जयंत का बागपत, राहुल-अखिलेश लथपथ

जयंत का बागपत, राहुल-अखिलेश लथपथ

जयंत चौधरी के एक मूव ने अखिलेश यादव और राहुल गांधी दोनों की नींदे उड़ा दी हैं. जब से जयंत चौधरी के बीजेपी के साथ गठबंधन की ख़बरें आनी शुरू हुई हैं तब से ना तो अखिलेश यादव सुकून में हैं और ना ही राहुल गांधी.

दोनों को चिंता इस बात की है कि जब जयंत चौधरी को साथ रखकर वो उत्तर प्रदेश में अपनी लोकसभा सीटों की संख्या नहीं बढ़ा पाये तो जयंत के बीजेपी के साथ जाने के बाद उनका क्या हाल होगा.

2014 में कांग्रेस को यूपी से केवल दो सीटें मिली थीं और समाजवादी पार्टी को केवल पांच सीटें मिली थीं. 2019 में समाजवादी पार्टी की स्थिति पांच की पांच ही रही जबकि कांग्रेस की सीट दो में से एक रह गई. ये सब तब हुआ जब जयंत चौधरी बीजेपी के खिलाफ थे.

अब जब जयंत बीजेपी के साथ जा रहे हैं तो कांग्रेस और एसपी का क्या हाल होगा इसकी चिंता दोनों ही पार्टी के नेताओं को खाए जा रही है.

सबसे पहली बौखलाहट अखिलेश यादव की दिखाई दी जब उन्होंने फैसला किया कि वो राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा में शामिल होने जा रहे हैं. अखिलेश ने ये फैसला तब किया जब ये तय हो चुका था कि जयंत चौधरी समाजवादी पार्टी से गठबंधन तोड़ने वाले हैं.

राहुल गांधी की यात्रा में शामिल होने जा रहे ये वही अखिलेश यादव हैं जो मध्यप्रदेश चुनाव के वक्त कांग्रेस नेताओं और काग्रेस पार्टी को चालू बता रहे थे. जयंत चौधरी की पार्टी आरएलडी के एनडीए में शामिल होने की खबरें आते ही 6 फ़रवरी को अखिलेश ने कांग्रेस अध्यक्ष को एक चिट्ठी लिख दी कि वो राहुल गांधी की यात्रा में रायबरेली या अमेठी में शामिल होंगे.

मज़े की बात ये है कि राहुल की यात्रा में शामिल होने का निमंत्रण भी अखिलेश यादव को खुद मुंह से मांगना पड़ा था. 6 फरवरी को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को चिट्ठी लिखने से पहले 4 फरवरी को अखिलेश ने खुद कहा था कि उनकी पार्टी को राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा में आमंत्रित नहीं किया गया है.

मीडिया से बातचीत में अखिलेश ने कहा था कि
‘कई बड़े आयोजन होते हैं, लेकिन हमें आमंत्रित नहीं किया जाता’. अखिलेश की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए, वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा था कि पार्टी… गठबंधन के सदस्यों का यात्रा में स्वागत करने के लिए तैयार है. 

इसके बाद अखिलेश को न्योता भेजा गया और अखिलेश ने खड़गे को चिट्ठी लिखकर यात्रा में शामिल होने की बात कही.

दूसरी तरफ़ राहुल की भारत जोड़ो यात्रा का यूपी के लिये जो कार्यक्रम सामने आया है उसे देखकर पता चलता है कि जयंत के बीजेपी के साथ जाने के फैसले का कांग्रेस पर भी काफी बुरा असर पड़ा है.

जब तक जयंत विपक्षी दलों के साथ थे तब तक भारत जोड़ो यात्रा के कार्यक्रम में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाट बहुल इलाके भी शामिल थे. लेकिन जैसे ही जयंत बीजेपी के नज़दीक गये कांग्रेस ने यूपी में राहुल की यात्रा को ही छोटा कर दिया.

राहुल गांधी की यात्रा पहले पश्चिमी यूपी के शाहजहांपुर, बरेली, मुरादाबाद, संभल, अमरोहा, बुलंदशहर, अलीगढ़ और हाथरस भी जानी थी लेकिन जयंत गये तो अब यात्रा
झांसी से सीधे मध्य प्रदेश में एंट्री कर जाएगी. यानी कांग्रेस को पता है कि अगर जयंत का साथ नहीं होगा तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश में यात्रा कमज़ोर दिखाई देगी. इसीलिए कांग्रेस ने भारत जोड़ो यात्रा से पश्चिमी यूपी के जिलों को ही बाहर कर दिया. इतना ही नहीं अब राहुल की यात्रा यूपी में पहले के मुकाबले कम दिन रहेगी.

