाले, पोशाकें आदि रखे गए हैं.

लेक पैलेस Best Places to visit in Udaipur
पाँच सितारा होटल के रूप में, पिछोला झील के बीचों बीच यह जग निवास पैलेस, अब लेक पैलेस होटल के नाम से प्रचलित है. यह महल एक द्वीप पर बना है तथा यहाँ तक पहुँचने के लिए नाव से जाना पड़ता है. इसे महाराजा जगतसिंह द्वितीय ने सन् 1746 में अपने आराम करने के लिए बनवाया था. ग्रीष्म कालीन महल के रूप में यह लेक पैलेस जग निवास कहलाता था. इसके बाहर की तरफ, शानदार बरामदे, रंग बिरंगी लाइटों से सजा उद्यान तथा फव्वारे, इसकी शोभा को चार चाँद लगाते हैं.

जग मन्दिर Best Places to visit in Udaipur
एक अन्य द्वीप पर बना जग मंदिर भी पिछोला झील के बीच में ही स्थित है. इसका निर्माण 1620 में शुरू हुआ और 1652 के आस पास पूरा हुआ. गर्मियों की आरामगाह के रूप में उत्सवों की मेजबानी करने के लिए शाही परिवार द्वारा महल का उपयोग किया जाता था. शाहजहां (शहज़ादा ख़ुर्रम) ने अपने पिता सम्राट जहांगीर के ख़िलाफ विद्रोह करते हुए यहां आश्रय लिया था. ऐसा कहा जाता है कि इस महल से प्रेरित एवं प्रभावित होने के फलस्वरूप ही शाहजहां ने आगे चलकर ताजमहल का निर्माण किया जो विश्व के सबसे शानदार महल के रूप में जाना जाता है.

मानसून पैलेस Best Places to visit in Udaipur
सज्जनगढ़ अब मॉनसून पैलेस के नाम से भी प्रसिद्ध है. एक ऊँची पहाड़ी पर बने इस महल को महाराणा सज्जन सिंह ने अपनी शिकारगाह के रूप में बनवाया था. 19वीं शताब्दी में बने इस महल को एक खगोलीय केन्द्र के रूप में बनवाया गया था. परन्तु महाराणा सज्जन सिंह की अकस्मात मृत्यु के कारण ये योजना सफल न हो पाई. अब यह एक प्रसिद्ध सन-सेट पॉइंट है.

आहड़ संग्रहालय Best Places to visit in Udaipur
इस संग्रहालय में मिट्टी के बर्तनों का एक छोटा, लेकिन दुर्लभ संग्रह है. जिनमें से कुछ 1700 ईसा पूर्व के हैं. पुरातात्विक खोजों से प्राप्त प्रतिमाएं भी यहाँ देखी जा सकती हैं. यहां का विशेष आकर्षण बुद्ध की 10वीं शताब्दी की धातु प्रतिमा है.

जगदीश मंदिर Best Places to visit in Udaipur
Udaipur उदयपुर और उसके आस पास के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक जगदीश मंदिर 1651 में इंडो-आर्यन शैली में बना हुआ स्थापत्य कला का एक अच्छा उदाहरण है. यह भगवान विष्णु को समर्पित है और इसका स्थापत्य, नक्काशीदार खंभे, सुंदर छत और चित्रित दीवारें एक सुंदर संरचना का निर्माण करते हैं. यह महाराणा जगत सिंह द्वारा तीन मंज़िला मंदिर के रूप में बनवाया गया था.

फ़तेह सागर झील Best Places to visit in Udaipur
पिछोला के उत्तर में, पहाड़ों और वन संपदा के किनारे स्थित यह रमणीय झील, एक नहर द्वारा पिछोला झील से जुड़ी एक कृत्रिम झील है. झील के मध्य सुंदर नेहरू गार्डन के साथ साथ एक द्वीप पर उदयपुर की सौर वेधशाला भी है. इसे पहले कनॉट बन्ध कहा जाता था क्योंकि इसका उद्घाटन ड्यूक ऑफ कनॉट के द्वारा किया गया था.

पिछोला झील Best Places to visit in Udaipur
पिछोला झील का सौन्दर्य ढलती शाम के समय, सूर्य की लालिमा में सोने की तरह दमकता है. पिछोली गाँव के कारण झील को पिछोला नाम दिया गया है. जगनिवास और जगमंदिर द्वीप इस झील में स्थित है. झील के पूर्वी किनारे पर सिटी पैलेस
है. सूर्यास्त होने पर झील में नाव की सवारी, झील और सिटी पैलेस का मनमोहक दृश्य पर्यटकों को आकर्षित करता है.

