स्वामी की नई पार्टी RSSP, अखिलेश को बताई हैसियत

स्वामी की नई पार्टी RSSP, अखिलेश को बताई हैसियत

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर दबाव को कई डिग्री बढ़ाते हुए स्वामी प्रसाद मौर्य ने अपने अगले बड़े कदम का ऐलान कर दिया है.

मौर्य ने मीडिया से बातचीत करते हुए ऐलान किया कि वो 22 फरवरी को दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में अपने कार्यकर्ताओं की एक बड़ी रैली को संबोधित करेंगे.

इस बीच मीडिया में उनकी पार्टी का नाम और झंडा सामने आ गया है. कई मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि स्वामी प्रसाद मौर्य की पार्टी का नाम आर एस एस पी यानी राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी होगा.

रिपोर्ट के मुताबिक आर एस एस पी… पहले से बनी एक पॉलिटिकल पार्टी है जिसे अलीगढ़ के रहने वाले साहेब सिंह धनगर नाम के व्यक्ति ने 2013 में बनाया था.

संभावना है कि स्वामी प्रसाद मौर्य अब इसी पार्टी के माध्यम से अपनी राजनीति को आगे बढ़ाएंगे. सोशल मीडिया पर इस पार्टी के झंडे की तस्वीर भी सामने आई हैं. जिसमें तीन रंगों का इस्तेमाल किया गया है. इस झंडे में नीले, लाल और हरे रंग को यूज़ किया गया है.

स्वामी प्रसाद मौर्य ने इससे पहले साल 2016 में भी एक पार्टी बनाई थी. बसपा से बग़ावत के बाद मौर्य ने लोकतांत्रिक बहुजन मंच नाम से एक पार्टी का गठन किया था.

इसके बाद 2017 में मौर्य बीजेपी में शामिल हो गए थे. तब उन्हें योगी सरकार के पहले कार्यकाल में कैबिनेट मंत्री बनाया गया था.

हालांकि 2022 विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर उन्होंने पलटी मारी और वो बीजेपी को छोड़कर सपा के साथ आ गए थे.

अब 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले मौर्य नई पार्टी की रणनीति को तो आगे बढ़ा ही रहे हैं साथ ही वो अखिलेश से उनकी हैसियत भी पूछ रहे हैं.

स्वामी प्रसाद मौर्य ने अखिलेश यादव को उनकी हैसियत बताते हुए सवाल उठाया है कि जब अखिलेश की सरकार ना केंद्र में है और ना यूपी में है तो वो मौर्य को क्या देने की हैसियत रखते हैं.

मौर्य ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि ‘सभी जानते हैं कि अखिलेश सरकार में नहीं हैं, न केंद्र में उनकी सरकार है और न ही राज्य में. फिर भी उन्होंने मौर्य को जो भी सम्मान दिया है उसे वो लौटा देंगे.

मौर्य ने कहा कि 22 फरवरी को दिल्ली में कार्यकर्ताओं का जमावड़ा होगा और इस मुद्दे पर कार्यकर्ता जो निर्णय लेंगे, उसके अनुसार आगे बढ़ा जाएगा. मौर्य ने ये भी कहा कि सपा को जाति जनगणना की मांग को लेकर सड़कों पर आना चाहिए था लेकिन पार्टी के नेता कमरे में बैठे हैं.

स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा, उन्होंने 13 फरवरी को सपा के पद से इस्तीफा दिया था. इस्तीफे में उन्होंने अपनी बातें बहुत साफ तरीके से लिखीं. इस्तीफा भेजे एक हफ्ता हो गया. राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस बारे में बात ही नहीं की. स्वभाविक रूप से अब मौर्य ने फैसला कार्यकर्ताओं पर छोड़ दिया है.”

मौर्य ने अखिलेश यादव की उस बात का भी जवाब दिया जिसमें अखिलेश ने स्वामी प्रसाद मौर्य पर फायदा लेने का आरोप लगाया था.

अखिलेश के बयान पर मौर्य ने कहा कि भला अखिलेश यादव ने मुझे कौन सा लाभ दे दिया… मैंने उन्हें लाभ दिया है. मेरे आने से उनका वोट करीब 6 फीसदी बढ़ा है. सत्ता में रहने पर भी वो इतना वोट नहीं पाए थे.”

स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा, “45 विधायक की उनकी हैसियत थी. उन्हें मैंने आज 110-11 विधायक दिए हैं. उन्होंने मुझे कुछ नहीं दिया. जो दिया भी है, उसमें मैंने अपमान ही झेला है.

अब सवाल उठता है कि मौर्य के नई पार्टी के गठन के फैसले का अखिलेश और समाजवादी पार्टी पर क्या असर पड़ेगा. देखिये लोकसभा सीटों के लिहाज़ से हो सकता है कि किसी सीट पर वो या उनका कोई उम्मीदवार जीत हासिल ना कर पाये लेकिन वो जनता में सपा का सेंटिमेंट तो ज़रूर खराब करेंगे.

मौर्य के नई पार्टी का एलान करने के बाद पार्टी में फूट और बढ़ सकती है. 22 फरवरी को दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में होने वाली मौर्य की रैली के दौरान कई अन्य नेता उनकी पार्टी में शामिल हो सकते हैं.

उनकी पार्टी में दलित, ओबीसी, और अल्पसंख्यक वर्ग के कई पूर्व विधायक और सांसद शामिल हो सकते हैं जिनकी अब सपा में कोई पूछ नहीं है. हाल ही में सपा के पदों से इस्तीफ़ा देने वाले कमलाकांत गौतम और सलीम शेरवानी जैसे कई नेता मौर्य के समर्थन में उनके साथ आ सकते हैं.

इसके अलावा अपना दल कमेरावादी की नेता और सपा विधायक पल्लवी पटेल भी उनका समर्थन कर सकती हैं. पल्लवी पटेल ने भी अखिलेश यादव पर पीडीए की उपेक्षा का आरोप लगाया था.

इन तमाम आशंकाओं के बीच सपा की तरफ से मौर्य से बातचीत करने के लिए नेताओं को उनके घर भी भेजा गया है. खबर है कि सपा के वरिष्ठ नेता और अखिलेश यादव के करीबी बताए जाने वाले राम गोविंद चौधरी मौर्य को मनाने के लिए उनके घर पहुंचे थे.

राम गोविंद ने अखिलेश को पत्र लिखकर आग्रह किया था कि वो स्वामी का इस्तीफ़ा स्वीकार ना करें. पूर्व कैबिनेट मंत्री और विपक्ष के नेता रहे राम गोविंद, स्वामी के पक्ष में खड़े हुये थे .राम गोविंद ने स्वामी को PDA के हक़ में लड़ने वाला नेता बताया था और उनके जाने से पार्टी के नुक़सान की बात कही थी.

माना जा रहा है कि यूपी की 10 राज्यसभा सीटों के लिए होने चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले सपा कोई रिस्क नहीं लेना चाहती. इसीलिए समाजवादी पार्टी ने मान मनौव्वल का दौर शुरू कर दिया है. हालांकि इसमें उसे कितनी सफलता मिलेगी ये देखना होगा.

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