ओपी राजभर का पीला गमछा क्यों बना अंसारी का चमचा?

ओपी राजभर का पीला गमछा, क्यों बना अंसारी का चमचा?

2017 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी से गठबंधन करके…
और
2022 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले सपा से गठबंधन करके…अब 2024 में फिर से बीजेपी के साथ आने वाले… ओमप्रकाश राजभर का पीला गमछा अभी भी मुख्तार अंसारी का चमचा बना हुआ है.

मुख्तार अंसारी की मौत के बाद एक न्यूज़ चैनल से बातचीत करते हुए सुभासपा यानी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने एक बार फिर मुख्तार अंसारी को ग़रीबों का मसीहा बताया.

अपनी गोलियों की बौछार से पूरे उत्तर प्रदेश की शांति भंग करने वाले मुख्तार को एक बार फिर राजभर ने क्रांतिकारी बता दिया.

यूपी की मौजूदा योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर वही नेता हैं जो बांदा जेल में मुख्तार अंसारी से मेल-मुलाकात के लिए जाते थे.

ये वही ओम प्रकाश राजभर हैं जो सपा के साथ रहते हुए अंसारी परिवार के किसी भी सदस्य को यूपी की किसी भी सीट से चुनाव लड़वाने के लिए तैयार रहते थे.

ये वही ओम प्रकाश राजभर हैं जिन्होंने सपा के साथ गठबंधन में अपनी पार्टी के टिकट पर मुख्तार के बेटे अब्बास को मऊ विधानसभा सीट से चुनाव लड़वाया और जितवाया था.

सवाल है कि ओपी राजभर ने अंसारी परिवार का कौन सा ऐसा कर्ज़ा देना है जो वो आज भी मुख्तार की मुख्तारी का गाना गाने में लगे हैं.

जब तक वो सपा के साथ थे… तब तक माना जा सकता था कि वो सपा के पाले हुए मुख्तार का महिमामंडन तो करेंगे ही… लेकिन आज बीजेपी की सरकार में मंत्री होने के बाद भी… उनकी ऐसी कौन सी मजबूरी है जो वो… मुख्तार की मसीही का रैप सॉन्ग गा रहे हैं.

दोस्तो राजभर की इस बयानबाज़ी के पीछे है पूर्वांचल के राजनीतिक समीकरण. दरअसल ओपी राजभर की पूरी राजनीति यूपी के पूर्वांचल पर ही आधारित है.

2022 में हुए विधानसभा चुनाव के बाद उनकी पार्टी सुभासपा की स्थिति देखें तो
उसके पास 6 विधायक हैं और सभी विधायक पूर्वांचल के ज़िलों से ही आते हैं.

सुभासपा के गाजीपुर में दो विधायक जहूराबाद और जखनिया से हैं.

बलिया में एक विधायक बेल्थरारोड सीट से है.

मऊ ज़िले में एक विधायक मऊ सदर से है.

जौनपुर में एक विधायक जफराबाद से है.

और बस्ती जिले में एक विधायक महादेवा सीट से है.

जहूराबाद से खुद ओमप्रकाश राजभर,
जखनिया से बेदीराम,
बेल्थरारोड से हंसू राम,
जफराबाद से जगदीश नारायण,
महादेवा सीट से दूधराम
और
मऊ सदर सीट से अब्बास अंसारी सुभासपा का विधायक है.

खास बात ये है कि मऊ सदर सीट से विधायक अब्बास अंसारी…मुख्तार अंसारी का बेटा है. और उससे भी बड़ी खास बात ये हैं कि मऊ विधानसभा सीट से खुद मुख्तार अंसारी पांच बार विधायक रह चुका है.

तीसरी खास बात ये है कि मऊ विधानसभा सीट घोसी लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है और 2024 में घोसी लोकसभा सीट से कोई और नहीं बल्कि खुद ओमप्रकाश राजभर का बेटा अरविंद राजभर… चुनाव लड़ रहा है.

दूसरी तरफ़ सुभासपा को दो विधायक देने वाले गाजीपुर में भी अंसारी परिवार का पूरा दबदबा है. गाज़ीपुर का मौजूदा सांसद भी मुख्तार के घर से ही है. 2019 का लोकसभा चुनाव… मुख्तार अंसारी के भाई अफजाल अंसारी ने ही जीता था.

गाज़ीपुर की एक और खास बात है कि इसी जिले में मोहम्मदाबाद विधानसभा क्षेत्र भी है जो कि बलिया लोकसभा सीट के तहत आता है. मोहम्मदाबाद ही वो सीट है जहां से अफजाल अंसारी पांच बार,
उसका भाई सिबगतुल्लाह दो बार,
और सिबगतुल्लाह का बेटा सुहेब अंसारी 2022 में विधायक बना है.

यानी पूर्वांचल… खास तौर पर गाजीपुर और मऊ वो इलाके हैं जो कई लोकसभा और कई विधानसभा सीटों और चुनावों को प्रभावित करते हैं. इन दोनों जिलों में अंसारी परिवार की पैठ और दबदबा होने की वजह से ही ओमप्रकाश राजभर उनके सामने नतमस्तक हैं

अब आपको समझ आ गया होगा कि ओमप्रकाश राजभर क्यों मुख्तार अंसारी और उसके परिवार की चरण वंदना में लगे रहते हैं.

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