सहेलियों की बाड़ी Best Places to visit in Udaipur
सहेलियों की बाड़ी यहाँ का एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है, जो महाराणा संग्राम सिंह द्वितीय द्वारा महिलाओं के लिए एक बगीचे के रूप में निर्मित किया गया था. एक छोटे से संग्रहालय के साथ साथ इसमें संगमरमर के हाथी, फव्वारे, मण्डप और कमल कुण्ड जैसे कई आकर्षण हैं.

गुलाब बाग और चिड़ियाघर Best Places to visit in Udaipur
Udaipur उदयपुर में ग़ुलाब बाग़ (सज्जन निवास गार्डन) सबसे बड़ा बग़ीचा है. 100 एकड़ में फैले हुए इस बग़ीचे में ग़ुलाब की कई प्रजातियां देखने को मिलती हैं, इसी से इसका नाम गुलाब बाग़ पड़ा.

सुखाड़िया सर्कल Best Places to visit in Udaipur
सुखाड़िया सर्कल Udaipur उदयपुर के उत्तर में स्थित है. इसमें एक छोटा कुंड है जिसमें 21 फीट लम्बे संगमरमर के फव्वारे हैं. रात के प्रकाश में ये बहुत सुंदर लगते हैं. इसका नाम राजस्थान के पूर्व मुख्य मंत्री मोहनलाल सुखाड़िया के नाम पर रखा गया है. पर्यटकों की चहल पहल वाले इस शहर के बीच फव्वारों से घिरा हुआ यह उद्यान स्वर्ग समान लगता है.

भारतीय लोक कला मंडल Best Places to visit in Udaipur
भारतीय लोक कला मंडल, Udaipur उदयपुर का एक सांस्कृतिक संस्थान है जो राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश की संस्कृति, त्यौहारों, लोक कला और लोकगीत के लिए समर्पित है. लोक संस्कृति के प्रचार के अलावा यह एक संग्रहालय भी है जो राजस्थानी संस्कृति के विभिन्न स्वरूपों पर लोक कलाकृतियों का प्रदर्शन करता है.

बागौर की हवेली Best Places to visit in Udaipur
इसका निर्माण 1751-1781 ईस्वी के बीच मेवाड़ शासक के तत्कालीन प्रधानमंत्री अमर चंद्र बड़वा की देखरेख में किया गया था. इस हवेली में राज परिवार के अलावा किसी का भी प्रवेश वर्जित था. इसमें मूल्यवान वस्तुएं रखने के लिए एक अलग तहख़ाना बना हुआ था. यहां स्थित नीम चौक में संगीत और नृत्य का कार्यक्रम एक आनंददायी अनुभव होता है.

शिल्पग्राम Best Places to visit in Udaipur
70 एकड़ में फैला ग्रामीण कला और शिल्प परिसर एक जीवित संग्रहालय माना जाता है. यह उदयपुर शहर से 7 कि.मी. उत्तर-पश्चिम में स्थित है और भारत के पश्चिमी क्षेत्र के जनजातीय लोगों की जीवन शैली को दर्शाता है.

उदयसागर झील Best Places to visit in Udaipur
Udaipur उदयपुर की पांच झीलों में से एक है उदय सागर झील. उदयपुर के पूर्व में 13 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस झील का निर्माण 1559 में महाराणा उदयसिंह द्वारा शुरू करवाया गया था. झील बेड़च नदी पर बनाया एक बांध है. जिससे राज्य को पर्याप्त पानी उपलब्ध हो सके. उदय सागर झील की 4 कि.मी. लम्बाई, 2.5 किलोमीटर की चौड़ाई और 9 मीटर की गहराई है.

हल्दी घाटी Best Places to visit in Udaipur
यह स्थान मेवाड़ के महाराणा प्रताप और अकबर के बीच हुए युद्ध के लिए प्रसिद्ध है तथा उदयपुर से 40 कि.मी. की दूरी पर है. इस घाटी की मिट्टी हल्दी के रंग जैसी पीली है इसीलिए इसका यह नाम पड़ा. हल्दीघाटी अरावली की पहाड़ियों में स्थित है. सन् 1576 ई. में हुए युद्ध में महाराणा प्रताप के गौरव और शौर्य को दर्शाने वाली हल्दीघाटी में उनके प्रिय घोड़े चेतक की समाधि भी स्थित है.

दूध तलाई Best Places to visit in Udaipur
छोटी पहाड़ियों के बीच, पिछोला झील के लिए जाने वाली सड़क पर एक ओर दूध तलाई है. कई लघु पहाड़ियों के मध्य बसी ये तलाई, पर्यटकों के लिए बड़ा आकर्षण है. दीनदयाल उपाध्याय उद्यान और माणिक्यलाल वर्मा बाग इस रमणीय तलाई के किनारे अन्य मनोरम स्थल हैं.

