स्वामी प्रसाद मौर्य की पडरौना सीट पर हार या जीत?

स्वामी प्रसाद मौर्य की पडरौना सीट पर हार या जीत?

RPN सिंह बीजेपी में शामिल, अब खुद अपनी सीट हारेंगे स्वामी?

उत्तर प्रदेश में बीजेपी ने एक ऐसा कदम उठाया है जिसका सीधा असर स्वामी प्रसाद मौर्य के राजनीतिक भविष्य पर पड़ने वाला है. ये ऐसा फैसला है जिससे स्वामी प्रसाद मौर्य की पडरौना सीट पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है.

स्वामी प्रसाद मौर्य की पडरौना सीट पर हार या जीत?
स्वामी प्रसाद मौर्य की पडरौना सीट पर हार या जीत?

हाल ही में यूपी के रोज़गार मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य बीजेपी छोड़ कर समाजवादी पार्टी में शामिल हुए थे. अब बीजेपी ने स्वामी प्रसाद मौर्य की काट के तौर पर आरपीएन सिंह को जॉइन करा लिया है. आरपीएन सिंह का बीजेपी में शामिल होना बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि आरपीएन सिंह कुशीनगर की उसी पडरौना विधानसभा सीट से 3 बार विधायक रह चुके हैं जहां से स्वामी प्रसाद मौर्य 2 बार जीते हैं.


स्वामी प्रसाद मौर्य 2017 में बीजेपी के टिकट पर और 2012 में बीएसपी के टिकट पर पडरौना विधानसभा सीट जीते हैं. 2012 में मौर्य जब बीएसपी के टिकट पर लड़े थे तो उनकी जीत का मार्जिन केवल 8,162 वोटों का था लेकिन जब वो 2017 में बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़े तो उनकी जीत का मार्जिन पांच गुना बढ़कर 40,552 वोटों का हो गया.
दूसरी तरफ आरपीएन सिंह पुराने कांग्रेसी हैं और पडरौना से तीनों बार कांग्रेस के टिकट पर जीते हैं. आरपीएन सिंह 2007 में 5,419 वोटों से, 2002 में 15,382 वोटों से और 1996 में 18,023 वोटों से पडरौना की सीट जीते हैं.

पडरौना की सीट पर कांग्रेस ने सबसे ज्यादा चार बार कब्जा जमाया है, बीजेपी 2 बार इस सीट पर जीती है जबकि समाजवादी पार्टी एक बार और बहुजन समाज पार्टी एक बार इस सीट पर जीती हैं.


इतिहास बताता है कि इस सीट पर कांग्रेस सबसे ज्यादा मज़बूत रही है. 4 बार सीट जीतने के अलावा वो 2 बार इस सीट पर दूसरे नंबर पर भी रही है. आरपीएन सिंह पडरौना विधानसभा सीट पर कांग्रेस के दबदबे का चेहरा रहे हैं और अब वो बीजेपी में शामिल हो गए हैं.
कुशीनगर में पडरौना विधानसभा सीट के अलावा आरपीएन सिंह कुशीनगर लोकसभा सीट पर भी असर रखते हैं.

2009 के लोकसभा चुनाव में आरपीएन सिंह कुशीनगर लोकसभा सीट पर जीत हासिल कर चुके हैं. मजे की बात ये है कि आरपीएन ने 2009 में बीएसपी के स्वामी प्रसाद मौर्य को ही लोकसभा चुनाव हराया था. तब आरपीएन को 21094 वोटों से जीत मिली थी. 2009 का चुनाव जीतने के बाद आरपीएन सिंह केंद्र सरकार में मंत्री भी रहे. वो केंद्र सरकार में गृह राज्य मंत्री का पद संभाल चुके हैं.


हालांकि जबसे नरेंद्र मोदी और अमित शाह का प्रभाव बीजेपी में बढ़ा तब से आरपीएन सिंह लोकसभा चुनाव में हारते रहे हैं. 2014 में आरपीएन सिंह को बीजेपी के राजेश पांडे ने 85540 वोटों से हराया था. और 2019 में तो आरपीएन सिंह कुशीनगर लोकसभा सीट के चुनाव में तीसरे नंबर पर चले गए थे. 2019 में बीजेपी के विजय कुमार दुबे ने 3,37,560 वोटों से ये चुनाव जीता था.

कुशीनगर में बीजेपी का प्रभाव बढ़ने के बाद से आरपीएन सिंह ने सोचा होगा कि अब भविष्य बीजेपी में ही है और शायद यही सोचकर वो 2022 के चुनाव का मतदान शुरू होने से 15 दिन पहले बीजेपी में शामिल हो गए हैं. लेकिन उनके बीजेपी में आने से सबसे बड़ा खतरा स्वामी प्रसाद मौर्य पर मंडरा रहा है जिनके सामने चुनौती है कि वो पडरौना से विधानसभा चुनाव कैसे जीतेंगे.

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