जहां एक तरफ कांग्रेस पश्चिमी यूपी से दूरी बना रही है वहीं जयंत चौधरी अपने इलाके में अपनी ज़मीन मज़बूत करने में जुट गये हैं. जयंत चौधरी ने साफ़ कर दिया है कि वो बागपत से लोकसभा चुनाव लड़ने जा रहे हैं.

एक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि जयंत चौधरी ने अपनी पार्टी के नेताओं को निर्देश दे दिया है कि वो बागपत में उनके लिए चुनावी तैयारियां शुरू कर दें. रिपोर्ट छपी है कि जयंत चौधरी ने दिल्ली में अपनी पार्टी के बागपत ज़िला अध्यक्ष को बता दिया है कि वो खुद बागपत से चुनाव लड़ेंगे.

रिपोर्ट में राष्ट्रीय लोकदल के जिला अध्यक्ष रामपाल धामा के हवाले से कहा गया है कि वो चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न मिलने की खुशी में जयंत चौधरी को मिठाई खिलाने दिल्ली में उनके घर गये थे. दिल्ली में जयंत ने अपने घर पर रामपाल धामा से कहा कि अध्यक्ष जी चुनाव की तैयारी करिये मैं बागपत से ही लोकसभा का चुनाव लड़ूंगा.

रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि आरएलडी के जिलाध्यक्ष ने जयंत चौधरी के निर्देश पर बागपत में संगठन के लोगों को चुनाव की तैयारी करने के लिए कह दिया है.

उधर दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी ने भी बागपत में जयंत चौधरी की संभावित दावेदारी के खिलाफ तैयारी शुरू कर दी है. जिस तरह जयंत चौधरी ने अपनी पार्टी के जिलाध्यक्ष को चुनावी तैयारी के लिए कहा उसी तरह अखिलेश यादव ने भी समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष को जयंत की उम्मीदवारी के खिलाफ अभी से काम करने को कह दिया है.

मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि अखिलेश यादव ने अपनी पार्टी की बागपत यूनिट से फोन पर बात की और बागपत के जातिगत समीकरण के हिसाब से तैयारी करने को कहा. समाजवादी पार्टी ने लोकसभा चुनाव में जयन्त चौधरी को बागपत में चुनौती देने के लिए गुर्जर या ब्राह्मण जाति के किसी कद्दावर नेता को मैदान में उतारने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है.

खबर छप चुकी है कि पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने रविवार सुबह फोन पर सपा जिलाध्यक्ष रविंद्र देव से बात की और बागपत में चल रही हलचल और जातिगत समीकरण का अपडेट लिया. मीडिया से बातचीत में सपा के जिलाध्यक्ष ने माना है कि अखिलेश यादव ने फोन पर उनसे बातचीत में बागपत में उम्मीदवार तय करने के बारे सुझाव लिया है.

हालांकि बागपत वो सीट है जहां से बीजेपी के सत्यपाल सिंह ने पिछले 2 लोकसभा चुनाव लगातार जीते हैं. 2019 में जब जयंत चौधरी को समाजवादी पार्टी का समर्थन हासिल था तब सत्यपाल सिंह ने जयंत चौधरी को साढ़े तेइस हज़ार वोटों से हराया था. हालांकि जयंत चौधरी भी पांच लाख से ज्यादा वोट पाने में कामयाब रहे थे.

अगर 2014 की बात करें तो बीजेपी के सत्यपाल सिंह ने समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी गुलाम मोहम्मद को 2 लाख से ज्यादा वोटों से बुरी तरह पराजित किया था.

2024 में अगर जयंत बीजेपी के समर्थन से बागपत लोकसभा चुनाव लड़ते हैं तो उनके जीतने की संभावना काफी बढ़ जाएगी क्योंकि 2014 में नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय राजनीति में आने से पहले जयंत चौधरी के पिता अजीत सिंह लगभग आधा दर्जन दफा इस सीट पर जीत चुके हैं. 

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