जयसमंद झील Best Places to visit in Udaipur
दो पहाड़ियों के बीच में ढेबर दर्रा को कृत्रिम झील का स्वरूप दिया गया. एशिया की दूसरे नम्बर की सबसे बड़ी मानव निर्मित मीठे पानी की झील है. इसका निर्माण महाराज जयसिंह ने 17वीं शताब्दी में करवाया था. जयसमंद के किनारे पर बनी कलात्मक सीढ़ियाँ और छतरियाँ इसके सौन्दर्य को निखारती हैं. इस झील के आस पास कई तरह के पक्षियों की विभिन्न प्रजातियाँ नज़र आती हैं.

उदयपुर बायोलॉजिकल पार्क Best Places to visit in Udaipur
सिटी सेन्टर से 8 कि.मी. की दूरी पर मॉनसून पैलेस के नीचे की तरफ Udaipur उदयपुर का बायोलॉजिकल पार्क बनाया गया है जिसे सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क के नाम से जानते हैं. इस क्षेत्र के जीव-जन्तुओं तथा पौधों को संरक्षित रखने हेतु इस पार्क का निर्माण किया गया था. पार्क के उद्घाटन के बाद एक माह में लगभग 46 हज़ार दर्शक यहाँ आए जो कि अपने आप में उत्साहवर्धक है. वैसे तो यह पार्क पूरे वर्ष खुला रहता है परन्तु इसे देखने का सर्वोत्तम समय जुलाई से सितम्बर मॉनसून का समय है. मॉनसून में यह क्षेत्र हरियाली से आच्छादित दिखाई पड़ता है तथा इसमें विभिन्न प्रकार की चिड़िया व जानवर देखे जा सकते हैं. इस पार्क में लगभग 60 प्रकार के पशुओं की 21 प्रजातियाँ उपलब्ध हैं जिनमें चीतल, सांभर, जंगली सूअर, शेर, लंगूर, हिमालयन काले हिरण, घड़ियाल, मगरमच्छ आदि दिखाई देते हैं, जो कि वन्य जीव प्रेमियों के लिए स्वर्ग समान है.

विन्टेज कार कलेक्शन Best Places to visit in Udaipur
गार्डन होटल के प्रांगण में विन्टेज ( विशिष्ट पुराने वाहन ) तथा क्लासिक ( उत्तम श्रेणी के वाहन ) की कारों का विविध संग्रह उपलब्ध है, जैसे कैडिलैक, शैवरलैट, मॉरिस आदि, जो कि उदयपुर के महाराणाओं की सम्पत्ति हुआ करती थीं. वे लोग इन गाड़ियों को अपने शानदार यातायात के रूप में काम में लेते थे.

क्रिस्टल ( बिल्लौरी / पारदर्शी उत्तम कोटि के काँच की कटिंग के सामान की गैलेरी )
ऑसलर ( काँच के झूमर बनाने वाली यू. के. की प्रसिद्ध कम्पनी ) के कट ग्लास की उत्तम दर्जे की कम्पनी का बेहतरीन संग्रह उदयपुर की क्रिस्टल गैलेरी में मौजूद सब से बड़े और महंगे संग्रह में से एक है. सजावटी कला की दुनिया में इन वस्तुओं में अन्तर और क्वालिटी का वैभव देखने पर आप कह सकते हैं कि यह एक मात्र अनुपम संग्रह है. उदयपुर के महाराणा सज्जन सिंह ने सन् 1878 में इस संग्रह को जमा किया, साधिकार प्राप्त किया तथा उसमें से अधिकतर फर्नीचर के सामान के संग्रह को सन् 1881 में ऑसलर कम्पनी को दे दिया गया. वर्तमान में इस अति सुन्दर क्रिस्टल गैलेरी में उपलब्ध डाइनिंग टेबल से लेकर, टेबल, सोफा सैट, धुलाई करने के बड़े कटोरे ( प्याले ), जाम ( शराब के प्याले ), ट्रे, शीशे की सुराही, परफ्यूम की बोतलें, मोमबत्ती लगाने के स्टैण्ड, क्रॉकरी और यहाँ तक कि काँच के बने बैड्स भी हैं. इस गैलेरी का मुख्य आकर्षण हीरे – जवाहरात जड़ा हुआ एक कार्पेट ( ग़लीचा ) है, जो कि अनुपम वर्ग में शामिल है.

इस गैलेरी में एक शाही, बड़ा, हाथ से खींच कर चलाने वाला एक पंखा है जिस पर लाल रंग का साटिन का कपड़ा चढ़ा हुआ है. इसमें कशीदाकारी द्वारा सूर्य की छवि बनाई गई है जो कि मेवाड़ राज्य का प्रतीक माना जाता है. इस क्रिस्टल गैलेरी में मुख्य रूप से जो सामान प्रदर्शित किया गया है वह एफ एण्ड सी ऑसलर कम्पनी द्वारा तैयार किया गया है, जो कि विक्टोरियन युग के सब से महत्वपूर्ण कट ग्लास के भोग विलास के सामान के रचयिता रहे हैं तथा उसके बाद भी इन का यह अद्भुत कार्य महत्वपूर्ण रहा है.

सन् 1807 में बर्मिंघम ( यू. के. ) में स्थापित की गई ’ऑसलर कम्पनी’ ने अपने कला क्षेत्र में कट ग्लास उद्योग में संरचनात्मक सभ्यावनाएं तलाश करते हुए, स्मरणार्थ आकृति के रूप में बिल्लौरी काँच ( क्रिस्टल ग्लास ) की अवधारणा को मूर्त रूप देकर, क्रान्ति ला दी थी, जिसका सबसे बढ़िया उदाहरण उदयपुर संग्रह में पाया जाता है. उन्नीसवीं शताब्दी में एफ एण्ड सी. ऑसलर कम्पनी ने ब्रिटेन तथा भारत दोनों देशों में अपना व्यवसाय बहुत ही सफलतापूर्वक चलाया.

नागदा Best Places to visit in Udaipur
छठी शताब्दी के अंश को समाहित किए, नागदा उदयपुर से 22 कि.मी. की दूरी पर स्थित है. अरावली की पहाड़ियों की गोद में बसा नागदा, नक्काशीदार सहस्त्रबाहु मंदिर के लिए प्रसिद्ध है जो कि आम लोगों में सास बहू मंदिर के नाम से पहचाना जाता है. नवीं-दसवीं शताब्दी में निर्मित किए गए इस मंदिर का वास्तुशिल्प अतुलनीय है तथा इसका तोरणद्वार अद्भुत बनाया गया है. यहाँ पर स्थित एक और शानदार जैन मंदिर भी दर्शनीय है.

बड़ी झील Best Places to visit in Udaipur
बड़ी झील उदयपुर में स्थित एक ताजे पानी की झील है. इसका निर्माण महाराणा राजसिंह द्वारा ‘‘बड़ी गाँव’’ से लगभग 12 कि.मी. दूर 1652-1680 के बीच करवाया गया था. पहले इसका नाम जियान सागर था जो कि महाराणा राजसिंह की माता के नाम पर था. इसका निर्माण गांव के लोगों को बाढ़ से राहत दिलाने के लिए मदद के तौर पर करवाया गया था. सन् 1973 में आई बाढ़ के दौरान इस झील के कारण लोगों को काफी मदद मिली और अब ये झील स्थानीय लोगों तथा पर्यटकों के लिए एक आकर्षण का केन्द्र बन गई है. तीन तरफ से छतरियों से घिरी यह झील देश की सबसे बढ़िया ताजे पानी की झील है तथा उदयपुर के पर्यटक – आकर्षणों में से एक है. शहर की भीड़ भरी जिन्दगी से लगभग 12 कि.मी. की दूरी पर यह झील शांत वातावरण में प्राकृतिक सुन्दरता से परिपूर्ण है.

मेनार Best Places to visit in Udaipur
सिटी ऑफ लेक्स के नाम से पहचाना जाने वाला शहर उदयपुर कई सुन्दर झीलों का घर है. यहाँ एक गाँव है मेनार जहाँ पर सर्दी के मौसम में प्रवासी पक्षियों का जमावड़ा रहता है. यहाँ के ब्रह्म तालाब और डंड तालाब प्रवासी पक्षियों का आतिथ्य करते हैं और उन्हें आकर्षित करते हैं. यह गाँव एक अनछुआ पर्यटक आकर्षण का स्थल है तथा पक्षी प्रेमियों के लिए यह एक अच्छा पसन्दीदा विकल्प बन सकता है. उदयपुर चित्तौड़गढ़ रोड पर यह उदयपुर से लगभग 48 कि.मी. की दूरी पर स्थित है तथा मेनार आने व घूमने का सबसे अच्छा मौसम सर्दियों का है जब इन तालाबों पर प्रवासी पक्षियों के झुण्ड नजर आते हैं. यहाँ घूमने पर आप यहाँ आने वाले प्रवासी पक्षियों में ग्रेटर फ्लेमिंगो, व्हाइट टेल्ड, लैपविंग मार्श हैरियर, ब्लैक काइट (काली चील), जंगल क्वेल (काली बटेर), क्रो फीजैन्ट, (चेड़ लम्बी पूंछ वाला पक्षी) इत्यादि देख सकते हैं। पर्यटकों की भीड़ से दूर आप यहाँ के तालाब के किनारे शांत वातावरण में तथा गांव की नीरव और शांतिमय जलवायु में विश्राम कर सकते हैं.

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WWF World Wide Fund for Nature, World Wrestling Federation

WWW World Wide Web

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